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Gonda News: ब्लैक स्पॉट पर भी नहीं हैं इंतजाम, जानलेवा बने ठिकाने
Fri, 29 May 2026 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 29 May 2026 11:27 PM IST
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गोंडा में ब्लैक स्पॉट।
गोंडा। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है... जनकवि अदम गोंडवी की ये पंक्तियां जिले की सड़कों और प्रशासनिक दावों की हकीकत बयां करती नजर आती हैं। सड़क हादसों को रोकने के लिए कागजों में योजनाएं जरूर बनाई गईं, लेकिन जमीन पर हालात अब भी जस के तस हैं। नतीजा यह है कि जिन स्थानों को वर्षों पहले ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया था, वहां आज भी लगातार हादसे हो रहे हैं और लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों में 2024 में कुल 57 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 60 हो गई। ये वे स्थान हैं, जहां पिछले तीन वर्षों में पांच या उससे अधिक गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। नियमानुसार इन स्थानों पर पीली पट्टी, रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेतक, स्पीड कंट्रोल और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाने थे, लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह इंतजाम अधूरे हैं।
जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच अकेले गोंडा जिले में सड़क हादसों में 90 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा हादसे गोंडा-अयोध्या मार्ग पर सामने आए हैं। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। अधिकारियों का कहना है कि मंडल के 56 ब्लैक स्पॉट पर सुधारात्मक कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि चार स्थानों पर काम चल रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश जगहों पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। कहीं संकेतक नहीं हैं, कहीं सड़क किनारे अतिक्रमण बना हुआ है, तो कहीं मोड़ों और कटों पर रोशनी तक की व्यवस्था नहीं है।
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हालात जस के तस, हर सफर में हादसे का डर
- गोंडा जिले में चौपाल सागर, बड़गांव चौराहा, कटी तिराहा, दर्जीकुआं, अल्फा पेट्रोल पंप, बेंदुली मोड़, लोलपुर, कोल्ड स्टोर तिराहा, डुमरियाडीह, कस्बा वजीरगंज, चंदापुर, बेलसरगंज बाजार, चौरी तिराहा, खिरौरा मोहन, सालापुर बाजार, अमवा, झिलाही (जोगापुर) और जफरापुर जैसे स्थान ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित हैं। इटियाथोक के बेंदुली मोड़ पर दो वर्ष पहले कुछ सुधारात्मक कार्य कराए गए थे और पीआरडी जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई, लेकिन राहगीरों का कहना है कि यहां अब भी तेज रफ्तार वाहनों और अव्यवस्थित मोड़ के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसी तरह नवाबगंज के कोल्ड स्टोर तिराहे पर कर्मियों की तैनाती तो की गई, लेकिन कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आती।
ब्लैक स्पॉट आखिर बनते क्यों हैं?
- विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की खराब डिजाइन, अवैध कट, अतिक्रमण, तीखे मोड़, अपर्याप्त रोशनी, तेज रफ्तार और ट्रैफिक दबाव ब्लैक स्पॉट बनने की बड़ी वजहें हैं। गोंडा-अयोध्या मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ा है, लेकिन सड़क अब भी संकरी है। कई स्थानों पर डिवाइडर नहीं हैं और रात के समय दृश्यता बेहद कम हो जाती है।
सड़क चौड़ीकरण के बिना मुश्किल
- पीडब्ल्यूडी के एनएच विंग अयोध्या के अधिशासी अभियंता एसके मिश्र ने बताया कि गोंडा-अयोध्या मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक है। सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षात्मक उपाय किए गए हैं और शेष कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे।
30 से अधिक अवैध कट बंद
टीएसआई जगदंबा गुप्ता ने बताया कि सड़क हादसे रोकने के लिए लखनऊ मार्ग पर 30 से अधिक अवैध कट बंद कराए गए हैं। दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में साइनेज और चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
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देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों में 2024 में कुल 57 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 60 हो गई। ये वे स्थान हैं, जहां पिछले तीन वर्षों में पांच या उससे अधिक गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। नियमानुसार इन स्थानों पर पीली पट्टी, रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेतक, स्पीड कंट्रोल और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाने थे, लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह इंतजाम अधूरे हैं।
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जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच अकेले गोंडा जिले में सड़क हादसों में 90 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा हादसे गोंडा-अयोध्या मार्ग पर सामने आए हैं। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। अधिकारियों का कहना है कि मंडल के 56 ब्लैक स्पॉट पर सुधारात्मक कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि चार स्थानों पर काम चल रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश जगहों पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। कहीं संकेतक नहीं हैं, कहीं सड़क किनारे अतिक्रमण बना हुआ है, तो कहीं मोड़ों और कटों पर रोशनी तक की व्यवस्था नहीं है।
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हालात जस के तस, हर सफर में हादसे का डर
- गोंडा जिले में चौपाल सागर, बड़गांव चौराहा, कटी तिराहा, दर्जीकुआं, अल्फा पेट्रोल पंप, बेंदुली मोड़, लोलपुर, कोल्ड स्टोर तिराहा, डुमरियाडीह, कस्बा वजीरगंज, चंदापुर, बेलसरगंज बाजार, चौरी तिराहा, खिरौरा मोहन, सालापुर बाजार, अमवा, झिलाही (जोगापुर) और जफरापुर जैसे स्थान ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित हैं। इटियाथोक के बेंदुली मोड़ पर दो वर्ष पहले कुछ सुधारात्मक कार्य कराए गए थे और पीआरडी जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई, लेकिन राहगीरों का कहना है कि यहां अब भी तेज रफ्तार वाहनों और अव्यवस्थित मोड़ के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसी तरह नवाबगंज के कोल्ड स्टोर तिराहे पर कर्मियों की तैनाती तो की गई, लेकिन कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आती।
ब्लैक स्पॉट आखिर बनते क्यों हैं?
- विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की खराब डिजाइन, अवैध कट, अतिक्रमण, तीखे मोड़, अपर्याप्त रोशनी, तेज रफ्तार और ट्रैफिक दबाव ब्लैक स्पॉट बनने की बड़ी वजहें हैं। गोंडा-अयोध्या मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ा है, लेकिन सड़क अब भी संकरी है। कई स्थानों पर डिवाइडर नहीं हैं और रात के समय दृश्यता बेहद कम हो जाती है।
सड़क चौड़ीकरण के बिना मुश्किल
- पीडब्ल्यूडी के एनएच विंग अयोध्या के अधिशासी अभियंता एसके मिश्र ने बताया कि गोंडा-अयोध्या मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक है। सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षात्मक उपाय किए गए हैं और शेष कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे।
30 से अधिक अवैध कट बंद
टीएसआई जगदंबा गुप्ता ने बताया कि सड़क हादसे रोकने के लिए लखनऊ मार्ग पर 30 से अधिक अवैध कट बंद कराए गए हैं। दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में साइनेज और चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।