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अपने दम पर मुकाम हासिल कर मिसाल बनीं महिलाएं
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गोंडा। जिले में महिलाओं ने अपने दम पर मुकाम हासिल करके मिसाल कायम किया है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं में भी इन्होंने अलग ही स्थान बनाया है। जिले में महिला समूहों ने अपना स्थान बनाया और अब विभाग की रोल मॉडल बन गई हैं। ये महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने अभावों में भी हिम्मत नहीं हारी और अपनी सूझबूझ और मेहनत से आगे कदम बढ़ाए। ये अपने कार्य क्षेत्र में नजीर बन गईं हैं, कई स्तर पर सम्मान हासिल कर चुकी हैं। इन महिलाओं ने कोरोना संकट की चुनौतियों को भी स्वीकार किया। समाज को एक नई दिशा देने का काम किया।
जिले में वैसे तो कई महिलाएं हैं जो किसी न किसी क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने अपने नए तरीके से समाज में स्थान बनाया है। तरबगंज के करनीपुर की मंजू पांडेय पौधे की नर्सरी तैयार करके तरक्की की ओर आगे बढ़ीं। इस समय उनके साथ दस महिलाएं स्वावलंबी हो रही हैं। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करनैलगंज में नर्स मेंटर गुड़िया के कार्यों की सराहना हो रही है। उनके कुशल प्रबंधन से स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा मिली है। वह अस्पताल आने वाली महिलाओं की पहली पसंद हैं।
गन्ना किसानों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत गन्ने का बीज है। इसके लिए करनीपुर की मंजू पांडेय ने पहल की। प्रेरणा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से नर्सरी बनाई। अब तक उन्होंने सात लाख 90 हजार पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराए। मंजू ने सफलता को देखकर तीन लाख पौधे और तैयार किए। उनकी लगन को देखकर गन्ना आयुक्त की ओर से सराहना की गई। उनका उत्साहवर्धन किया तथा 21 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य दिया।
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अब मंजू गन्ने के 21 लाख पौधे तैयार करने में जुटी हैं। उनके साथ 10 और महिलाएं भी जुड़ी हैं। इसके साथ ही ब्लॉक में कई किसान भी उनसे सीख रहे हैं कि नर्सरी कैसे तैयार करें। मंजू कहती हैं कि इस साल वह 21 लाख पौधों का लक्ष्य हासिल कर लेंगी। गन्ना विभाग की ओर से उन्हें तकनीकी जानकारी मुहैय्या कराई जा रही है और इस बार उन्हें सम्मानित किए जाना है।
सही प्रबंधन और कुशल मार्गदर्शन से महिलाओं की जान नर्स मेंटर गुड़िया ने बचाकर अपनी पहचान बनाई है। आर्यनगर की गुड़िया ने बचपन में अपनी बीमार नानी का दर्द और इलाज के दौरान उनकी मौत भी देखी है। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में आने का निर्णय लिया। बीएससी नर्सिंग करने के बाद सीएचसी करनैलगंज में उनकी नियुक्ति मई 2018 में हुई।
नानी के इलाज की सीख वह हमेशा ध्यान में रखते हुए महिलाओं के इलाज पर विशेष ध्यान देने लगीं। वर्ष 2021 में सीएचसी पर कुल 4799 प्रसव कराये गए तथा 259 जटिल प्रसव वाली महिलाओं को रेफर किया गया। गुड़िया ने प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं का अपने संयम, सूझ-बूझ और कुशल मार्गदर्शन से प्रबंधन कर अब तक कई महिलाओं की जान बचायी है। इस काम से उन्हें सीएचसी पर व क्षेत्र के लोगों में एक अलग पहचान मिली है।
अस्पताल में आते ही महिलाएं और घर वाले सबसे पहले गुड़िया दीदी को ही पूछते हैं। अस्पताल में महिलाओं के दर्द को उनका हौसला बढ़ाकर दूर करने के साथ ही निदान के उपाय करने में गुड़िया का कोई जवाब नहीं है। गुड़िया बताती हैं कि जब उनके प्रयास से मां-बच्चे की जान बच जाती है और वे हंसी-खुशी घर वापस जाते हैं, तो उनके बचपन का सपना साकार होता दिखता है। इससे वह खुशी, आत्मसंतुष्टि और आत्मसम्मान महसूस करती हैं। इस तरह गुड़िया अब महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं।
जिले के कटराबाजार क्षेत्र के सर्वांगपुर जयसिंह पुरवा की याशमीन को ससुराल से निकाल दिया गया लेकिन उन्होंने हिम्म्त नहीं हारी। गांव में एक झोपड़ी डालकर रहने लगीं। उनके चार बेटियां हैं, उन्होंने कपड़े सिलकर जीवनयापन शुरू किया। साल 2018 में उन्होंने स्वयं सहायता समूह बनाया और फिर स्कूली ड्रेस तैयार करने के साथ ही कई अन्य काम करके अपना अलग ही स्थान बनाया।
