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महिला अस्पताल में नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
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गोंडा के जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासांउड कक्ष में लटक रहा ताला।
- फोटो : GONDA
गोंडा। जिला महिला अस्पताल में काफी दिन से अल्ट्रासाउंड करने के लिए तैनात डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट के रोजाना न आने से अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न हो पाने की वजह से अस्पताल में इलाज कराने के लिए रोजाना आने वाली करीब एक हजार महिलाओं को बाहर के पैथोलॉजी पर अल्ट्रासाउंड कराने में रोजाना 50 हजार रुपये गंवानी पड़ती है। जिला महिला अस्पताल में शनिवार को रेडियोलॉजिस्ट के न आने से अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ताला लगा मिला। अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाली महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बाहर के निजी पैथोलॉजी का रास्ता दिखाया जाता है। अस्पताल के चिकित्सक व उनके दलालों और निजी पैथोलॉजी संचालकों के सिंडीकेट के खेल में गर्भवती महिलाओं की जेब कटती है।
जिला महिला अस्पताल में तैनात रहे रेडियोलॉजिस्ट डॉ.आरसी वर्मा का एक साल पूर्व निधन हो जाने के बाद से जिला महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट पीके श्रीवास्तव को सोम, बुध व शुक्रवार को जिला महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड करने के लिए अटैच किया गया था। तीन दिन महिलाओं को बिना जांच के ही या तो लौटना पड़ रहा था। इससे समस्या के हल के लिए पूर्व सीएमओ डॉ. एसके श्रीवास्तव ने मनकापुर सीएचसी के चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार राय को जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के काम के लिए स्थानांतरित कर दिया था।
बताया जाता है कि डॉ. अनिल कुमार राय ने अपने राजनीतिक रसूख के चलते मनकापुर अभी तक नहीं छोड़ा है। वह अपने प्रभाव से अस्पताल के अधिकारियों से सिर्फ तीन दिन ही अल्ट्रासाउंड करने के लिए हामी भरी है। अस्पताल प्रशासन व चिकित्सक के मनमानी करने के खेल का खामियाजा जिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को जिला महिला अस्पताल में चेकअप कराने आयी महिलाओं को भारी पड़ रही। जितनी महिलाओं को चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी वह अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा देख मायूस लौट गईं। ऐसी महिलाओं पर नजर रख रहे चिकित्सकों व निजी पैथोलॉजी के दलालों ने बाहर ले जाकर मोटी रकम लेकर अल्ट्रासाउंड कराया। अस्पताल प्रशासन व चिकित्सकों के मिलीभगत से मनमानी का खेल चल रहा है। इससे अस्पताल आने वाला आम मरीज ठगी का शिकार बन रहा है।
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बाहर से कराया अल्ट्रासाउंड
जांच कराने आयीं सुनीता ने बताया कि चिकित्सक ने अल्ट्रासाउण्ड कराने की सलाह दी है लेकिन यहां कक्ष में ताला लगा है। मीरा देवी ने बताया कि चिकित्सक ने जांच कराने को कहा था अस्पताल की दायी ने आठ सौ रुपये लेकर बाहर अल्ट्रासाउंड कराया है।
इलाज सब दिन, अल्ट्रासाउंड केवल तीन दिन
जिला महिला अस्पताल में इलाज भी अजब गजब तरीके से हो रहा है। अस्पताल इलाज के लिए सब दिन खुलता है सब दिन गर्भवती व प्रसूता महिलाओं का इलाज होता है लेकिन उनकी अल्ट्रासाउंड जांच केवल तीन दिन होती है। यानी जांच की जरूरत भी हो तो महिलाओं को तीन दिन तक डॉक्टर आने के इंतजार में टरकाया जाता है। या फिर उन्हें महिला अस्पताल के चिकित्सकों व उनके दलालों बताने पर महिलाओं को निजी पैथोलॉजी पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जाता है। जिला महिला अस्पताल में रोज के लिए रेडियोलॉजिस्ट के न होने का पूरा फायदा निजी पैथोलॉजी वाले उठा रहे हैं। महिला अस्पताल में पैथोलॉजी संचालक व उनके दलाल डॉक्टर्स व उनके दलाल के बराबर संपर्क में रहते हैं। एक अल्ट्रासाउंड में एक महिला से 500 से 700 रुपये तक वसूल किया जाता है। महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान तीन से चार बार पेट में बच्चे की स्थिति को जानने के लिए महिला का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। तय समय में अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच कराना जरूरी होता है। जिला महिला अस्पताल में तीन दिन रेडियोलॉजिस्ट के न रहने से मजबूरन महिलाओं को बाहर मंहगी जांच करानी पड़ती है।
कहां कितने में होता है अल्ट्रासाउण्ड
जिला अस्पताल में - फ्री
निजी पैथोलॉजी (सामान्य) 450-500
निजी पैथोलॉजी (कलर डाप्लर) 500-600
