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बहनों ने भाइयों को बांधी राखी
अमर उजाला/गोंडा
Updated Thu, 18 Aug 2016 11:40 PM IST
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भाइयों को राखी बांधतीं बहनें
- फोटो : अमर उजाला
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भाई-बहन के स्नेहिल रिश्तों के प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों को रोली व चंदन का टीका लगाया, आरती उतारी फिर उनकी कलाई में प्रेम रूपी धागा बांध कर रक्षा का संकल्प दिलाया। भाइयों ने भी सुख-दुख मेें सहभागी बनने तथा उनकी रक्षा का संकल्प लेते हुए तरह-तरह के उपहार दिए।
भाई-बहन के पवित्र स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन के त्यौहार को लेकर गुरुवार की सुबह से ही लोगों में काफी उत्साह दिखा। बहनों ने भाइयों के घर पहुंचकर रोली व चंदन का टीका लगाया। बहनों ने भाइयों की आरती उतारी और कलाई में राखी बांधकर उनके सुखी जीवन व दीर्घायु होने की कामना की। भाइयों ने बहनों को कपड़े, नकदी, जेवर सहित अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का उपहार देकर उनके सुख-दुख में भागी बनने का संकल्प लिया।
उधर, पुरोहितों व विद्वानों ने यज्ञमानों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखी व समृद्धिशाली जीवन की कामना की। बदले में यज्ञमानों ने पुरोहितों, विद्वानों को उपहार दिए। कई जगह पर धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। उधर, हर त्यौहारों की तरह रक्षाबंधन पर भी अलग-अलग राय रही।
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तमाम लोग शुभ समय में रक्षा सूत्र बंधवाने की लालसा लिए एक -दूसरे से पूछते रहे। उधर, विद्वानों के अलग-अलग तर्क रहे, जिससे किसी ने छह बजे राखी बंधवाई तो किसी ने 12 बजे। यही नहीं शुभ मुहूर्त के चक्कर में कुछ लोगों ने तीन बजे के बाद भादों माह में राखी बंधवाई।
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भाई-बहन के पवित्र स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन के त्यौहार को लेकर गुरुवार की सुबह से ही लोगों में काफी उत्साह दिखा। बहनों ने भाइयों के घर पहुंचकर रोली व चंदन का टीका लगाया। बहनों ने भाइयों की आरती उतारी और कलाई में राखी बांधकर उनके सुखी जीवन व दीर्घायु होने की कामना की। भाइयों ने बहनों को कपड़े, नकदी, जेवर सहित अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का उपहार देकर उनके सुख-दुख में भागी बनने का संकल्प लिया।
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उधर, पुरोहितों व विद्वानों ने यज्ञमानों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखी व समृद्धिशाली जीवन की कामना की। बदले में यज्ञमानों ने पुरोहितों, विद्वानों को उपहार दिए। कई जगह पर धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। उधर, हर त्यौहारों की तरह रक्षाबंधन पर भी अलग-अलग राय रही।
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तमाम लोग शुभ समय में रक्षा सूत्र बंधवाने की लालसा लिए एक -दूसरे से पूछते रहे। उधर, विद्वानों के अलग-अलग तर्क रहे, जिससे किसी ने छह बजे राखी बंधवाई तो किसी ने 12 बजे। यही नहीं शुभ मुहूर्त के चक्कर में कुछ लोगों ने तीन बजे के बाद भादों माह में राखी बंधवाई।