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विदेशी ऐश्वर्य न लुभाया और बने सेना के ‘यश’

Tue, 05 Sep 2017 01:28 AM IST
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:28 AM IST
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विदेशी ऐश्वर्य न लुभाया और बने सेना के ‘यश’

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गोरखपुर।
सामने ऐश्वर्य भरी जिंदगी वाली विदेशी नौकरियों के ऑफर थे। देश में भी सुख-सुविधा भरे कॅरिअर के विकल्प थे, लेकिन उन्हें तो कुछ और चाहिए था। इसलिए मेधावी यश आदित्य ने ऐसी नौकरियों के कई ऑफर ठुकराकर देशसेवा की राह चुनी। गोरखपुर के छोटे से गांव के इस युवा ने भारतीय सेना की सेवा के दौरान अपनी वीरता और कर्तव्य परायणता के दम पर कई कीर्तिमान गढ़े। 5 सितंबर 2007 की शहादत पर देश और सेना का ‘यश’ बन गए।
प्रसार भारती आकाशवाणी लखनऊ के सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिकारी प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी और वहीं केंद्रीय विद्यालय की उनकी शिक्षिका पत्नी मीना त्रिपाठी इकलौती संतान यश आदित्य का हर साल उनका शहादत दिवस मनाते हैं। पैतृक गांव नाथपुर खजनी में बचपन के साथियों के मुताबिक शहीद लेफ्टिनेंट यश आदित्य का जीवन मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी के पीछे भाग रहे युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करता है। उन्हें भारतीय सेना की डोगरा रेजीमेंट में पहली तैनाती अति दुर्गम स्थान लेह में मिली। वर्ष 2007 में उन्हें कमांडो ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। लेह से लौटते ही उनकी पलटन उनके नेतृत्व में झांसी के लिए रवाना हुई। झांसी जाने के दौरान 29 अगस्त 2007 को लुधियाना रेलवे स्टेशन पर मिलिट्री स्पेशल ट्रेन के पिछले हिस्से में टैंक के वैगन के बाहर निकले एक बोर्ड को अंदर धकेलते हुए इलेक्ट्रिक फ्लैश बर्न की दुर्घटना हुई। 70 फीसदी जलने के बाद उन्हें लुधियाना के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया जहां 5 सितंबर 2007 की भोर में वे शहीद हो गए। लखनऊ के बैकुंठ धाम में 6 सितंबर 2007 को सैन्य सम्मान के साथ 22 वर्षीय शहीद यश आदित्य का अंतिम संस्कार हुआ।
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‘नगर के गौरव श्री’ यश आदित्य
यश आदित्य उर्फ प्रतुल 17 वर्ष की उम्र में वर्ष 2001 के दौरान श्रीलंका में तीन दिवसीय वर्ल्ड पार्लियामेंट फॉर यूथ का हिस्सा बने। इंटरमीडिएट के दौरान एनडीए में टॉपर भी बने। उनकी सफलता पर गोरखपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने उन्हें ‘नगर के गौरव श्री’ सम्मान दिया।
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ट्रेनिंग के दौरान पढ़ाई भी जारी रही
10 जून 2006 को आईएमए देहरादून से लेफ्टिनेंट बनकर निकलने तक यश ने कंप्यूटर साइंस में बीएससी सहित सैन्य अध्ययन और रक्षा प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। इसके पहले गोरखपुर एयरफोर्स स्कूल से वह 10वीं के टॉपर थे तो 12वीं में भी उनकी मेधा चमकी थी।
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