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तीन माह से खड़ीं टैक्सियां चालकों का छिना रोजगार
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गोंडा में सवारियों के इंतजार में खड़े टैम्पो।
- फोटो : GONDA
गोंडा। कोरोना के संकट के क्या शहर और क्या गांव हर जगह लोग कराह रहे हैं। ऊपर से लॉकडाउन के प्रभाव ने लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। परदेश में जहां लोगों का रोजगार छिन गया और वो अपने घर और गांव लौटने को मजबूर हो गये। लाखों की संख्या में अन्य प्रदेशों और जिलों से लोगों ट्रेनों, बसों, बाइक और साइकिल आदि के जरिये अपने घरों तक लौटे। लेकिन कुछ के लिए तो अपने घर में अब जीना मुश्किल हो गया है। जी हां हम बात कर रहे हैं लॉकडाउन के दौरान तीन महीने से खड़ी दो हजार टैंपो और टैक्सी के चालकों और मालिकों की।
यहां मॉल, मार्ट, व्यापारी और कृषि सहित अन्य व्यवसायों पर लॉकडाउन का असर दिखा, बाद में उन्हें छूट मिलने के बाद कमाई का मौका मिल गया और काम भी चल रहा है। लेकिन 300 से 500 रुपए प्रतिदिन कमाने वाले टैक्सी संचालक व चालकों का निवाला ही छिन गया है। खास कर तीन माह से परमिट पर चलने वाले वाहनों में जंग लग गया है और उनके चालकों की रोजी रोटी छिन गई है। ऐसे में ये चालक दूसरे विकल्पों के जरिये अपने परिवार का पेट पालने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि जिले में लगभग दो हजार जीप, टैंपो और टैक्सी का पंजीकरण है। लेकिन कोरोना के चलते लॉकडाउन इफेक्ट से इनका रोजगार पूरी तरह से बैठ गया है।
अब ये लोग अन्य दुकानों पर काम करने लगे
सालपुर बाजार के दिनेश बताते हैं कि वो खुद अपना टेम्पो चलाते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद पूरी कमाई ठप हो गया है। अब जबकि सरकार की ओर से टैक्सी के संचालन में छूट दे दी गई है लेकिन अब लोग प्राइवेट टैक्सियों पर बैठना नहीं चाहते हैं। इसलिए इनका संचालन भी काफी हद तक कम हो गया है। ऐसे में उन्हें विकल्पों पर विचार करना पड़ा तो उन्होंने फल की दुकान लगानी शुरू कर दी। इसी तरह शहर इम्तियाज बताते हैं कि दूसरे की टैक्सी चलाते थे तो लगभग रोजाना 300 रुपये मिलते थे। परिवार का जीवन यापन इसी से होता था लेकिन अब लॉकडाऊन के चलते रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। ठेले पर सब्जी बेंचकर गुजारा हो रहा है।
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ये हैं जिले में पंजीकृत टेम्पो-टैक्सी का आंकड़ा
ऑटो-टेम्पो 1150
जीप- टैैक्सी 850
ई-रिक्शा 1350
ई-रिक्शा वालों की चांदी
प्राइवेट, जीप, टेम्पो और टैक्सी पर लॉकडाउन के दौरान संचालन पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन ई-रिक्शा के संचालन की छूट दी गई थी। ऐसे में ई-रिक्शा चालकों की शुरूआत से चांदी है। जिले में कुल 1350 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। ऐसे में कई टेम्पो चालकों ने ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया है। लाकडाउन 1 से ही केवल रिक्शा और ई-रिक्शा वालों को सवारियां ढोने की छूट दी गई थी।
