{"_id":"61a3b3810a87cc57ad4c2a9e","slug":"seed-drill-will-get-good-yield-in-less-seed-than-sowing-gonda-news-lko606514892","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीड ड्रिल बुवाई से कम बीज में किसानों को मिलेगी अच्छी उपज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीड ड्रिल बुवाई से कम बीज में किसानों को मिलेगी अच्छी उपज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर द्वारा रविवार को कुवांरानी कृष्णा कुमारी फार्म फिरोजपुर में गेहूं प्रजाति करण बंदना की बोआई वैज्ञानिकों की देखरेख में कराई गयी।
फार्म के स्वामी कुंवर अतुल कुमार सिंह व शस्य वैज्ञानिक डॉ. राम लखन सिंह ने गेहूं प्रजाति करण बंदना की बोआई वैज्ञानिक विधि से कराई। गेहूं की नई प्रजाति करण वंदना ( डी बी डब्ल्यू 187 ) गेहूं अनुसंधान निदेशालय करनाल के द्वारा विकसित की गई है। इसकी उत्पादन क्षमता 30 कुंटल प्रति एकड़ है।
प्रति एकड़ बुवाई हेतु 110 किलोग्राम यूरिया, 50 किलोग्राम डीएपी एवं 40 किलोग्राम म्यूरेट आफ पोटाश की जरूरत होती है। सीड ड्रिल से बोआई करते समय एक बॉक्स में डीएपी उर्वरक तथा दूसरे बॉक्स में गेहूं बीज भरा जाता है । पंक्ति से पंक्ति की बोआई साढे़ 22 सेंटीमीटर पर की जाती है।
विज्ञापन
समय से बोने वाली प्रजातियों की बोआई नवंबर माह में की जाती है तथा देर से बोने वाली गेहूं की प्रजातियों की बुआई दिसंबर माह में की जाती है। गेहूं बीज की बुवाई से पूर्व बीज का अंकुरण अवश्य देख लेना चाहिए ।
सीड ड्रिल से बुवाई करने पर बीज दर कम लगता है और फसल की उपज अच्छी प्राप्त होती है। इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर पीके मिश्रा ने सिंचाई प्रबंधन डॉ मनोज कुमार सिंह ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की जानकारी दी।
विज्ञापन
फार्म के स्वामी कुंवर अतुल कुमार सिंह व शस्य वैज्ञानिक डॉ. राम लखन सिंह ने गेहूं प्रजाति करण बंदना की बोआई वैज्ञानिक विधि से कराई। गेहूं की नई प्रजाति करण वंदना ( डी बी डब्ल्यू 187 ) गेहूं अनुसंधान निदेशालय करनाल के द्वारा विकसित की गई है। इसकी उत्पादन क्षमता 30 कुंटल प्रति एकड़ है।
विज्ञापन
प्रति एकड़ बुवाई हेतु 110 किलोग्राम यूरिया, 50 किलोग्राम डीएपी एवं 40 किलोग्राम म्यूरेट आफ पोटाश की जरूरत होती है। सीड ड्रिल से बोआई करते समय एक बॉक्स में डीएपी उर्वरक तथा दूसरे बॉक्स में गेहूं बीज भरा जाता है । पंक्ति से पंक्ति की बोआई साढे़ 22 सेंटीमीटर पर की जाती है।
विज्ञापन
समय से बोने वाली प्रजातियों की बोआई नवंबर माह में की जाती है तथा देर से बोने वाली गेहूं की प्रजातियों की बुआई दिसंबर माह में की जाती है। गेहूं बीज की बुवाई से पूर्व बीज का अंकुरण अवश्य देख लेना चाहिए ।
सीड ड्रिल से बुवाई करने पर बीज दर कम लगता है और फसल की उपज अच्छी प्राप्त होती है। इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर पीके मिश्रा ने सिंचाई प्रबंधन डॉ मनोज कुमार सिंह ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की जानकारी दी।