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कायाकल्प की संजीवनी से खिलखिलाया 58 साल पुराना स्कूल
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गोंडा। शहर में शिक्षा की अलख जगाने की पहल 1960 में हुई थी और गांधी पार्क में नगर पालिका की तरफ से मांटेसरी स्कूल की स्थापना हुई थी। उस समय शहर में गरीब बच्चों की पढ़ाई की सुविधा नहीं थी। नगर पालिका परिषद की ओर से स्कूल संचालित किए जाने को बड़ी बात मानी गई थी।
अब यह स्कूल 58 साल पूरे कर चुका है। अब नगर पालिका परिषद ने स्कूल को संवारने और हाईटेक बनाने के लिए 30 लाख रुपए का बजट तय किया है। स्कूल की सूरत तो तकरीबन बदल गई है, जल्द ही स्कूल का आंगन संसाधनों से खिलखिलाता दिखेगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं किसी भी शहर की सबसे अहम जरूरत है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए 1960 में नगर पालिका ने शहर में स्कूल स्थापित किए जाने की योजना बनाई। उस समय नगर पालिका के स्कूल के अलावा मिशन का एक स्कूल संचालित होता था।
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धीरे-धीरे स्कूल भवन जर्जर होने से बच्चे कम हो गए, इसके बाद नगर पालिका ने स्कूल को संवारने की योजना बनाई। भवन का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही कमरों में टाइल्स लगाया गया है। नई खिड़कियां लगाई गई हैं। हर कमरे में पंखे लगाए गए हैं। गेट का निर्माण कराया गया है।
परिसर में इंटरलांकिंग के साथ ही मुलायम घास लगाई जाएगी। साथ ही बच्चों को खेलने के लिए दो झूले लगाए जाएंगे। सबसे खास यह है कि स्कूल को पूरी तरह वातानुकूलित बनाने की योजना है। इसके लिए छह कमरों में बरसात के बाद एयर कंडीशनर लगाए जाएंगे। फिलहाल अभी स्कूल में जरूरी कार्य पूरा करके संचालन शुरू करा दिया गया है। हर बच्चे को दो-दो सेट यूनिफॉर्म के साथ ही टाई, बेल्ट व जूता-मोजा भी दिया जाएगा।
वक्त के साथ स्कूल की स्थिति बदलती रही। पहली प्रधानाध्यापिका के रूप में इंदिरा देवी ने कार्यभार संभाला। उन्होंने बच्चों को स्कूलों से जोड़ा और अच्छी शिक्षा व्यवस्था देकर स्कूल को नई ऊंचाइयां दी। शहर के साथ ही आसपास के कई गांवों के बच्चे पढ़ने आते थे। दूर से बच्चों को लाने और ले जाने के लिए उस समय मिनी बस भी चलाई गई थी।
1998 में बतौर प्रधानाध्यापिका आशारानी श्रीवास्तव ने कार्यभार संभाला और फिर 1999 में नीलम मणि प्रधानाध्यापिका बनीं। 2014 में सुरेंद्र कौर बनीं और फिर 2017 में प्रभारी प्रधानाध्यापिका सुनीता गुप्ता ने काम संभाला।
इसके बाद से स्कूल में बदलाव की बयार बही। इस समय स्कूल में 70 बच्चे हैं और नामांकन अभियान जारी है। फिलहाल स्कूल की जर्जर स्थिति के कारण बच्चों का रुझान कम हो गया था। स्कूल के संचालन और गुणवत्ता के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।
डीएम डॉ. नितिन बंसल बीते दिनों गांधी पार्क गए थे। उन्होंने टाउन हाल के साथ ही स्कूल को भी देखा और स्कूल के बेहतर संचालन पर जोर दिया। नगर पालिका का स्कूल होने पर उन्होंने यहां सुविधाएं बढ़ाने के लिए जोर देने के साथ ही बच्चों के लिए कमरों को वातानुकूलित किए जाने का सुझाव दिया। जिलाधिकारी की पहल पर नगर पालिका ने कार्य योजना को आगे बढ़ाया।
प्रधानाध्यापिका सुनीता गुप्ता ने बताया कि स्कूल को नया रूप मिलने से बच्चों का रुझान बढ़ा है। कोशिश है कि नामांकन भी बढ़े, प्रयास किया जा रहा है। अन्य सुविधाओं से स्कूल को नया आयाम मिलेगा। शिक्षा व्यवस्था बेहतर की जा रही है।