यशमीन अपने पिता पर बोझ नहीं बनना चाहतीं थीं, इसलिए वह झोपड़ी डालकर वहीं अपने ससुरालवालों के घर रहने लगीं। उन्होंने समाज की रूढ़ियों व पूर्वाग्रहों से संघर्ष कर सफल जीवनयापन करने वाली महिलाओं में अपना नाम शामिल किया। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुरेश सोनी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें ब्रेम द बायस कार्यक्रम में चयनित किया है। उन्होंने कहा कि याशमीन के संघर्ष से महिलाओं को एक नई राह मिली है।
धानेपुर क्षेत्र की फूलकुमारी उर्फ जूली पांडेय का अपना अलग ही स्थान है। कई सालों से वह पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में योगदान कर रहीं हैं। अपने गांव के साथ-साथ जनपद में अपनी नई पहचान बन चुकी हैं। इन्होंने जल, पर्यावरण एवं पक्षी संरक्षण को लेकर काम किया है। इन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत अभियान चलाया है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सार्वजनिक शौचालय के निर्माण के लिए आमजनों को जागरूक भी किया जिसके लिए जिलाधिकारी ने इन्हें स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया था। जूली को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए अब तक ‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’, ‘देवी अवार्ड’ व ‘स्वाभिमान अवार्ड’ से सम्मानित जा चुका है। इस बार भी उन्हें चयनित किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व सोमवार को किशोरियों व महिलाओं के साथ उनकी शिक्षा व स्वावलंबन की चुनौतियों पर चर्चा के लिए बेलसर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में ‘वुमन ऑफ टुमारो’ कार्यक्रम हुआ। बेटियों और महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे हौसले और उत्साह से समाज में बदलाव लाएंगीं। महिला कल्याण विभाग की प्रभारी महिला कल्याण अधिकारी ज्योत्सना सिंह ने कहा कि हमें अपनी प्रतिभा, दक्षता, क्षमता, अभिरुचि व रुझान को पहचानना है।
महिलाओं में गुणों का भंडार है और ईश्वर ने जिन गुणों से हमें नवाजा है, उन गुणों को निखारना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं रूढ़िवादिता की बेड़ियां काटकर अपने सपनों को साकार करने में लगी हैं। इतना ही नहीं, चाहे व्यवसाय हो, साहित्य जगत हो, प्रशासनिक सेवा हो, विदेश सेवा हो, पुलिस विभाग हो या हवाई सेवा हो या फिर खेल मैदान, हर जगह महिलाएं अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं।
विद्यालय की प्रभारी वार्डेन सविता मिश्रा ने कहा कि अपनी अंदरूनी शक्ति को प्रभावशाली विचारों से सजाने से महिलाएं और ताकतवर होंगी। इस दौरान शिक्षिका सुमन पांडेय, संगीता सिंह, पूनम सिंह, माया देवी, मंजू देवी व कमलेश आदि मौजूद रहीं।
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जिले में वैसे तो कई महिलाएं हैं जो किसी न किसी क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने अपने नए तरीके से समाज में स्थान बनाया है। तरबगंज के करनीपुर की मंजू पांडेय पौधे की नर्सरी तैयार करके तरक्की की ओर आगे बढ़ीं। इस समय उनके साथ दस महिलाएं स्वावलंबी हो रही हैं। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करनैलगंज में नर्स मेंटर गुड़िया के कार्यों की सराहना हो रही है। उनके कुशल प्रबंधन से स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा मिली है। वह अस्पताल आने वाली महिलाओं की पहली पसंद हैं।
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गन्ना किसानों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत गन्ने का बीज है। इसके लिए करनीपुर की मंजू पांडेय ने पहल की। प्रेरणा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से नर्सरी बनाई। अब तक उन्होंने सात लाख 90 हजार पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराए। मंजू ने सफलता को देखकर तीन लाख पौधे और तैयार किए। उनकी लगन को देखकर गन्ना आयुक्त की ओर से सराहना की गई। उनका उत्साहवर्धन किया तथा 21 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य दिया।
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अब मंजू गन्ने के 21 लाख पौधे तैयार करने में जुटी हैं। उनके साथ 10 और महिलाएं भी जुड़ी हैं। इसके साथ ही ब्लॉक में कई किसान भी उनसे सीख रहे हैं कि नर्सरी कैसे तैयार करें। मंजू कहती हैं कि इस साल वह 21 लाख पौधों का लक्ष्य हासिल कर लेंगी। गन्ना विभाग की ओर से उन्हें तकनीकी जानकारी मुहैय्या कराई जा रही है और इस बार उन्हें सम्मानित किए जाना है।
