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दहेज हत्या में पति व ससुर को सात-सात साल की कैद
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गोंडा। दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने के अभियुक्त पति व ससुर को सत्र न्यायाधीश ने सात-सात साल के कैद की सजा से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोनों अभियुक्तों को तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी बसंत शुक्ला के मुताबिक, थाना कौड़िया क्षेत्र के कनकपुर निवासी कैलाश सिंह ने 28 जनवरी 2016 को थाना कौड़िया में इसी थाना क्षेत्र के धर्मपुर के रहने वाले मुकादम सिंह व रामगोपाल सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जिसमें कहा गया कि कैलाश सिंह ने अपनी पुत्री की शादी मुकादम के साथ की थी। जिसे ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित किया करते थे। दहेज न मिलने पर ससुराल वालों ने 28 जनवरी 2016 को उसकी पुत्री को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित कर दिया। जिससे उसने जान दे दी।
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मामले में विवेचक ने आरोपी पति मुकादम सिंह व राम गोपाल सिंह के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे का विचारण सत्र न्यायाधीश के समक्ष हुआ। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने अदालत पर गवाहों का बयान कराया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी अपना पक्ष रखा।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुना और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अभियुक्त मुकादम व रामगोपाल को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने का दोषी पाते हुए सात-सात साल की कैद व 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की दशा में अभियुक्तों को तीन-तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी बसंत शुक्ला के मुताबिक, थाना कौड़िया क्षेत्र के कनकपुर निवासी कैलाश सिंह ने 28 जनवरी 2016 को थाना कौड़िया में इसी थाना क्षेत्र के धर्मपुर के रहने वाले मुकादम सिंह व रामगोपाल सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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जिसमें कहा गया कि कैलाश सिंह ने अपनी पुत्री की शादी मुकादम के साथ की थी। जिसे ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित किया करते थे। दहेज न मिलने पर ससुराल वालों ने 28 जनवरी 2016 को उसकी पुत्री को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित कर दिया। जिससे उसने जान दे दी।
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मामले में विवेचक ने आरोपी पति मुकादम सिंह व राम गोपाल सिंह के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे का विचारण सत्र न्यायाधीश के समक्ष हुआ। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने अदालत पर गवाहों का बयान कराया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी अपना पक्ष रखा।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुना और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अभियुक्त मुकादम व रामगोपाल को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने का दोषी पाते हुए सात-सात साल की कैद व 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की दशा में अभियुक्तों को तीन-तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।