चेयरमैन उज्मा राशिद ने बताया कि नगर पालिका के स्कूल को अच्छे ढंग से तैयार करने के लिए योजना तैयार की गई है। शहर के लोगों को एक अच्छा शैक्षिक संस्थान दिया जा रहा है। जिससे गरीब बच्चों को बेहतर अवसर मिल सके।
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अब यह स्कूल 58 साल पूरे कर चुका है। अब नगर पालिका परिषद ने स्कूल को संवारने और हाईटेक बनाने के लिए 30 लाख रुपए का बजट तय किया है। स्कूल की सूरत तो तकरीबन बदल गई है, जल्द ही स्कूल का आंगन संसाधनों से खिलखिलाता दिखेगा।
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शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं किसी भी शहर की सबसे अहम जरूरत है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए 1960 में नगर पालिका ने शहर में स्कूल स्थापित किए जाने की योजना बनाई। उस समय नगर पालिका के स्कूल के अलावा मिशन का एक स्कूल संचालित होता था।
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धीरे-धीरे स्कूल भवन जर्जर होने से बच्चे कम हो गए, इसके बाद नगर पालिका ने स्कूल को संवारने की योजना बनाई। भवन का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही कमरों में टाइल्स लगाया गया है। नई खिड़कियां लगाई गई हैं। हर कमरे में पंखे लगाए गए हैं। गेट का निर्माण कराया गया है।
परिसर में इंटरलांकिंग के साथ ही मुलायम घास लगाई जाएगी। साथ ही बच्चों को खेलने के लिए दो झूले लगाए जाएंगे। सबसे खास यह है कि स्कूल को पूरी तरह वातानुकूलित बनाने की योजना है। इसके लिए छह कमरों में बरसात के बाद एयर कंडीशनर लगाए जाएंगे। फिलहाल अभी स्कूल में जरूरी कार्य पूरा करके संचालन शुरू करा दिया गया है। हर बच्चे को दो-दो सेट यूनिफॉर्म के साथ ही टाई, बेल्ट व जूता-मोजा भी दिया जाएगा।
वक्त के साथ स्कूल की स्थिति बदलती रही। पहली प्रधानाध्यापिका के रूप में इंदिरा देवी ने कार्यभार संभाला। उन्होंने बच्चों को स्कूलों से जोड़ा और अच्छी शिक्षा व्यवस्था देकर स्कूल को नई ऊंचाइयां दी। शहर के साथ ही आसपास के कई गांवों के बच्चे पढ़ने आते थे। दूर से बच्चों को लाने और ले जाने के लिए उस समय मिनी बस भी चलाई गई थी।
1998 में बतौर प्रधानाध्यापिका आशारानी श्रीवास्तव ने कार्यभार संभाला और फिर 1999 में नीलम मणि प्रधानाध्यापिका बनीं। 2014 में सुरेंद्र कौर बनीं और फिर 2017 में प्रभारी प्रधानाध्यापिका सुनीता गुप्ता ने काम संभाला।
इसके बाद से स्कूल में बदलाव की बयार बही। इस समय स्कूल में 70 बच्चे हैं और नामांकन अभियान जारी है। फिलहाल स्कूल की जर्जर स्थिति के कारण बच्चों का रुझान कम हो गया था। स्कूल के संचालन और गुणवत्ता के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।
डीएम डॉ. नितिन बंसल बीते दिनों गांधी पार्क गए थे। उन्होंने टाउन हाल के साथ ही स्कूल को भी देखा और स्कूल के बेहतर संचालन पर जोर दिया। नगर पालिका का स्कूल होने पर उन्होंने यहां सुविधाएं बढ़ाने के लिए जोर देने के साथ ही बच्चों के लिए कमरों को वातानुकूलित किए जाने का सुझाव दिया। जिलाधिकारी की पहल पर नगर पालिका ने कार्य योजना को आगे बढ़ाया।
प्रधानाध्यापिका सुनीता गुप्ता ने बताया कि स्कूल को नया रूप मिलने से बच्चों का रुझान बढ़ा है। कोशिश है कि नामांकन भी बढ़े, प्रयास किया जा रहा है। अन्य सुविधाओं से स्कूल को नया आयाम मिलेगा। शिक्षा व्यवस्था बेहतर की जा रही है।
चेयरमैन उज्मा राशिद ने बताया कि नगर पालिका के स्कूल को अच्छे ढंग से तैयार करने के लिए योजना तैयार की गई है। शहर के लोगों को एक अच्छा शैक्षिक संस्थान दिया जा रहा है। जिससे गरीब बच्चों को बेहतर अवसर मिल सके।