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Gonda News: जैविक खेती अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ें महिलाएं
Thu, 25 Jun 2026 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 25 Jun 2026 11:11 PM IST
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कार्यक्रम में शामिल अतिथि।
गोंडा। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत सालपुर स्थित सामुदायिक केंद्र में महिला सशक्तीकरण एवं कृषि जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने महिलाओं को जैविक खेती, गन्ना उत्पादन और श्रीअन्न की खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने तथा परिवार की आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। कहा कि खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम भी बन सकती है।
जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने गन्ने की उन्नत प्रजातियों, आधुनिक खेती तकनीकों और विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के लिए प्रमुख नकदी फसल है और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर उत्पादन व आय दोनों में वृद्धि की जा सकती है।
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने श्रीअन्न (मोटे अनाज) की उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि बाजरा, ज्वार, कोदो, सांवा और रागी जैसी फसलें कम पानी और कम लागत में तैयार हो जाती हैं। यह फसलें पोषण से भरपूर होने के साथ बदलते मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर विकल्प हैं। उन्होंने महिलाओं को पोषण वाटिका विकसित करने और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
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जिला उद्यान अधिकारी रश्मि शर्मा ने फूलों की खेती, सब्जी उत्पादन और बागवानी की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमित भूमि में भी फूलों, सब्जियों और फलदार पौधों की खेती कर महिलाएं अतिरिक्त आय अर्जित कर सकती हैं। उन्होंने उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं और अनुदान की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में पानी संस्थान के प्रतिनिधि राजीव मिश्रा, अविनाश, ज्ञान प्रकाश, बलराम, वीरेंद्र, रीता और त्रिलोकी ने जल संरक्षण पर जागरूक किया। इस अवसर पर महिलाओं ने जैविक खेती को बढ़ावा देने, जल संरक्षण अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
महिलाओं ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए जवाब
प्रश्न : जैविक खेती शुरू करने के लिए पहला कदम क्या होना चाहिए। -शिवानी शुक्ला
उत्तर : रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें और गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट व जैविक कीटनाशकों का उपयोग शुरू करें। छोटे स्तर से शुरुआत कर धीरे-धीरे पूरे खेत में जैविक खेती अपनाई जा सकती है।
प्रश्न : कम जमीन में कौन सी खेती अधिक लाभदायक है। -अंकिता
उत्तर : सब्जी, फूल और नर्सरी की खेती कम भूमि में बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।
प्रश्न : गन्ने की खेती में लागत कम और उत्पादन अधिक कैसे हो। -मनीषा
उत्तर : उन्नत प्रजातियों का चयन, समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
प्रश्न : स्वयं सहायता समूहों से महिलाएं कैसे लाभ कमा सकती हैं।-प्रिया
उत्तर : जैविक खाद निर्माण, मशरूम उत्पादन, सब्जी एवं फूलों की खेती, साथ ही कृषि उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
प्रश्न : पानी की कमी के बीच खेती को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।-वंदना मिश्रा
उत्तर : वर्षा जल संचयन, खेत तालाब, मेड़बंदी और सूक्ष्म सिंचाई की तकनीकों से पानी की बचत कर खेती को बेहतर बनाया जा सकता है।
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जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने गन्ने की उन्नत प्रजातियों, आधुनिक खेती तकनीकों और विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के लिए प्रमुख नकदी फसल है और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर उत्पादन व आय दोनों में वृद्धि की जा सकती है।
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जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने श्रीअन्न (मोटे अनाज) की उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि बाजरा, ज्वार, कोदो, सांवा और रागी जैसी फसलें कम पानी और कम लागत में तैयार हो जाती हैं। यह फसलें पोषण से भरपूर होने के साथ बदलते मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर विकल्प हैं। उन्होंने महिलाओं को पोषण वाटिका विकसित करने और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
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जिला उद्यान अधिकारी रश्मि शर्मा ने फूलों की खेती, सब्जी उत्पादन और बागवानी की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमित भूमि में भी फूलों, सब्जियों और फलदार पौधों की खेती कर महिलाएं अतिरिक्त आय अर्जित कर सकती हैं। उन्होंने उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं और अनुदान की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में पानी संस्थान के प्रतिनिधि राजीव मिश्रा, अविनाश, ज्ञान प्रकाश, बलराम, वीरेंद्र, रीता और त्रिलोकी ने जल संरक्षण पर जागरूक किया। इस अवसर पर महिलाओं ने जैविक खेती को बढ़ावा देने, जल संरक्षण अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
महिलाओं ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए जवाब
प्रश्न : जैविक खेती शुरू करने के लिए पहला कदम क्या होना चाहिए। -शिवानी शुक्ला
उत्तर : रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें और गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट व जैविक कीटनाशकों का उपयोग शुरू करें। छोटे स्तर से शुरुआत कर धीरे-धीरे पूरे खेत में जैविक खेती अपनाई जा सकती है।
प्रश्न : कम जमीन में कौन सी खेती अधिक लाभदायक है। -अंकिता
उत्तर : सब्जी, फूल और नर्सरी की खेती कम भूमि में बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।
प्रश्न : गन्ने की खेती में लागत कम और उत्पादन अधिक कैसे हो। -मनीषा
उत्तर : उन्नत प्रजातियों का चयन, समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
प्रश्न : स्वयं सहायता समूहों से महिलाएं कैसे लाभ कमा सकती हैं।-प्रिया
उत्तर : जैविक खाद निर्माण, मशरूम उत्पादन, सब्जी एवं फूलों की खेती, साथ ही कृषि उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
प्रश्न : पानी की कमी के बीच खेती को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।-वंदना मिश्रा
उत्तर : वर्षा जल संचयन, खेत तालाब, मेड़बंदी और सूक्ष्म सिंचाई की तकनीकों से पानी की बचत कर खेती को बेहतर बनाया जा सकता है।