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गरीब की थाली पर मंहगाई की मार, टमाटर ने तरेरी आंख, रुला रहा प्याज
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गोंडा के जेल रोड पर सब्जी की दुकान पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। डीजल की आसमान छूती कीमत के साथ ही मौसम का सितम सभी पर भारी पड़ रहा है। इसके चलते सब्जियों की कीमत में आए बेतहाशा उछाल का सीधा असर आम आदमी की भोजन की थाली पर पड़ा है। प्याज के दाम जहां चंद दिनों में ही दोगुना तक हो गए हैं, वहीं टमाटर 55 से 60 रुपये किलो तक पहुंच कर आंखे तरेर रहा है। सस्ती सब्जियों में शुमार बैगन, तोरई व लौकी की कीमत भी 40 से 45 रुपये किलों तक पहुंच गयी है।
पेट्रोल-डीजल के साथ ही लगातार बढ़ते घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों ने आम आदमी की रसोई का पूरा बजट ही बिगाड़ दिया है। महंगाई का असर चाय नाश्ते की दुकानों पर भी दिखने लगा है।
इसके चलते सात रुपये में बिकने वाला समोसा 10 रुपया प्रति पीस हो गया है। इसके साथ ही बेसन व दूध से बनी मिठाईयों के दाम 40 से 80 रुपये प्रति किग्रा तो मेवा से बनने वाली मिठाइयों के दाम में भी सौ से दो सौ रुपया प्रति किग्रा तक किलोग्राम तक बढ़ोत्तरी हुई है।
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डीजल-पेट्रोल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी से ट्रक व मालवाहक वाहनों के भाड़े में भी काफी वृृद्धि हुई है। इसका सीधा असर खाद्य सामग्री के साथ सब्जियों के भाव पर पड़ा है। इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम में 21 डीजल के दाम में 25 और रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 27 फीसदी तक वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर कमर तोड़ महंगाई के बतौर आम आदमी को झेलना पड़ रहा है।
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पेट्रोल-डीजल के साथ ही लगातार बढ़ते घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों ने आम आदमी की रसोई का पूरा बजट ही बिगाड़ दिया है। महंगाई का असर चाय नाश्ते की दुकानों पर भी दिखने लगा है।
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इसके चलते सात रुपये में बिकने वाला समोसा 10 रुपया प्रति पीस हो गया है। इसके साथ ही बेसन व दूध से बनी मिठाईयों के दाम 40 से 80 रुपये प्रति किग्रा तो मेवा से बनने वाली मिठाइयों के दाम में भी सौ से दो सौ रुपया प्रति किग्रा तक किलोग्राम तक बढ़ोत्तरी हुई है।
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डीजल-पेट्रोल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी से ट्रक व मालवाहक वाहनों के भाड़े में भी काफी वृृद्धि हुई है। इसका सीधा असर खाद्य सामग्री के साथ सब्जियों के भाव पर पड़ा है। इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम में 21 डीजल के दाम में 25 और रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 27 फीसदी तक वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर कमर तोड़ महंगाई के बतौर आम आदमी को झेलना पड़ रहा है।