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Gonda News: आरक्षण ने बदला समीकरण, बदलेंगे कई चेहरे
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गोंडा। नगर निकायों के अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित आरक्षण सूची सोमवार शाम जारी कर दी गई। जिले के दस निकायों में से सात निकायों के अध्यक्ष पद सामान्य होने के साथ ही दो सीटें महिलाओं और एक सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। सामान्य और महिला के लिए नौ सीटें तय होने से इन पर सभी वर्ग के लोगों के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है।
जिले में तीन नगर पालिकाओं में गोंडा को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। साल 2017 में ये सामान्य सीट थी, जिस पर सपा प्रत्याशी उज्मा राशिद जीतीं थीं। इस बार महिला सीट होने से एक बार फिर उनके मैदान में उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।
करनैलगंज नगर पालिका सामान्य सीट की गई है। ये सीट पहले महिला के लिए आरक्षित थी। इसी तरह नगर पालिका नवाबगंज भी महिला सीट की गई है। ये पहले सामान्य सीट थी। ऐसे में यहां के चेयरमैन सत्येंद्र सिंह इस बार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
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इसी तरह कटरा बाजार, खरगूपुर, मनकापुर, परसपुर व नवगठित धानेपुर नगर पंचायत को सामान्य सीट घोषित किया गया है। वहीं, नवगठित तरबगंज को महिला और बेलसर नगर पंचायत को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। इस तरह पूरे जिले में एकमात्र बेलसर की सीट ही आरक्षित वर्ग के लिए है।
जिले में निकायों के अध्यक्ष पद के आरक्षण में सामान्य व महिलाओं के लिए कुल नौ सीटें तय की गईं हैं। ऐसे में भाजपा व सपा में टिकट के लिए दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। आरक्षण तय होते ही रस्साकशी शुरू हो गई है। सबसे अधिक जोर भाजपा के दावेदार लगा रहे हैं।
जिले में दिग्गजों के दरवाजे पर दावेदारों की दस्तक बढ़ गई है। गोंडा नगर पालिका में सबसे अधिक दावेदार हैं। वहीं, करनैलगंज में भी भाजपा के तीन से चार लोग जोर लगा रहे हैं। कटरा बाजार में विस्तार होने से कई दिग्गज जुट गए हैं। मनकापुर, तरबगंज, नवाबगंज, धानेपुर में अभी ज्यादा जोर नहीं दिख रहा है। खरगूपुर, परसपुर व बेलसर में भी लोग टिकट के लिए दौड़ लगा रहे हैं।
नवगठित बेलसर नगर पंचायत का अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने से कइयों को झटका लगा है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी के साथ ही शिक्षक नेता अजीत सिंह, बेलसर की पूर्व प्रधान जागृति सिंह, पूर्व प्रधान राणा सिंह, ज्येष्ठ प्रमुख विनय कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह के साथ ही कई स्थानीय नेता नगर पंचायत चेयरमैन का चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। सीट पिछड़ा वर्ग के खाते में जाने से इन लोगों को झटका लगा है, वहीं स्थानीय विधायक को राहत मिली है। सीट सामान्य होने से उनके सामने बड़ी चुनौती होती।
नवाबगंज नगर पालिका में साल 2017 में सीट सामान्य होने पर भाजपा ने अंजू सिंह को प्रत्याशी बनाया था। तब कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पार्टी से बगावत कर अपने करीबी सत्येंद्र सिंह को निर्दल लड़ाकर जिता दिया था। इस बार ये सीट महिला हो गई है। अब सांसद को नया प्रत्याशी तय करना होगा। उनके दांव पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं, संगठन का फैसला भी अहम होगा।
तरबगंज नगर पंचायत भी महिला सीट हो गई है। यहां भाजपा एमएलसी अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह व विधायक प्रेम नरायन पांडेय का वर्चस्व है। सीट पर किसकी पसंद का प्रत्याशी तय होगा, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं। माना जा रहा है कि एमएलसी मंजू सिंह सियासत के चाणक्य माने जाते हैं तो विधायक प्रेम नरायन पांडेय सियासत के महारथी कहे जाते हैं। ऐसे में अब दोनों के गुटों में खींचतान तेज होने के आसार हैं।
गोंडा नगर पालिका सीट एक बार फिर सामान्य हो गई है। साल 2017 में भाजपा ने पार्टी के कैडर नेता अरुण शुक्ल की पत्नी माया शुक्ला को टिकट दिया था। उस समय टिकट से खफा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बगावत कर दी थी। मन की बात कार्यक्रम कर पूरे संगठन को निशाने पर ले लिया था। भाजपा की हार भी हो गई थी और ये सीट सपा ने जीत ली थी। इस बार फिर सामान्य सीट होने से माया शुक्ला का दावा मजबूत हो गया है। इस बार सांसद का रुख क्या होगा? इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। भाजपा संगठन इस बार कैसे बैैलेंस करता है? ये देखने वाला होगा।
