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योजना की रिपोर्ट शून्य
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2015 11:24 PM IST
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सात महीने बाद आरबीएसके योजना के डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व एएनएम को वेतन देने आदेश तो निदेशालय ने दे दिया लेकिन इस भुगतान की मद को लेकर स्वास्थ्य अधिकारी पशोपेश में है। खुद सीएमओ का मानना है कि जब जिले से आरबीएसके योजना की रिपोर्ट शासन को निल (शून्य) भेजी जा रही है तो फिर वह इसमें काम करने वालों को वेतन का भुगतान करें तो कैसे।
इस स्थिति से निपटने के लिए सीएमओ की ओर से एक पत्र निदेशालय को भेजकर दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। जिले में स्कूली बच्चों के निशुल्क उपचार के साथ ही उन्हें चश्मे आदि का वितरण करने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना (आरबीएसके) गत दिसंबर माह से लागू है।
इसके तहत जिले में महिला-पुरुष डॉक्टर के साथ ही स्टाफ नर्स, एएनएम व फार्मासिस्ट की 128 भर्तियां गत वर्ष दिसम्बर में हुई थी। उस पर निदेशालय ने दिसम्बर माह की 22 तारीख को रोक लगाने के साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए थे।
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छह महीने तक इस योजना में न तो कोई काम हुआ और न ही तत्कालीन सीएमओ डॉ. जेपी गुप्त के हस्ताक्षर से चयनित 128 अभ्यर्थियों से किसी सीएचसी व पीएचसी में कोई काम लिया गया।
योजना के सभी 128 अभ्यर्थी अपनी योगदान आख्या सीएचसी व पीएचसी के अधीक्षकों को देते रहे। भर्ती के सात माह बाद निदेशालय ने पूरे मामले की जांच कराए जाने के बाद अभ्यर्थियों को फिलहाल वेतन देने के आदेश दे दिए हैं। लेकिन उन्हें वेतन किस आधार पर दिया जाए, यह उल्लेख नहीं किया है।
इससे सीएचसी-पीएचसी के अधीक्षकों के साथ ही सीएमओ भी पशोपेश में है। सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा के मुताबिक वह चयनित अभ्यर्थियों को वेतन देने का आदेश जारी करते हैं तो आने वाले समय में यह मामला आडिट में फंस सकता है।
क्योंकि शासन को जिले से भेजी जाने वाली आरबीएसके योजना की रिपोर्ट तो शुरू से निल (शून्य) ही जा रही है। ऐसे में वेतन किस बात का। हालांकि उनका कहना है कि इसके लिए निदेशालय को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
आरबीएसके योजना में तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम व स्टाफ नर्स को गत दिसम्बर माह से सात महीने का वेतन दिया जाना है। यह राशि करीब पौने तीन करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इतनी बड़ी रकम के एकमुश्त भुगतान का कोई सटीक आधार न होने के कारण हर कोई इससे बचने की कोशिश में है।
जिले की सभी 16 सीएचसी-पीएचसी में तैनात आरबीएसके कर्मियों की योगदान संबंधित अधीक्षक से मांगी गई है। सीएमओ की ओर से जारी पत्र में सभी अधीक्षक को तीन दिन में तैनात कर्मियों का सत्यापन कर योगदान आख्या उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
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इस स्थिति से निपटने के लिए सीएमओ की ओर से एक पत्र निदेशालय को भेजकर दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। जिले में स्कूली बच्चों के निशुल्क उपचार के साथ ही उन्हें चश्मे आदि का वितरण करने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना (आरबीएसके) गत दिसंबर माह से लागू है।
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इसके तहत जिले में महिला-पुरुष डॉक्टर के साथ ही स्टाफ नर्स, एएनएम व फार्मासिस्ट की 128 भर्तियां गत वर्ष दिसम्बर में हुई थी। उस पर निदेशालय ने दिसम्बर माह की 22 तारीख को रोक लगाने के साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए थे।
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छह महीने तक इस योजना में न तो कोई काम हुआ और न ही तत्कालीन सीएमओ डॉ. जेपी गुप्त के हस्ताक्षर से चयनित 128 अभ्यर्थियों से किसी सीएचसी व पीएचसी में कोई काम लिया गया।
योजना के सभी 128 अभ्यर्थी अपनी योगदान आख्या सीएचसी व पीएचसी के अधीक्षकों को देते रहे। भर्ती के सात माह बाद निदेशालय ने पूरे मामले की जांच कराए जाने के बाद अभ्यर्थियों को फिलहाल वेतन देने के आदेश दे दिए हैं। लेकिन उन्हें वेतन किस आधार पर दिया जाए, यह उल्लेख नहीं किया है।
इससे सीएचसी-पीएचसी के अधीक्षकों के साथ ही सीएमओ भी पशोपेश में है। सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा के मुताबिक वह चयनित अभ्यर्थियों को वेतन देने का आदेश जारी करते हैं तो आने वाले समय में यह मामला आडिट में फंस सकता है।
क्योंकि शासन को जिले से भेजी जाने वाली आरबीएसके योजना की रिपोर्ट तो शुरू से निल (शून्य) ही जा रही है। ऐसे में वेतन किस बात का। हालांकि उनका कहना है कि इसके लिए निदेशालय को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
आरबीएसके योजना में तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम व स्टाफ नर्स को गत दिसम्बर माह से सात महीने का वेतन दिया जाना है। यह राशि करीब पौने तीन करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इतनी बड़ी रकम के एकमुश्त भुगतान का कोई सटीक आधार न होने के कारण हर कोई इससे बचने की कोशिश में है।
जिले की सभी 16 सीएचसी-पीएचसी में तैनात आरबीएसके कर्मियों की योगदान संबंधित अधीक्षक से मांगी गई है। सीएमओ की ओर से जारी पत्र में सभी अधीक्षक को तीन दिन में तैनात कर्मियों का सत्यापन कर योगदान आख्या उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।