गंभीर केस में भेजा जाता है जिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में मरीजों का अल्ट्रासाउंड केवल सोमवार, बुध व शुक्रवार को होता है। गंभीर मामलों में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है। महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के बारे में शासन को कई बार पत्र भेजा चुका है। जिला महिला अस्पताल में मनकापुर के चिकित्सक एके राय को तीन दिन अल्ट्रासाउंड करने के लिए लगाया गया है। -डॉ. अनंत प्रकाश मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला महिला चिकित्सालय गोंडा।
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जिला महिला अस्पताल में तैनात रहे रेडियोलॉजिस्ट डॉ.आरसी वर्मा का एक साल पूर्व निधन हो जाने के बाद से जिला महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट पीके श्रीवास्तव को सोम, बुध व शुक्रवार को जिला महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड करने के लिए अटैच किया गया था। तीन दिन महिलाओं को बिना जांच के ही या तो लौटना पड़ रहा था। इससे समस्या के हल के लिए पूर्व सीएमओ डॉ. एसके श्रीवास्तव ने मनकापुर सीएचसी के चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार राय को जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के काम के लिए स्थानांतरित कर दिया था।
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बताया जाता है कि डॉ. अनिल कुमार राय ने अपने राजनीतिक रसूख के चलते मनकापुर अभी तक नहीं छोड़ा है। वह अपने प्रभाव से अस्पताल के अधिकारियों से सिर्फ तीन दिन ही अल्ट्रासाउंड करने के लिए हामी भरी है। अस्पताल प्रशासन व चिकित्सक के मनमानी करने के खेल का खामियाजा जिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को जिला महिला अस्पताल में चेकअप कराने आयी महिलाओं को भारी पड़ रही। जितनी महिलाओं को चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी वह अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा देख मायूस लौट गईं। ऐसी महिलाओं पर नजर रख रहे चिकित्सकों व निजी पैथोलॉजी के दलालों ने बाहर ले जाकर मोटी रकम लेकर अल्ट्रासाउंड कराया। अस्पताल प्रशासन व चिकित्सकों के मिलीभगत से मनमानी का खेल चल रहा है। इससे अस्पताल आने वाला आम मरीज ठगी का शिकार बन रहा है।
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बाहर से कराया अल्ट्रासाउंड
जांच कराने आयीं सुनीता ने बताया कि चिकित्सक ने अल्ट्रासाउण्ड कराने की सलाह दी है लेकिन यहां कक्ष में ताला लगा है। मीरा देवी ने बताया कि चिकित्सक ने जांच कराने को कहा था अस्पताल की दायी ने आठ सौ रुपये लेकर बाहर अल्ट्रासाउंड कराया है।
इलाज सब दिन, अल्ट्रासाउंड केवल तीन दिन
जिला महिला अस्पताल में इलाज भी अजब गजब तरीके से हो रहा है। अस्पताल इलाज के लिए सब दिन खुलता है सब दिन गर्भवती व प्रसूता महिलाओं का इलाज होता है लेकिन उनकी अल्ट्रासाउंड जांच केवल तीन दिन होती है। यानी जांच की जरूरत भी हो तो महिलाओं को तीन दिन तक डॉक्टर आने के इंतजार में टरकाया जाता है। या फिर उन्हें महिला अस्पताल के चिकित्सकों व उनके दलालों बताने पर महिलाओं को निजी पैथोलॉजी पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जाता है। जिला महिला अस्पताल में रोज के लिए रेडियोलॉजिस्ट के न होने का पूरा फायदा निजी पैथोलॉजी वाले उठा रहे हैं। महिला अस्पताल में पैथोलॉजी संचालक व उनके दलाल डॉक्टर्स व उनके दलाल के बराबर संपर्क में रहते हैं। एक अल्ट्रासाउंड में एक महिला से 500 से 700 रुपये तक वसूल किया जाता है। महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान तीन से चार बार पेट में बच्चे की स्थिति को जानने के लिए महिला का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। तय समय में अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच कराना जरूरी होता है। जिला महिला अस्पताल में तीन दिन रेडियोलॉजिस्ट के न रहने से मजबूरन महिलाओं को बाहर मंहगी जांच करानी पड़ती है।
कहां कितने में होता है अल्ट्रासाउण्ड
जिला अस्पताल में - फ्री
निजी पैथोलॉजी (सामान्य) 450-500
निजी पैथोलॉजी (कलर डाप्लर) 500-600
गंभीर केस में भेजा जाता है जिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में मरीजों का अल्ट्रासाउंड केवल सोमवार, बुध व शुक्रवार को होता है। गंभीर मामलों में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है। महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के बारे में शासन को कई बार पत्र भेजा चुका है। जिला महिला अस्पताल में मनकापुर के चिकित्सक एके राय को तीन दिन अल्ट्रासाउंड करने के लिए लगाया गया है। -डॉ. अनंत प्रकाश मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला महिला चिकित्सालय गोंडा।