नगर मजिस्ट्रेट अर्पित गुप्त का कहना है कि नगर पालिका और नगर पंचायतों के चेयरमैन पद का आरक्षण जारी हो गया है। इस पर 12 दिसंबर तक लोग आपत्तियां दे सकते हैं। इसके बाद निस्तारण होगा।
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जिले में तीन नगर पालिकाओं में गोंडा को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। साल 2017 में ये सामान्य सीट थी, जिस पर सपा प्रत्याशी उज्मा राशिद जीतीं थीं। इस बार महिला सीट होने से एक बार फिर उनके मैदान में उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।
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करनैलगंज नगर पालिका सामान्य सीट की गई है। ये सीट पहले महिला के लिए आरक्षित थी। इसी तरह नगर पालिका नवाबगंज भी महिला सीट की गई है। ये पहले सामान्य सीट थी। ऐसे में यहां के चेयरमैन सत्येंद्र सिंह इस बार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
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इसी तरह कटरा बाजार, खरगूपुर, मनकापुर, परसपुर व नवगठित धानेपुर नगर पंचायत को सामान्य सीट घोषित किया गया है। वहीं, नवगठित तरबगंज को महिला और बेलसर नगर पंचायत को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। इस तरह पूरे जिले में एकमात्र बेलसर की सीट ही आरक्षित वर्ग के लिए है।
जिले में निकायों के अध्यक्ष पद के आरक्षण में सामान्य व महिलाओं के लिए कुल नौ सीटें तय की गईं हैं। ऐसे में भाजपा व सपा में टिकट के लिए दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। आरक्षण तय होते ही रस्साकशी शुरू हो गई है। सबसे अधिक जोर भाजपा के दावेदार लगा रहे हैं।
जिले में दिग्गजों के दरवाजे पर दावेदारों की दस्तक बढ़ गई है। गोंडा नगर पालिका में सबसे अधिक दावेदार हैं। वहीं, करनैलगंज में भी भाजपा के तीन से चार लोग जोर लगा रहे हैं। कटरा बाजार में विस्तार होने से कई दिग्गज जुट गए हैं। मनकापुर, तरबगंज, नवाबगंज, धानेपुर में अभी ज्यादा जोर नहीं दिख रहा है। खरगूपुर, परसपुर व बेलसर में भी लोग टिकट के लिए दौड़ लगा रहे हैं।
नवगठित बेलसर नगर पंचायत का अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने से कइयों को झटका लगा है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी के साथ ही शिक्षक नेता अजीत सिंह, बेलसर की पूर्व प्रधान जागृति सिंह, पूर्व प्रधान राणा सिंह, ज्येष्ठ प्रमुख विनय कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह के साथ ही कई स्थानीय नेता नगर पंचायत चेयरमैन का चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। सीट पिछड़ा वर्ग के खाते में जाने से इन लोगों को झटका लगा है, वहीं स्थानीय विधायक को राहत मिली है। सीट सामान्य होने से उनके सामने बड़ी चुनौती होती।
नवाबगंज नगर पालिका में साल 2017 में सीट सामान्य होने पर भाजपा ने अंजू सिंह को प्रत्याशी बनाया था। तब कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पार्टी से बगावत कर अपने करीबी सत्येंद्र सिंह को निर्दल लड़ाकर जिता दिया था। इस बार ये सीट महिला हो गई है। अब सांसद को नया प्रत्याशी तय करना होगा। उनके दांव पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं, संगठन का फैसला भी अहम होगा।
तरबगंज नगर पंचायत भी महिला सीट हो गई है। यहां भाजपा एमएलसी अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह व विधायक प्रेम नरायन पांडेय का वर्चस्व है। सीट पर किसकी पसंद का प्रत्याशी तय होगा, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं। माना जा रहा है कि एमएलसी मंजू सिंह सियासत के चाणक्य माने जाते हैं तो विधायक प्रेम नरायन पांडेय सियासत के महारथी कहे जाते हैं। ऐसे में अब दोनों के गुटों में खींचतान तेज होने के आसार हैं।
गोंडा नगर पालिका सीट एक बार फिर सामान्य हो गई है। साल 2017 में भाजपा ने पार्टी के कैडर नेता अरुण शुक्ल की पत्नी माया शुक्ला को टिकट दिया था। उस समय टिकट से खफा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बगावत कर दी थी। मन की बात कार्यक्रम कर पूरे संगठन को निशाने पर ले लिया था। भाजपा की हार भी हो गई थी और ये सीट सपा ने जीत ली थी। इस बार फिर सामान्य सीट होने से माया शुक्ला का दावा मजबूत हो गया है। इस बार सांसद का रुख क्या होगा? इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। भाजपा संगठन इस बार कैसे बैैलेंस करता है? ये देखने वाला होगा।
नगर मजिस्ट्रेट अर्पित गुप्त का कहना है कि नगर पालिका और नगर पंचायतों के चेयरमैन पद का आरक्षण जारी हो गया है। इस पर 12 दिसंबर तक लोग आपत्तियां दे सकते हैं। इसके बाद निस्तारण होगा।