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नए आदेश से जख्म पर लगेगा मरहम

Thu, 17 Nov 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Thu, 17 Nov 2016 11:35 PM IST
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The wound will heal to the new orders
धान पीटते किसान - फोटो : अमर उजाला
नोट की चोट से आम आदमी को काफी दुश्वारियां उठानी पड़ रही हैं। ऐसे में गुरुवार को केंद्र सरकार ने किसानों को हर हफ्ता 25 हजार रुपये निकालने व शादी के लिए ढाई लाख रुपये निकालने की छूट देकर आम आदमी के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की है। इस नए आदेश के बाद लोग केंद्र सरकार के फैसले को साहसी बताते हुए खुले दिल से सराहना कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग आस लगाए बैठें है कि देश में जमा काला धन खत्म होने के बाद क्या उन्हें कुछ फायदा होगा या नहीं। 
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गोंडा के झंझरी ब्लॉक में लक्ष्मनपुर दिनेश शुक्ल अपने परिवार के साथ धान पीटने में जुटे हुए थे। बड़े बंदी पर वह कहते हैं कि मोदी सरकार का यह साहसी निर्णयहै, इससे गरीबों पर कम अमीरों पर अधिक असर पड़ा हुआ है।
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वहीं धान पीट रही रेशमा का कहना है कि जब उन लोगों के पास हजार व पांच सौ के नोट ही नहीं है तो किस बात की चिंता। गायत्री कहती है कि गांव में लोगों को कोई खास दिक्कत नहीं है। काम चल रहा है। बीज व खाद के लिए रुपये की चिंता तो किसान को हमेशा रहती थी, वह अब भी है। साहूकार से उधार लेकर काम चला लेेंगे, बाद में उसे अनाज देकर चुकता कर देंगे। 
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गंगापुर के निवासी अंजनी तिवारी अपनी बेटी पूर्णिमा तिवारी के साथ खेतों में गोबर की खाद डाल रहे थे। वह नोटबंदी पर मोदी सरकार से सहमत दिखे। अंजनी कहते हैं कि मोदी सरकार जनता के लिए फिक्रमंद है, तभी तो ऐसे कदम उठाए हैं कि आज लोग अपना रुपया इधर-उधर फेंक रहे हैं।

परेशानियों के बाबत कहते हैं कि गांव में रहने वालों के लिए कोई दिक्कत नहीं है। उनकी बेटी पूर्णिमा कहती है कि गांव में अधिकांश लोग खेती करते हैं तो वह बैंक के सहारे नहीं रहतेे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर साहूकार से उधार ले लेते हैं और फिर उसे अनाज देकर या फिर बेंचकर उसका बकाया चुकता कर देते हैं। 

बहलोलपुर गांव में मजदूरी पर धान का पुआल बांध रहा मजदूर अलगू कहता है कि मोदी के एक कदम से बडे़ लोग बिलबिलाए हुए हैं। हम लोगों का क्या, मजदूरी ही करते रहे हैं, तो फिर काहे का सपना।

वह कहता है कि ऊपर से सरकार हम लोगों के लिए देती है लेकिन यहां तक पहुंचते-पहुंचते सब बिचौलिए खा जाते हैं। जब सरकार बिचौलियों पर लगाम कसना शुरू किया तो हो हल्ला मच रहा है। बैंक पर भीड़ होने के बाबत वह कहता है कि जब खाते में रुपया ही नहीं तो वह क्यों जाए। जेब में पचास व सौ रुपया ही रहता है फिर उसे किसी झंझट से क्या परेशानी होगी।


बरसीम के खेतों में पानी दे रहा बहलोलपुर निवासी देवेंद्र तिवारी कहता है कि केंद्र की मोदी ने एक सराहनीय पहल की है जिससे काला धन जमा किए लोगों में हड़बड़ाहट मची है। जब भी कोई बड़ा फैसला होता है, तो उससे लोगों को परेशानी होती है लेकिन यह समस्या थोड़े दिन की है जो बाद में काफी राहत देगी। वैसे भी केंद्र सरकार के इस फैसले से किसान व मजदूर को परेशानी हुई है लेकिन कालाधन इकट्ठा किए पूंजीपतियों की नींद उड़ गई है।
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