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भारत में ही हो योग का पेटेंट
बलरामपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2015 11:58 PM IST
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एक तरफ जहां योग को लेकर देश में विरोधाभास है वहीं दूसरी तरफ अख्तर व उनकी पत्नी शाइस्ता को इसकी कोई परवाह नहीं है। दोनों ने योग प्रशिक्षण को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। इनका कहना है कि योग विद्या का पेटेंट भारत में ही होना चाहिए।
भारत ने ही पूरी दुनिया को योग का संदेश दिया है। पूरे देश में कोचिंग की तरह योग ट्रेनिंग सेंटर खुलने चाहिए। स्थानीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को आयोजित होने वाले योग शिविर की तैयारी में व्यस्त मोहम्मद अख्तर व उनकी पत्नी शाइस्ता बानो ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत की।
इनका कहना है कि, योग ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है। योग से व्यक्ति असाध्य बीमारियों से भी मुक्ति पा सकता है। विश्व योग दिवस पर देश में कुछ लोगों द्वारा विवाद उत्पन्न करने के सवाल पर पति-पत्नी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहना है।
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लोगों को निशुल्क योग की ट्रेनिंग देना उनके जीवन का मिशन बन गया है और वह लोग इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित हैं। दोनों का कहना है कि उनके मिशन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से बल मिला है।
अख्तर व शाइस्ता ने बताया कि वह लोग मूल रूप से लखनऊ के इंदिरा नगर के रहने वाले हैं। योग सीखना बचपन से ही अख्तर का शौक था। 40 वर्षीय अख्तर करीब 20 साल से लोगों को योग की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
अख्तर ने बताया कि उन्होंने केरल स्थित सेंट्रल भारत सेवक समाज संस्थान से योगा तथा आयुर्वेद व पंचकर्म का कोर्स भी किया है। शाइस्ता बानो ने बताया कि वर्ष 2001 में उनकी अख्तर से शादी हुई। पति से प्रेरणा पाकर शाइस्ता ने भी योगा को ही अपना मिशन बना लिया।
दोनों ने मोहम्मद सईद मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी लखनऊ नाम से संस्था भी बनाई है। अख्तर संस्था के अध्यक्ष तथा शाइस्ता सचिव हैं। ये दोनों लखनऊ तथा बाराबंकी में जरूरतमंदों को योग तथा अन्य स्वरोजगार की नि:शुल्क ट्रेनिंग भी देते हैं।
रमजान में सुबह सहरी खाने के बाद शाइस्ता तथा अख्तर स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचकर लोगों को योगाभ्यास करा रहे हैं। शाइस्ता ने बताया कि उन्होंने बलरामपुर में 21 मई से योग ट्रेनिंग देने की शुरुआत की थी। 21 जून को विश्व योग दिवस पर इनकी संस्था के ट्रेनिंग कैंप का समापन होगा।
पति-पत्नी का कहना है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में स्वस्थ रहने के लिए योग अवश्य करना चाहिए।
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भारत ने ही पूरी दुनिया को योग का संदेश दिया है। पूरे देश में कोचिंग की तरह योग ट्रेनिंग सेंटर खुलने चाहिए। स्थानीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को आयोजित होने वाले योग शिविर की तैयारी में व्यस्त मोहम्मद अख्तर व उनकी पत्नी शाइस्ता बानो ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत की।
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इनका कहना है कि, योग ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है। योग से व्यक्ति असाध्य बीमारियों से भी मुक्ति पा सकता है। विश्व योग दिवस पर देश में कुछ लोगों द्वारा विवाद उत्पन्न करने के सवाल पर पति-पत्नी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहना है।
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लोगों को निशुल्क योग की ट्रेनिंग देना उनके जीवन का मिशन बन गया है और वह लोग इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित हैं। दोनों का कहना है कि उनके मिशन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से बल मिला है।
अख्तर व शाइस्ता ने बताया कि वह लोग मूल रूप से लखनऊ के इंदिरा नगर के रहने वाले हैं। योग सीखना बचपन से ही अख्तर का शौक था। 40 वर्षीय अख्तर करीब 20 साल से लोगों को योग की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
अख्तर ने बताया कि उन्होंने केरल स्थित सेंट्रल भारत सेवक समाज संस्थान से योगा तथा आयुर्वेद व पंचकर्म का कोर्स भी किया है। शाइस्ता बानो ने बताया कि वर्ष 2001 में उनकी अख्तर से शादी हुई। पति से प्रेरणा पाकर शाइस्ता ने भी योगा को ही अपना मिशन बना लिया।
दोनों ने मोहम्मद सईद मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी लखनऊ नाम से संस्था भी बनाई है। अख्तर संस्था के अध्यक्ष तथा शाइस्ता सचिव हैं। ये दोनों लखनऊ तथा बाराबंकी में जरूरतमंदों को योग तथा अन्य स्वरोजगार की नि:शुल्क ट्रेनिंग भी देते हैं।
रमजान में सुबह सहरी खाने के बाद शाइस्ता तथा अख्तर स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचकर लोगों को योगाभ्यास करा रहे हैं। शाइस्ता ने बताया कि उन्होंने बलरामपुर में 21 मई से योग ट्रेनिंग देने की शुरुआत की थी। 21 जून को विश्व योग दिवस पर इनकी संस्था के ट्रेनिंग कैंप का समापन होगा।
पति-पत्नी का कहना है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में स्वस्थ रहने के लिए योग अवश्य करना चाहिए।