सही प्रबंधन और कुशल मार्गदर्शन से महिलाओं की जान नर्स मेंटर गुड़िया ने बचाकर अपनी पहचान बनाई है। आर्यनगर की गुड़िया ने बचपन में अपनी बीमार नानी का दर्द और इलाज के दौरान उनकी मौत भी देखी है। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में आने का निर्णय लिया। बीएससी नर्सिंग करने के बाद सीएचसी करनैलगंज में उनकी नियुक्ति मई 2018 में हुई।
नानी के इलाज की सीख वह हमेशा ध्यान में रखते हुए महिलाओं के इलाज पर विशेष ध्यान देने लगीं। वर्ष 2021 में सीएचसी पर कुल 4799 प्रसव कराये गए तथा 259 जटिल प्रसव वाली महिलाओं को रेफर किया गया। गुड़िया ने प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं का अपने संयम, सूझ-बूझ और कुशल मार्गदर्शन से प्रबंधन कर अब तक कई महिलाओं की जान बचायी है। इस काम से उन्हें सीएचसी पर व क्षेत्र के लोगों में एक अलग पहचान मिली है।
अस्पताल में आते ही महिलाएं और घर वाले सबसे पहले गुड़िया दीदी को ही पूछते हैं। अस्पताल में महिलाओं के दर्द को उनका हौसला बढ़ाकर दूर करने के साथ ही निदान के उपाय करने में गुड़िया का कोई जवाब नहीं है। गुड़िया बताती हैं कि जब उनके प्रयास से मां-बच्चे की जान बच जाती है और वे हंसी-खुशी घर वापस जाते हैं, तो उनके बचपन का सपना साकार होता दिखता है। इससे वह खुशी, आत्मसंतुष्टि और आत्मसम्मान महसूस करती हैं। इस तरह गुड़िया अब महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं।
जिले के कटराबाजार क्षेत्र के सर्वांगपुर जयसिंह पुरवा की याशमीन को ससुराल से निकाल दिया गया लेकिन उन्होंने हिम्म्त नहीं हारी। गांव में एक झोपड़ी डालकर रहने लगीं। उनके चार बेटियां हैं, उन्होंने कपड़े सिलकर जीवनयापन शुरू किया। साल 2018 में उन्होंने स्वयं सहायता समूह बनाया और फिर स्कूली ड्रेस तैयार करने के साथ ही कई अन्य काम करके अपना अलग ही स्थान बनाया।
यशमीन अपने पिता पर बोझ नहीं बनना चाहतीं थीं, इसलिए वह झोपड़ी डालकर वहीं अपने ससुरालवालों के घर रहने लगीं। उन्होंने समाज की रूढ़ियों व पूर्वाग्रहों से संघर्ष कर सफल जीवनयापन करने वाली महिलाओं में अपना नाम शामिल किया। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुरेश सोनी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें ब्रेम द बायस कार्यक्रम में चयनित किया है। उन्होंने कहा कि याशमीन के संघर्ष से महिलाओं को एक नई राह मिली है।
धानेपुर क्षेत्र की फूलकुमारी उर्फ जूली पांडेय का अपना अलग ही स्थान है। कई सालों से वह पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में योगदान कर रहीं हैं। अपने गांव के साथ-साथ जनपद में अपनी नई पहचान बन चुकी हैं। इन्होंने जल, पर्यावरण एवं पक्षी संरक्षण को लेकर काम किया है। इन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत अभियान चलाया है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सार्वजनिक शौचालय के निर्माण के लिए आमजनों को जागरूक भी किया जिसके लिए जिलाधिकारी ने इन्हें स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया था। जूली को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए अब तक ‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’, ‘देवी अवार्ड’ व ‘स्वाभिमान अवार्ड’ से सम्मानित जा चुका है। इस बार भी उन्हें चयनित किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व सोमवार को किशोरियों व महिलाओं के साथ उनकी शिक्षा व स्वावलंबन की चुनौतियों पर चर्चा के लिए बेलसर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में ‘वुमन ऑफ टुमारो’ कार्यक्रम हुआ। बेटियों और महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे हौसले और उत्साह से समाज में बदलाव लाएंगीं। महिला कल्याण विभाग की प्रभारी महिला कल्याण अधिकारी ज्योत्सना सिंह ने कहा कि हमें अपनी प्रतिभा, दक्षता, क्षमता, अभिरुचि व रुझान को पहचानना है।
महिलाओं में गुणों का भंडार है और ईश्वर ने जिन गुणों से हमें नवाजा है, उन गुणों को निखारना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं रूढ़िवादिता की बेड़ियां काटकर अपने सपनों को साकार करने में लगी हैं। इतना ही नहीं, चाहे व्यवसाय हो, साहित्य जगत हो, प्रशासनिक सेवा हो, विदेश सेवा हो, पुलिस विभाग हो या हवाई सेवा हो या फिर खेल मैदान, हर जगह महिलाएं अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं।
विद्यालय की प्रभारी वार्डेन सविता मिश्रा ने कहा कि अपनी अंदरूनी शक्ति को प्रभावशाली विचारों से सजाने से महिलाएं और ताकतवर होंगी। इस दौरान शिक्षिका सुमन पांडेय, संगीता सिंह, पूनम सिंह, माया देवी, मंजू देवी व कमलेश आदि मौजूद रहीं।