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Gonda News: उज्मा के मकान का प्रशासन ने खुलवाया ताला
Thu, 06 Feb 2025 11:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 06 Feb 2025 11:22 PM IST
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बड़गांव (गोंडा)। शहर के रकाबगंज वार्ड स्थित शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले पर विराम लग गया है। मामले में पालिकाध्यक्ष उज्मा राशिद के खिलाफ प्रशासन की ओर से नगर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। बृहस्पतिवार सुबह डीएम के आदेश पर अधिशासी अधिकारी ने इस भवन का ताला खुलवा दिया। जिला प्रशासन के ही आदेश पर 14 दिसंबर 2023 को तत्कालीन तहसीलदार मनकापुर अखिलेश कुमार ने इस भवन पर सरकारी ताला लगवाया था। अधिशासी अधिकारी संजय मिश्र ने बताया कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराया गया है।
लगभग 14 माह बाद ताला खुला तो मौके पर मौजूद पालिकाध्यक्ष और उनके पति डॉ. राशिद इकबाल को लोग बधाई देने लगे। प्रशासन के फैसले से उत्साहित पालिकाध्यक्ष उज्मा राशिद ने कहा, वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करती हैं। बोलीं कि सत्य को ज्यादा दिन तक दबाया नहीं जा सकता। अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. राशिद ने बताया कि उज्मा का नाम सन 2001 से ही इस संपत्ति के किरायेदार के रूप में दर्ज था जिसका लगातार किराया भी जमा होता रहा। विरोधियों ने उन्हें किरायेदार के बजाय अवैध कब्जेदार बताकर आरोप लगाए थे। आरोप निराधार थे, इस पर न्यायालय की मुहर लग चुकी है।
यह है मामला
नगर पालिका के रजिस्टर 45 में खाता संख्या 6790 पर इस संपत्ति का कुल रकबा तीन बिस्वा 12 बिस्वांसी है जो कि हामीदा बेगम पत्नी महबूबुल रहमान के नाम पर दर्ज था। देश के विभाजन के दौरान इस संपत्ति के मालिक पाकिस्तान चले गए थे, ऐसे में इसे शत्रु संपत्ति घोषित किया गया। जिसमें एक मकान (संख्या 15) और तीन दुकान संख्या 16, 17 व 18 दर्ज हैं। सन 2001-2002 के असेसमेंट रजिस्टर में इस संपत्ति के किरायेदार के तौर पर पूर्व पालिकाध्यक्ष कमरुद्दीन की बेटी उज्मा निकहत का नाम दर्ज हुआ था। इससे पहले किसी मुन्ना धोबी पुत्र महावीर के नाम दर्ज था। किरायेदार बनने के बाद से उज्मा नियमित किराया जमा करा रही थीं। फिर डॉ. राशिद इकबाल से शादी के बाद उज्मा निकहत का नाम उज्मा राशिद हो गया। शत्रु संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत होने पर याची संतोष श्रीवास्तव ने मामले में जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की थी। जांच में स्पष्ट हुआ है कि दोनों नाम पालिकाध्यक्ष उज्मा राशिद के ही हैं।
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लगभग 14 माह बाद ताला खुला तो मौके पर मौजूद पालिकाध्यक्ष और उनके पति डॉ. राशिद इकबाल को लोग बधाई देने लगे। प्रशासन के फैसले से उत्साहित पालिकाध्यक्ष उज्मा राशिद ने कहा, वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करती हैं। बोलीं कि सत्य को ज्यादा दिन तक दबाया नहीं जा सकता। अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. राशिद ने बताया कि उज्मा का नाम सन 2001 से ही इस संपत्ति के किरायेदार के रूप में दर्ज था जिसका लगातार किराया भी जमा होता रहा। विरोधियों ने उन्हें किरायेदार के बजाय अवैध कब्जेदार बताकर आरोप लगाए थे। आरोप निराधार थे, इस पर न्यायालय की मुहर लग चुकी है।
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यह है मामला
नगर पालिका के रजिस्टर 45 में खाता संख्या 6790 पर इस संपत्ति का कुल रकबा तीन बिस्वा 12 बिस्वांसी है जो कि हामीदा बेगम पत्नी महबूबुल रहमान के नाम पर दर्ज था। देश के विभाजन के दौरान इस संपत्ति के मालिक पाकिस्तान चले गए थे, ऐसे में इसे शत्रु संपत्ति घोषित किया गया। जिसमें एक मकान (संख्या 15) और तीन दुकान संख्या 16, 17 व 18 दर्ज हैं। सन 2001-2002 के असेसमेंट रजिस्टर में इस संपत्ति के किरायेदार के तौर पर पूर्व पालिकाध्यक्ष कमरुद्दीन की बेटी उज्मा निकहत का नाम दर्ज हुआ था। इससे पहले किसी मुन्ना धोबी पुत्र महावीर के नाम दर्ज था। किरायेदार बनने के बाद से उज्मा नियमित किराया जमा करा रही थीं। फिर डॉ. राशिद इकबाल से शादी के बाद उज्मा निकहत का नाम उज्मा राशिद हो गया। शत्रु संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत होने पर याची संतोष श्रीवास्तव ने मामले में जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की थी। जांच में स्पष्ट हुआ है कि दोनों नाम पालिकाध्यक्ष उज्मा राशिद के ही हैं।
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