{"_id":"60e1f25c8ebc3e45c4608c1f","slug":"teachers-gave-memorandum-to-mla-sought-justice-from-cm-gonda-news-lko585472252","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षामित्रों ने विधायक को दिया ज्ञापन, सीएम से मांगा न्याय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षामित्रों ने विधायक को दिया ज्ञापन, सीएम से मांगा न्याय
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश मणि मिश्र के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन प्रेम नारायण पांडेय विधायक तरबगंज के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की न्यायिक समस्याओं को तीन माह के अंदर निस्तारण करने के लिए शामिल किया था।
2018 में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार योगी आदित्यनाथ ने भी शिक्षामित्रों की समस्याओं के निस्तारण के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा के नेतृत्व में 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था कि यह कमेटी जांच उपरांत शिक्षामित्रों के लिए सहानुभूति पूर्वक विचार करके निर्णय लें, किन्तु इतना होने के उपरांत भी न कमेटी की रिपोर्ट आई न ही शिक्षामित्रों की समस्याओं का निस्तारण हुआ।
विज्ञापन
40,000 पाने वाले 137000 शिक्षामित्रों को ख10000 मानदेय पर कार्य करने के लिए आदेशित कर दिया जो आज मजबूरी में कार्य करने को विवश हैं। माता-पिता की दवाई, बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च पूरा करने में काफी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार से मांग है कि समस्त शिक्षामित्र स्नातक बीटीसी 20 साल का शिक्षण कार्य करने का अनुभव है, इन्हें प्रशिक्षित वेतनमान 12 माह 62 वर्ष देकर भविष्य सुरक्षित कराते हुए अन्य शिक्षकों की भांति शेष सुविधाएं मुहैया कराई जाए तथा 2017 में समायोजन निरस्त होने के उपरांत प्रदेश के लगभग 3000 शिक्षामित्र दिवंगत हो गए उनके परिवार को आर्थिक धनराशि मुहैया कराया जाए।
विज्ञापन
ज्ञापन में कहा गया कि 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की न्यायिक समस्याओं को तीन माह के अंदर निस्तारण करने के लिए शामिल किया था।
विज्ञापन
2018 में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार योगी आदित्यनाथ ने भी शिक्षामित्रों की समस्याओं के निस्तारण के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा के नेतृत्व में 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था कि यह कमेटी जांच उपरांत शिक्षामित्रों के लिए सहानुभूति पूर्वक विचार करके निर्णय लें, किन्तु इतना होने के उपरांत भी न कमेटी की रिपोर्ट आई न ही शिक्षामित्रों की समस्याओं का निस्तारण हुआ।
विज्ञापन
40,000 पाने वाले 137000 शिक्षामित्रों को ख10000 मानदेय पर कार्य करने के लिए आदेशित कर दिया जो आज मजबूरी में कार्य करने को विवश हैं। माता-पिता की दवाई, बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च पूरा करने में काफी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार से मांग है कि समस्त शिक्षामित्र स्नातक बीटीसी 20 साल का शिक्षण कार्य करने का अनुभव है, इन्हें प्रशिक्षित वेतनमान 12 माह 62 वर्ष देकर भविष्य सुरक्षित कराते हुए अन्य शिक्षकों की भांति शेष सुविधाएं मुहैया कराई जाए तथा 2017 में समायोजन निरस्त होने के उपरांत प्रदेश के लगभग 3000 शिक्षामित्र दिवंगत हो गए उनके परिवार को आर्थिक धनराशि मुहैया कराया जाए।