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तख्त की जगह मिली दरी, जमीन पर सोए
Updated Fri, 01 Sep 2017 02:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
एसी की हवा के बीच मखमली बिस्तर पर सोने वाले निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला जेल की जमीन पर सामान्य बंदियों की तरह दरी बिछाकर सोना पड़ा। पीने के लिए उन्हें दो बोतल आरओ का पानी दिया गया। जेल में दाखिल होते ही डॉ. राजीव मिश्रा ने सोने के लिए तख्त की मांग की थी, लेकिन जेल मैनुअल का हवाला देते हुए जेलर ने मना कर दिया।
मेडिकल कॉलेज प्रकरण के मुख्य आरोपी बनाए गए निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को कोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को जेल भेजा गया। कड़ी सुरक्षा के बीच ही डॉ. राजीव मिश्रा को आदर्श कैदियों के साथ नेहरू बैरक और डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को महिला बैरक भेजा गया। उन्हें सोने के लिए दरी और पीने के लिए दो बोतल आरओ का पानी दिया गया। अन्य बंदियों-कैदियों की ओर से उन पर हमले का संदेह देख जेल प्रशासन ने उनके करीब कड़ी सुरक्षा रखी।
डॉ. पूर्णिमा बोलीं, बेस्ट ऑफ लक
मेडिकल कॉलेज प्रकरण में गिरफ्तार डॉ. राजीव मिश्रा जेल जाते ही बेचैन हो गए लेकिन डॉ. पूर्णिमा पर कोई असर नहीं पड़ा। महिला बैरक में उन्हें दाखिल किया गया तो जेलर व अन्य लोगों को डॉ. पूर्णिमा ने बेस्ट ऑफ लक बोला। यह सुनकर जेल प्रशासन के लोग भी हतप्रभ रह गए। इसके बाद डॉ. पूर्णिमा अंदर चली गईं।
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अमरमणि ने मिलने की इच्छा जताई
निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव के जेल में आने की खबर पाते ही सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने उनसे मिलने की इच्छा जताई मगर जेलर ने मुलाकात कराने से इंकार कर दिया। उनके प्रिंसिपल रहने के दौरान अमरमणि मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे और अक्सर इलाज के दौरान दोनों की मुलाकात होती थी।
एक ही गाड़ी से जेल गए दोनों
गिरफ्तार डॉक्टर दंपती को पुलिस ने एक ही गाड़ी से जेल भेजा। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपियों को कचहरी के मुख्य द्वार से बाहर लाया गया। पहले डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को गाड़ी में बैठाया गया, फिर डॉ. राजीव मिश्र को लेकर पुलिस सीधे जेल रवाना हो गई। डॉक्टर दंपती को कचहरी लाने और जेल ले जाने के दौरान पुलिस खासा सतर्कता बरत रही थी।
इन धाराओं में हुई जेल
गुलरिहा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 428/2017 दर्ज है। डॉ. राजीव मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 308, 409, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 का मामला बना है। इसके तहत ही न्यायिक अभिरक्षा रिमांड की याचना की गई थी। डॉ. पूर्णिमा को धारा 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13, धारा आठ और धारा नौ के तहत जेल भेजा गया है।
ये था मामला
10 और 11 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच बच्चों और कई मरीजों की मौत हो गई थी। इस मामले में एफआईआर कराई गई है। पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र मुख्य आरोपी हैं। उनकी पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब डॉ. कफील खान, डॉ. सतीश, पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी, चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल सहित तीन और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की कोशिश में लगी है। पुलिस और एसटीएफ की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।
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गोरखपुर।
एसी की हवा के बीच मखमली बिस्तर पर सोने वाले निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला जेल की जमीन पर सामान्य बंदियों की तरह दरी बिछाकर सोना पड़ा। पीने के लिए उन्हें दो बोतल आरओ का पानी दिया गया। जेल में दाखिल होते ही डॉ. राजीव मिश्रा ने सोने के लिए तख्त की मांग की थी, लेकिन जेल मैनुअल का हवाला देते हुए जेलर ने मना कर दिया।
मेडिकल कॉलेज प्रकरण के मुख्य आरोपी बनाए गए निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को कोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को जेल भेजा गया। कड़ी सुरक्षा के बीच ही डॉ. राजीव मिश्रा को आदर्श कैदियों के साथ नेहरू बैरक और डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को महिला बैरक भेजा गया। उन्हें सोने के लिए दरी और पीने के लिए दो बोतल आरओ का पानी दिया गया। अन्य बंदियों-कैदियों की ओर से उन पर हमले का संदेह देख जेल प्रशासन ने उनके करीब कड़ी सुरक्षा रखी।
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डॉ. पूर्णिमा बोलीं, बेस्ट ऑफ लक
मेडिकल कॉलेज प्रकरण में गिरफ्तार डॉ. राजीव मिश्रा जेल जाते ही बेचैन हो गए लेकिन डॉ. पूर्णिमा पर कोई असर नहीं पड़ा। महिला बैरक में उन्हें दाखिल किया गया तो जेलर व अन्य लोगों को डॉ. पूर्णिमा ने बेस्ट ऑफ लक बोला। यह सुनकर जेल प्रशासन के लोग भी हतप्रभ रह गए। इसके बाद डॉ. पूर्णिमा अंदर चली गईं।
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अमरमणि ने मिलने की इच्छा जताई
निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव के जेल में आने की खबर पाते ही सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने उनसे मिलने की इच्छा जताई मगर जेलर ने मुलाकात कराने से इंकार कर दिया। उनके प्रिंसिपल रहने के दौरान अमरमणि मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे और अक्सर इलाज के दौरान दोनों की मुलाकात होती थी।
एक ही गाड़ी से जेल गए दोनों
गिरफ्तार डॉक्टर दंपती को पुलिस ने एक ही गाड़ी से जेल भेजा। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपियों को कचहरी के मुख्य द्वार से बाहर लाया गया। पहले डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को गाड़ी में बैठाया गया, फिर डॉ. राजीव मिश्र को लेकर पुलिस सीधे जेल रवाना हो गई। डॉक्टर दंपती को कचहरी लाने और जेल ले जाने के दौरान पुलिस खासा सतर्कता बरत रही थी।
इन धाराओं में हुई जेल
गुलरिहा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 428/2017 दर्ज है। डॉ. राजीव मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 308, 409, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 का मामला बना है। इसके तहत ही न्यायिक अभिरक्षा रिमांड की याचना की गई थी। डॉ. पूर्णिमा को धारा 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13, धारा आठ और धारा नौ के तहत जेल भेजा गया है।
ये था मामला
10 और 11 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच बच्चों और कई मरीजों की मौत हो गई थी। इस मामले में एफआईआर कराई गई है। पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र मुख्य आरोपी हैं। उनकी पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब डॉ. कफील खान, डॉ. सतीश, पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी, चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल सहित तीन और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की कोशिश में लगी है। पुलिस और एसटीएफ की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।
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