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42 के पार पहुंचा पारा, जनजीवन बेहाल
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Sun, 01 May 2016 12:05 AM IST
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छाता लगाकर जाती युवती
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में शनिवार को पारा 42 डिग्री के पार पहुंच गया। भीषण गर्मी व लू के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल हो गया। गर्म हवाओं के कारण दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। चिलचिलाती धूप से बचने के लिए लोग छांव ढूंढते नजर आए। जलस्तर घटने के कारण लोगों को पेयजल संकट का सामना भी करना पड़ रहा है।
वैशाख माह में ही जयेष्ठ माह की गर्मी का एहसास हो रहा है। शनिवार को जिले का पारा 42 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। पारा बढ़ने के कारण गर्मी तेज हो गई है। नगरों में गर्मी का एहसास ज्यादा दुखदायी है।
पेड़ों की छांव न होने के कारण लोगों को तेज धूप का सामना करना पड़ता है। वहीं, लू के कारण दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। भीषण गर्मी का असर खेती किसानी पर भी पड़ रहा है।
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तेज धूप व पछुआ हवा के कारण खेतों की नमी खत्म हो गई है। गन्ने की फसल सूखकर बर्बाद हो रही है। किसानों का कहना है कि खेतों की सिंचाई करने के बाद भी तेज धूप के कारण फसलों में नमी नहीं रह गई है।
अगर जल्द ही बारिश न हुई तो गर्मी के कारण उरद व मक्का आदि की फसलें भी सूखकर बर्बाद हो जाएंगी। गर्मी के कारण अप्रैल में ही जलस्तर काफी घट गया है। जलस्तर नीचे जाने के कारण हैंडपंप सूखने लगे है।
हैंडपंपों की खराबी व सूखने से लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। तालाब व पोखरे सूखने से पशु-पक्षी भी पानी पीने के लिए भटकते रहते है।
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वैशाख माह में ही जयेष्ठ माह की गर्मी का एहसास हो रहा है। शनिवार को जिले का पारा 42 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। पारा बढ़ने के कारण गर्मी तेज हो गई है। नगरों में गर्मी का एहसास ज्यादा दुखदायी है।
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पेड़ों की छांव न होने के कारण लोगों को तेज धूप का सामना करना पड़ता है। वहीं, लू के कारण दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। भीषण गर्मी का असर खेती किसानी पर भी पड़ रहा है।
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तेज धूप व पछुआ हवा के कारण खेतों की नमी खत्म हो गई है। गन्ने की फसल सूखकर बर्बाद हो रही है। किसानों का कहना है कि खेतों की सिंचाई करने के बाद भी तेज धूप के कारण फसलों में नमी नहीं रह गई है।
अगर जल्द ही बारिश न हुई तो गर्मी के कारण उरद व मक्का आदि की फसलें भी सूखकर बर्बाद हो जाएंगी। गर्मी के कारण अप्रैल में ही जलस्तर काफी घट गया है। जलस्तर नीचे जाने के कारण हैंडपंप सूखने लगे है।
हैंडपंपों की खराबी व सूखने से लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। तालाब व पोखरे सूखने से पशु-पक्षी भी पानी पीने के लिए भटकते रहते है।