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केवट की चतुराई ने लोगों को मोहा
Updated Sat, 23 Sep 2017 10:42 PM IST
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गोरखपुर।
आर्यनगर रामलीला समिति के तत्वावधान में मानसरोवर मैदान में जारी रामलीला के पांचवें दिन श्रीराम-निषादराज संवाद के मंचन में केवट की चतुराई ने दर्शकों का मन मोह लिया। अयोध्या की मां सरयू आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने पंडित शिव शरण मिश्र के नेतृत्व में बेहतरीन अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान राम की भूमिका में रोशन मिश्रा, लक्षमण के रूप में अनुज, जानकी बनकर दीपक कुमार, निषादराज के रोल में लक्षमण सिंह, केवट के चरित्र में शांति तिवारी ने जीवंत अभिनय किया।
मंचन की शुरुआत राम, लक्षमण और जानकी के वनगमन का समाचार सुनकर सभी अयोध्यावासी के उनके साथ वन जाने को तैयार होने के दृश्य से हुई। प्रभु श्रीराम मध्य रात्रि में भगवान शिव की वंदना करके सभी को सोया हुआ छोड़कर वनवास को चले जाते हैं। भगवान शृंगवेरपुर जा पहुंचते हैं। जहां निषादराज उनसे श्रृंगवेरपुर में ही निवास करने की प्रार्थना करते हैं। भगवान महाराज दशरथ की आज्ञा का पालन करते हुए वन की ओर बढ़ जाते हैं और गंगा तट पहुंचते हैं। वहां लक्ष्मण और मां जानकी के साथ गंगा पूजन करते हैं। फिर गंगा पार करने के लिए केवट से संवाद करते हैं। केवटराज अपनी चतुराई से भगवान के चरण पखारने की आज्ञा पा लेते हैं। केवट के रूप में शांति तिवारी ने बेहतरीन अभिनय करके लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद भगवान चित्रकूट पहुंचते हैं। मंचन से पहले डॉ. सुरेश, डॉ. जेपी मिश्र व पुष्प दंत जैन ने भगवान श्रीराम की आरती की। इस अवसर पर भगवती जालान, दीपजी अग्रवाल, मनीष अग्रवाल सराफ , कीर्ति रमन दास, महेश गर्ग, राजीव रंजन अग्रवाल, पद्म प्रकाश अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, राजू अग्रवाल, अनुराग गुप्ता, नवोदित त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
आर्यनगर रामलीला समिति के तत्वावधान में मानसरोवर मैदान में जारी रामलीला के पांचवें दिन श्रीराम-निषादराज संवाद के मंचन में केवट की चतुराई ने दर्शकों का मन मोह लिया। अयोध्या की मां सरयू आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने पंडित शिव शरण मिश्र के नेतृत्व में बेहतरीन अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान राम की भूमिका में रोशन मिश्रा, लक्षमण के रूप में अनुज, जानकी बनकर दीपक कुमार, निषादराज के रोल में लक्षमण सिंह, केवट के चरित्र में शांति तिवारी ने जीवंत अभिनय किया।
मंचन की शुरुआत राम, लक्षमण और जानकी के वनगमन का समाचार सुनकर सभी अयोध्यावासी के उनके साथ वन जाने को तैयार होने के दृश्य से हुई। प्रभु श्रीराम मध्य रात्रि में भगवान शिव की वंदना करके सभी को सोया हुआ छोड़कर वनवास को चले जाते हैं। भगवान शृंगवेरपुर जा पहुंचते हैं। जहां निषादराज उनसे श्रृंगवेरपुर में ही निवास करने की प्रार्थना करते हैं। भगवान महाराज दशरथ की आज्ञा का पालन करते हुए वन की ओर बढ़ जाते हैं और गंगा तट पहुंचते हैं। वहां लक्ष्मण और मां जानकी के साथ गंगा पूजन करते हैं। फिर गंगा पार करने के लिए केवट से संवाद करते हैं। केवटराज अपनी चतुराई से भगवान के चरण पखारने की आज्ञा पा लेते हैं। केवट के रूप में शांति तिवारी ने बेहतरीन अभिनय करके लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद भगवान चित्रकूट पहुंचते हैं। मंचन से पहले डॉ. सुरेश, डॉ. जेपी मिश्र व पुष्प दंत जैन ने भगवान श्रीराम की आरती की। इस अवसर पर भगवती जालान, दीपजी अग्रवाल, मनीष अग्रवाल सराफ , कीर्ति रमन दास, महेश गर्ग, राजीव रंजन अग्रवाल, पद्म प्रकाश अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, राजू अग्रवाल, अनुराग गुप्ता, नवोदित त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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