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सात बिजलीघरों के लिए नहीं मिली जमीन
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2015 11:31 PM IST
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अगले वित्तीय वर्ष से प्रदेश सरकार गांवों को 18 घंटे तो शहरों को 24 घंटे बिजली देने का मन बनाए बैठी है। इसके लिए उसकी तरफ से हर जिले में न्यूनतम 4 से 5 व अधिकतम 8 से 9 नए बिजलीघर बनाए जाने की स्वीकृति भी दी जा चुकी है। लेकिन इन बिजली घरों के निर्माण की जो कवायद जिलें में चल रही है, उसे देखकर तो यही लगता है कि इसका काम अगले वित्तीय वर्ष तक शुरू भी हो जाए तो बड़ी बात है।
जबकि इन बिजलीघरों के निर्माण के लिए पावर कॉर्पोरेशन की ओर से करीब 80 करोड़ रुपये भी अलग-अलग डिवीजनों के लिए जारी किए जा चुके हैं। ऐसी स्थिति में अगर समय से इन बिजलीघरों का काम पूरा नहीं हुआ तो यह न सिर्फ पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के मुंह पर तमाचा होगा, बल्कि उस प्रदेश सरकार के लिए भी बड़ी शर्म की बात होगी, जो बिजली के मोर्चे पर विपक्षियों को घेरती आ रही है। सात स्थानों पर अभी तक बिजली घरों के लिए जमीन ही नहीं मिली है।
जमीन न मिलने से खटाई में पड़ा कार्य
मंडल में 21 नए बिजलीघरों के निर्माण के लिए पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को सात जगहों पर अभी तक जमीन ही नहीं मिली है। जमीन की उपलब्धता में सबसे ज्यादा दिक्कत गोंडा जिले में रही है। जबकि कुछ दिक्कतें बलरामपुर व श्रावस्ती जिले में भी है।
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इसके लिए लगातार कॉर्पोरेशन के अधिकारी नगर पालिका परिषद, जिलाधिकारी व आयुक्त के दरबार में जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी कर रहे हैं। यही वजह है कि जमीन उपलब्ध न होने से बिजलीघरों के निर्माण का काम भी खटाई में पड़ा है।
बीते साल नवंबर में ऊर्जा मंत्री याशर शाह के साथ ही पावर कॉर्पोरेशन के एमडी एपी मिश्र ने गोंडा जिले में बड़गांव बिजली घर के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान घोषणा की थी कि इसका निर्माण 100 दिन के भीतर पूरा हो जाएगा। जबकि शिलान्यास हुए 200 दिन बीतने वाले हैं और अभी तक बड़गांव बिजलीघर की बाउंड्रीवाल का ही काम पूरा हो पाया है।
मंडल में जिन 21 नए बिजली घरों का निर्माण होना है, उसमें से कल तक केवल चार ही बिजलीघरों के निर्माण का काम पावर कॉर्पोरेशन की कार्यदायी संस्था सेकेंड्री वर्क्स डिवीजन को मिला था। इसमें गोंडा के रघुराजनगर टिकरी, श्रावस्ती के जमुनहाबाजार और बगहाबाजार के साथ ही बलरामपुर के गैसड़ी में बिजलीघर के निर्माण का जिम्मा सेकेंड्री वर्क्स डिवीजन को मिला था।
इसमें बुधवार को गोंडा के बड़गांव बिजलीघर के निर्माण का इजाफा करते हुए इसकी भी जिम्मेदारी वर्क्स डिवीजन को दे दी गई। जबकि बहराइच में बनने वाले आठ बिजलीघरों के निर्माण का जिम्मा पहले से ही वहां के डिवीजन को सौंप रखा गया है। वहीं इसके इतर जो आठ नए बिजली घर शेष रह गए हैं, उनका निर्माण कौन एजेंसी कराएगी, इसका अभी तक कुछ अता-पता नहीं है।
