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13.75 करोड़ के बजट में स्कूलों ने किया घोटाला

Tue, 07 Jun 2022 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 10:48 PM IST
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Schools did scam in the budget of 13.75 crores
गोंडा। जिले के 2,611 परिषदीय स्कूलों को संवारने और खेल गतिविधियों के लिए 13.75 करोड़ रुपये का बजट मिला था। बजट के खर्च में नियमों और आवश्यकताओं की अनदेखी का मामला सामने आया है। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों से पहले ही दो दर्जन से अधिक प्रधानाध्यापकों को नोटिस दिया गया था। इसके बाद कई अन्य मामले सामने आए हैं। खेल सामग्री की खरीद में गोलमाल की जांच के लिए विभाग के जिला समन्वयकों की टीम बनी है। स्कूल खुलने पर सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी। इसी तरह कंपोजिट ग्रांट के 12 करोड़ रुपये के उपभोग की समीक्षा भी बीएसए ने तकनीकी टीम के साथ शुरू कर दी है। इसमें दो सौ से अधिक प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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समग्र शिक्षा से बीते वित्तीय वर्ष में 2,611 परिषदीय स्कूलों के लिए 12 करोड़ रुपये की कंपोजिट ग्रांट भेजी गई थी। इससे स्कूलों में रंगाई-पुताई, अलमारी की खरीद व मरम्मत के काम कराने थे। ग्रांट का दस फीसदी हिस्सा स्वच्छता अभियान में खर्च होना है। इसके अलावा बिजली के उपकरणों की खरीद व कक्ष में टाइल्स लगवाने का काम भी किया जाएगा। जिन स्कूलों में एक से तीस बच्चे ही हैं, उन स्कूलों में दस हजार रुपये भेजे जाएंगे।
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शासन से परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट स्कूलों की दशा सुधारने के लिए बजट मिला था। पिछले बरसों के मुकाबले इस वर्ष धनराशि आवंटन के लिए निर्धारित की गई छात्र संख्या के मानक में आंशिक बदलाव किया गया है। ग्रांट की रकम छात्रों की संख्या के आधार पर भेजी गई थी। स्कूलों में मरम्मत एवं अन्य सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। एक से तीस तक छात्र संख्या वाले स्कूलों को 10 हजार एवं 100 तक छात्र संख्या वाले विद्यालयों को 25 हजार रुपये दिए गये थे। इसी तरह अन्य स्कूलों को बजट आवंटित करके उन्हें संवारने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश गये थे।
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स्कूलों में बजट मनमाने ढंग से खर्च किया गया। करनैलगंज के एक शिक्षक के निलंबन के बाद मामला चर्चा में आया। इसके साथ ही स्कूलों के निरीक्षण के दौरान भी कई मामले सामने आए। दो हजार स्कूलों में फर्नीचर तक नहीं हैं। इसी तरह चार सौ से अधिक स्कूलों में कक्षा कक्षों की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में 12 करोड़ रुपये के बजट में गोलमाल की आशंका बढ़ गई है। जुलाई से स्कूलों की स्थिति और खर्च की समीक्षा की तैयारी हो रही है। इसके बाद कमियों के आधार पर प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई तय होगी। (संवाद)
2,611 परिषदीय स्कूलों को खेल सामग्री से लैस करने के लिए 1.75 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। इसके तहत प्राइमरी स्कूलों को पांच-पांच हजार, जूनियर व कंपोजिट स्कूलों को दस-दस हजार रुपये बजट दिया गया। इससे बच्चों की रुचि के आधार पर खेल सामग्री खरीदी जानी थी। प्रधानाध्यापकों को खेल गतिविधियों के लिए सामग्री खरीदनी थी। जिले के 1,709 प्राइमरी स्कूलों के लिए प्रति स्कूल पांच हजार रुपये की दर से 85 लाख 45 हजार रुपये और 902 कंपोजिट व जूनियर स्कूलों को दस हजार की दर से 90 लाख 20 हजार रुपये का बजट मिला। इस बजट के उपयोग पर भी सवाल खड़ा हुआ है। स्कूल बंद होने से पहले दो सौ से अधिक स्कूलों का सत्यापन हुआ है जिसमें मानक की अनदेखी सामने आई है। अन्य स्कूलों का सत्यापन छुट्टियों के बाद शुरू होगा।

बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि स्कूलों के लिए दिए गये बजट के सदुपयोग पर जोर दिया जा रहा है। अनियमितता के मामले सामने आने पर कार्रवाई होगी। योजनाओं की समीक्षा की जा रही है।
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