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बांध कटा तो 72 गांव होंगे तबाह
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Mon, 13 Jul 2015 10:09 PM IST
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घाघरा नदी का जलस्तर सोमवार को भी खतरे के निशान से ऊपर रहा। नदी का जलस्तर देख ग्रामीण दहशत में हैं। मंगलवार को नदी का जलस्तर स्थिर हो गया। लेकिन माना जा रहा है कि अगर पानी घटता व बढ़ता है तो यह बांध के लिए दिक्कतें पैदा कर सकता है।
इससे निपटने के लिए एक बार फिर से पुराने बांध की मजबूती के प्रयास प्रशासनिक स्तर पर तेज कर दिए गए हैं। नदी के मुहाने पर बसे आधा दर्जन गांवों के 300 ग्रामीण बंधे पर शरण लिए हैं। इन्हें बसाने के लिए किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था अभी तक प्रशासन नहीं करा पाया है।
अगर एल्गिन-चरसड़ी बांध कटता है तो इससे करनैलगंज इलाके के 72 गांव घाघरा के पानी से घिर जाएंगे। घाघरा नदी से एल्गिन-चरसड़ी बांध का कुछ हिस्सा कटकर नदी में समाहित हो चुका है। इसलिए बांध के कटे हिस्से को और अधिक चौड़ा किए जाने के लिए उसके चारों ओर बालू भरी बोरियों के साथ बल्ली पायलिंग का काम किया जा रहा है।
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बांध के पिछले हिस्से की मजबूती के लिए लोहे की डाली में बालू भरी बोरियां भी पाटी जा रही हैं ताकि बांध कटने न पाए। सोमवार को नदी का जलस्तर स्थिर होने से बांध बचाव का कार्य तेजी से जारी रहा। बीच-बीच में बांध की कुछ मिट्टी घाघरा की तेज लहरों से कटती जरूर रही। लेकिन इसकी परवाह न करते हुए बांध के किनारे-किनारे बल्लियां गाड़कर लहरों से निपटने की कवायद युद्धस्तर पर जारी रही।
ग्रामीणों के मन से इलाके में बाढ़ आने का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि चार साल पहले भी इसी तरह के प्रयास सिंचाई विभाग व प्रशासन की तरफ से किए गए थे। लेकिन घाघरा का तूफानी पानी सब कुछ अपने साथ बहा ले गया। मंगलवार को अगर नदी के जलस्तर में किसी तरह की गिरावट व बढ़त होती है तो इससे बांध पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं।
वर्जन...
बांध बचाव के कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है। घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है लेकिन नदी का जलस्तर स्थिर है। बांध बचाव के प्रयास हो रहे हैं। बंधे की मरम्मत की जा रही है।
-वीके सिंह, एसडीएम
25-गोंडा में रायपुर के निकट घाघरा इस तरह कर रही कटान
26- गोंडा में रायपुर के निकट घाघरा इस तरह कर रही कटान
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इससे निपटने के लिए एक बार फिर से पुराने बांध की मजबूती के प्रयास प्रशासनिक स्तर पर तेज कर दिए गए हैं। नदी के मुहाने पर बसे आधा दर्जन गांवों के 300 ग्रामीण बंधे पर शरण लिए हैं। इन्हें बसाने के लिए किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था अभी तक प्रशासन नहीं करा पाया है।
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अगर एल्गिन-चरसड़ी बांध कटता है तो इससे करनैलगंज इलाके के 72 गांव घाघरा के पानी से घिर जाएंगे। घाघरा नदी से एल्गिन-चरसड़ी बांध का कुछ हिस्सा कटकर नदी में समाहित हो चुका है। इसलिए बांध के कटे हिस्से को और अधिक चौड़ा किए जाने के लिए उसके चारों ओर बालू भरी बोरियों के साथ बल्ली पायलिंग का काम किया जा रहा है।
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बांध के पिछले हिस्से की मजबूती के लिए लोहे की डाली में बालू भरी बोरियां भी पाटी जा रही हैं ताकि बांध कटने न पाए। सोमवार को नदी का जलस्तर स्थिर होने से बांध बचाव का कार्य तेजी से जारी रहा। बीच-बीच में बांध की कुछ मिट्टी घाघरा की तेज लहरों से कटती जरूर रही। लेकिन इसकी परवाह न करते हुए बांध के किनारे-किनारे बल्लियां गाड़कर लहरों से निपटने की कवायद युद्धस्तर पर जारी रही।
ग्रामीणों के मन से इलाके में बाढ़ आने का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि चार साल पहले भी इसी तरह के प्रयास सिंचाई विभाग व प्रशासन की तरफ से किए गए थे। लेकिन घाघरा का तूफानी पानी सब कुछ अपने साथ बहा ले गया। मंगलवार को अगर नदी के जलस्तर में किसी तरह की गिरावट व बढ़त होती है तो इससे बांध पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं।
वर्जन...
बांध बचाव के कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है। घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है लेकिन नदी का जलस्तर स्थिर है। बांध बचाव के प्रयास हो रहे हैं। बंधे की मरम्मत की जा रही है।
-वीके सिंह, एसडीएम
25-गोंडा में रायपुर के निकट घाघरा इस तरह कर रही कटान
26- गोंडा में रायपुर के निकट घाघरा इस तरह कर रही कटान