{"_id":"ce67dc0aca5fcd6ba91ab00e3ff4ca62","slug":"the-women-kept-nirjla-fast-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2015 10:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नहाय-खाय के साथ सोमवार से शुरू हुए डाला छठ के व्रत के दूसरे दिन मंगलवार को व्रत रखने वाले पुरुष व महिलाएं पोखरों पर पहुंचकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देंगे। सोमवार को पूजन सामग्री की दुकानों पर खरीदारी के लिए दिन भर भीड़ लगी रही।
बिहार प्रांत का सबसे बड़ा त्योहार डाला छठ सोमवार से शुरू हो गया। दिन भर निर्जला व्रत रहीं महिलाओं ने शाम को मीठा चावल (खीर) तथा घर के पीसे हुए गेहूं के आंटे की रोटी खाई।
मंगलवार की सुबह फिर निर्जला व्रत रहीं महिलाएं सूर्यास्त का समय नजदीक आते ही तालाब व पोखरों के किनारे पहुंचेंगी। यहां पोखरों व नदियों के पानी में खड़े होकर अस्त होते हुए सर्य को दूध से अर्घ्य देंगी।
विज्ञापन
ऐसी मान्यता है कि अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से रात की आसुरी शक्तियों का विनाश होता है और व्रत सफल होता है।
अर्घ्य देने के बाद घर पहुंच कर आंगन में गन्ने की फसल के झुंड में दीप जलाकर छठ मइया का पूजन करेंगी और भोर होते ही नंगे पांव सिर पर डाला (पूजन सामग्री से भरी टोकरी) लेकर फिर उसी तालाब व पोखरे पर पहुंचेंगी और पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन सपंन्न करेंगी।
यहां पूजन सपंन्न होने के बाद पुरुष अपने बड़े व बुजुर्गों तथा महिलाएं अपने पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेंगी और प्रसाद खाकर 48 घंटे से चल रहे निर्जला व्रत को तोड़ देंगी।
पुलिस लाइन स्थित पोखरे व खैरा भवानी मंदिर में होने वाले पूजन को लेकर काफी उत्साह रहा। पोखरों के निकट सुबह से ही सामग्रियों की दुकानें सज गईं। यहां पूजन सामग्री खरीदने के लिए लोगों की भीड़ रही।
दुकानदार मोहम्मद राजा ने बताया कि पूजन के लिए गन्ना, सूप, टोकरी, फलों सहित अन्य सामग्रियों की खरीदारी शुरू हो गई।
उन्होंने बताया कि आज ज्यादा भीड़ नहीं रही। मंगलवार की शाम को पूजन है, इसलिए उस दिन श्रद्धालु सामग्री खरीदने पर जोर देंगे।
विज्ञापन
बिहार प्रांत का सबसे बड़ा त्योहार डाला छठ सोमवार से शुरू हो गया। दिन भर निर्जला व्रत रहीं महिलाओं ने शाम को मीठा चावल (खीर) तथा घर के पीसे हुए गेहूं के आंटे की रोटी खाई।
विज्ञापन
मंगलवार की सुबह फिर निर्जला व्रत रहीं महिलाएं सूर्यास्त का समय नजदीक आते ही तालाब व पोखरों के किनारे पहुंचेंगी। यहां पोखरों व नदियों के पानी में खड़े होकर अस्त होते हुए सर्य को दूध से अर्घ्य देंगी।
विज्ञापन
ऐसी मान्यता है कि अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से रात की आसुरी शक्तियों का विनाश होता है और व्रत सफल होता है।
अर्घ्य देने के बाद घर पहुंच कर आंगन में गन्ने की फसल के झुंड में दीप जलाकर छठ मइया का पूजन करेंगी और भोर होते ही नंगे पांव सिर पर डाला (पूजन सामग्री से भरी टोकरी) लेकर फिर उसी तालाब व पोखरे पर पहुंचेंगी और पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन सपंन्न करेंगी।
यहां पूजन सपंन्न होने के बाद पुरुष अपने बड़े व बुजुर्गों तथा महिलाएं अपने पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेंगी और प्रसाद खाकर 48 घंटे से चल रहे निर्जला व्रत को तोड़ देंगी।
पुलिस लाइन स्थित पोखरे व खैरा भवानी मंदिर में होने वाले पूजन को लेकर काफी उत्साह रहा। पोखरों के निकट सुबह से ही सामग्रियों की दुकानें सज गईं। यहां पूजन सामग्री खरीदने के लिए लोगों की भीड़ रही।
दुकानदार मोहम्मद राजा ने बताया कि पूजन के लिए गन्ना, सूप, टोकरी, फलों सहित अन्य सामग्रियों की खरीदारी शुरू हो गई।
उन्होंने बताया कि आज ज्यादा भीड़ नहीं रही। मंगलवार की शाम को पूजन है, इसलिए उस दिन श्रद्धालु सामग्री खरीदने पर जोर देंगे।