वर्ष 2016-17 में ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों को 24 घंटे बिजली देने के लिए जिले में 21 नए बिजली घरों का निर्माण किया जाना है। इसके लिए ज्यादातर जगहों पर विभाग को जमीन मिल चुकी है। कई जगहों पर बिजली घर निर्माण का काम भी चालू है। कुछ जगहों पर जमीन की उपलब्धता के संबंध में पत्राचार हो रहा है। उम्मीद है कि एक-दो महीने में जिन जगहों पर बिजलीघर के निर्माण का काम चालू नहीं हुआ है, उसे भी शुरू करा दिया जाएगा। - -हर्ष मुंशी, मुख्य अभियंता, देवीपाटन जोन
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जबकि इन बिजलीघरों के निर्माण के लिए पावर कॉर्पोरेशन की ओर से करीब 80 करोड़ रुपये भी अलग-अलग डिवीजनों के लिए जारी किए जा चुके हैं। ऐसी स्थिति में अगर समय से इन बिजलीघरों का काम पूरा नहीं हुआ तो यह न सिर्फ पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के मुंह पर तमाचा होगा, बल्कि उस प्रदेश सरकार के लिए भी बड़ी शर्म की बात होगी, जो बिजली के मोर्चे पर विपक्षियों को घेरती आ रही है। सात स्थानों पर अभी तक बिजली घरों के लिए जमीन ही नहीं मिली है।
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जमीन न मिलने से खटाई में पड़ा कार्य
मंडल में 21 नए बिजलीघरों के निर्माण के लिए पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को सात जगहों पर अभी तक जमीन ही नहीं मिली है। जमीन की उपलब्धता में सबसे ज्यादा दिक्कत गोंडा जिले में रही है। जबकि कुछ दिक्कतें बलरामपुर व श्रावस्ती जिले में भी है।
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इसके लिए लगातार कॉर्पोरेशन के अधिकारी नगर पालिका परिषद, जिलाधिकारी व आयुक्त के दरबार में जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी कर रहे हैं। यही वजह है कि जमीन उपलब्ध न होने से बिजलीघरों के निर्माण का काम भी खटाई में पड़ा है।
बीते साल नवंबर में ऊर्जा मंत्री याशर शाह के साथ ही पावर कॉर्पोरेशन के एमडी एपी मिश्र ने गोंडा जिले में बड़गांव बिजली घर के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान घोषणा की थी कि इसका निर्माण 100 दिन के भीतर पूरा हो जाएगा। जबकि शिलान्यास हुए 200 दिन बीतने वाले हैं और अभी तक बड़गांव बिजलीघर की बाउंड्रीवाल का ही काम पूरा हो पाया है।
मंडल में जिन 21 नए बिजली घरों का निर्माण होना है, उसमें से कल तक केवल चार ही बिजलीघरों के निर्माण का काम पावर कॉर्पोरेशन की कार्यदायी संस्था सेकेंड्री वर्क्स डिवीजन को मिला था। इसमें गोंडा के रघुराजनगर टिकरी, श्रावस्ती के जमुनहाबाजार और बगहाबाजार के साथ ही बलरामपुर के गैसड़ी में बिजलीघर के निर्माण का जिम्मा सेकेंड्री वर्क्स डिवीजन को मिला था।
इसमें बुधवार को गोंडा के बड़गांव बिजलीघर के निर्माण का इजाफा करते हुए इसकी भी जिम्मेदारी वर्क्स डिवीजन को दे दी गई। जबकि बहराइच में बनने वाले आठ बिजलीघरों के निर्माण का जिम्मा पहले से ही वहां के डिवीजन को सौंप रखा गया है। वहीं इसके इतर जो आठ नए बिजली घर शेष रह गए हैं, उनका निर्माण कौन एजेंसी कराएगी, इसका अभी तक कुछ अता-पता नहीं है।
वर्ष 2016-17 में ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों को 24 घंटे बिजली देने के लिए जिले में 21 नए बिजली घरों का निर्माण किया जाना है। इसके लिए ज्यादातर जगहों पर विभाग को जमीन मिल चुकी है। कई जगहों पर बिजली घर निर्माण का काम भी चालू है। कुछ जगहों पर जमीन की उपलब्धता के संबंध में पत्राचार हो रहा है। उम्मीद है कि एक-दो महीने में जिन जगहों पर बिजलीघर के निर्माण का काम चालू नहीं हुआ है, उसे भी शुरू करा दिया जाएगा। - -हर्ष मुंशी, मुख्य अभियंता, देवीपाटन जोन