जून महीने की शुुरुआत से प्राइवेट टैक्सियों के संचालन में छूट तो मिल गई लेकिन सवारियां नहीं मिल पा रही हैं। कई टेम्पो-टैक्सी संचालकों और बस ऑपरेटरों ने टैक्स माफी का मुद्दा उठाया है लेकिन अभी शासन की ओर से इस बारे में कोई निर्देश मिले हैं। हां इतना जरूर है कि अभी टैक्स वसूली पर फोकस नहीं किया जा रहा है और न ही सख्ती की जा रही है। कागजों की भी वैद्यता बढ़ा दी गई है। शासन की ओर से जो निर्देश मिलेंगे उसका अनुपालन कराया जायेगा। -राजेश कुमार मौर्य, एआरटीओ प्रवर्तन
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यहां मॉल, मार्ट, व्यापारी और कृषि सहित अन्य व्यवसायों पर लॉकडाउन का असर दिखा, बाद में उन्हें छूट मिलने के बाद कमाई का मौका मिल गया और काम भी चल रहा है। लेकिन 300 से 500 रुपए प्रतिदिन कमाने वाले टैक्सी संचालक व चालकों का निवाला ही छिन गया है। खास कर तीन माह से परमिट पर चलने वाले वाहनों में जंग लग गया है और उनके चालकों की रोजी रोटी छिन गई है। ऐसे में ये चालक दूसरे विकल्पों के जरिये अपने परिवार का पेट पालने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि जिले में लगभग दो हजार जीप, टैंपो और टैक्सी का पंजीकरण है। लेकिन कोरोना के चलते लॉकडाउन इफेक्ट से इनका रोजगार पूरी तरह से बैठ गया है।
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अब ये लोग अन्य दुकानों पर काम करने लगे
सालपुर बाजार के दिनेश बताते हैं कि वो खुद अपना टेम्पो चलाते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद पूरी कमाई ठप हो गया है। अब जबकि सरकार की ओर से टैक्सी के संचालन में छूट दे दी गई है लेकिन अब लोग प्राइवेट टैक्सियों पर बैठना नहीं चाहते हैं। इसलिए इनका संचालन भी काफी हद तक कम हो गया है। ऐसे में उन्हें विकल्पों पर विचार करना पड़ा तो उन्होंने फल की दुकान लगानी शुरू कर दी। इसी तरह शहर इम्तियाज बताते हैं कि दूसरे की टैक्सी चलाते थे तो लगभग रोजाना 300 रुपये मिलते थे। परिवार का जीवन यापन इसी से होता था लेकिन अब लॉकडाऊन के चलते रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। ठेले पर सब्जी बेंचकर गुजारा हो रहा है।
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ये हैं जिले में पंजीकृत टेम्पो-टैक्सी का आंकड़ा
ऑटो-टेम्पो 1150
जीप- टैैक्सी 850
ई-रिक्शा 1350
ई-रिक्शा वालों की चांदी
प्राइवेट, जीप, टेम्पो और टैक्सी पर लॉकडाउन के दौरान संचालन पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन ई-रिक्शा के संचालन की छूट दी गई थी। ऐसे में ई-रिक्शा चालकों की शुरूआत से चांदी है। जिले में कुल 1350 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। ऐसे में कई टेम्पो चालकों ने ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया है। लाकडाउन 1 से ही केवल रिक्शा और ई-रिक्शा वालों को सवारियां ढोने की छूट दी गई थी।
जून महीने की शुुरुआत से प्राइवेट टैक्सियों के संचालन में छूट तो मिल गई लेकिन सवारियां नहीं मिल पा रही हैं। कई टेम्पो-टैक्सी संचालकों और बस ऑपरेटरों ने टैक्स माफी का मुद्दा उठाया है लेकिन अभी शासन की ओर से इस बारे में कोई निर्देश मिले हैं। हां इतना जरूर है कि अभी टैक्स वसूली पर फोकस नहीं किया जा रहा है और न ही सख्ती की जा रही है। कागजों की भी वैद्यता बढ़ा दी गई है। शासन की ओर से जो निर्देश मिलेंगे उसका अनुपालन कराया जायेगा। -राजेश कुमार मौर्य, एआरटीओ प्रवर्तन