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Gonda News: मानव जीवन को नैतिक आधार देता है धर्म
Sun, 28 Sep 2025 03:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 28 Sep 2025 03:01 AM IST
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पसका। धर्म जीवन को आधार प्रदान करता है। यह न केवल मानव मस्तिष्क को शांति देता है, बल्कि हृदय में आशा का संचार कर व्यक्ति को नैतिक पथ पर अग्रसर करता है। धर्म ही मानव जीवन को मानसिक दृढ़ता प्रदान कर उसे सुसंस्कारित बनाता है। ये विचार परसपुर के ग्राम डोमाकल्पी स्थित मालिक बाबा स्थान पर शनिवार को आयोजित सत्संग में पं. प्रयागदत्त मिश्र ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धर्म केवल आस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव समूह को व्यवहारिक, वैचारिक और भावात्मक रूप से जोड़ने का कार्य करता है। नकछेद पांडेय, राकेश पांडेय, रामप्रकाश पांडेय, लक्ष्मीकांत आदि श्रद्धालु मौजूद रहे। (संवाद)
संबंध जुड़ने पर अपनी शरण में ले लेते हैं भगवान
पसका। डोमाकल्पी में ही कालीमाता मंदिर पर आयोजित कथा में प्रवाचक आचार्य श्रीरामजी महाराज ने कहा कि प्रेम, द्वेष, लोभ या मोह किसी भी रूप में भगवान से संबंध जुड़ जाए, तो वह उसे अपनी शरण में ले लेते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म के बाद कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना की कथा सुनाई, जिसे प्रभु ने अंततः मुक्ति दी। प्रवाचक ने कहा कि भगवान बाल लीलाओं से लेकर माखन चोरी तक हर रूप में भक्तों का उद्धार करते हैं और यही उनकी दिव्य लीला की महानता है। (संवाद)
परिश्रम के साथ धैर्य जरूरी
पसका। गोगिया में आयोजित सत्संग में प्रवाचक पं. दीनानाथ शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को परिश्रम के साथ धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि धैर्य जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो दुख और संकट की घड़ी में हमें संभाले रखता है। वर्तमान समय में नैतिक पतन और सभ्यता की अंधी दौड़ ने समाज में अशांति और भय का माहौल पैदा किया है। शास्त्री ने समाधान बताते हुए भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सनातन साहित्य की ओर लौटने पर बल दिया। (संवाद)
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कन्या दान से बड़ा कोई दान नहीं : प्रशांत जी महाराज
बालपुर। हड़ियागाड़ा स्थित धामसा माता मंदिर में शतचंडी यज्ञ में प्रवाचक प्रशांत जी महाराज ने कहा कि संसार में कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए बेटियों का स्थान सबसे ऊपर है। बेटियों को बचाने व उन्हें पढ़ा-लिखाकर योग्य बनाने की जिम्मेदारी हर माता-पिता की है। उन्होंने देवी सीता के विवाह की कथा सुनाई। यश करन सिंह, हर्षवर्धन सिंह, पवन ओझा, विजय शंकर सिंह, हरिनाथ सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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संबंध जुड़ने पर अपनी शरण में ले लेते हैं भगवान
पसका। डोमाकल्पी में ही कालीमाता मंदिर पर आयोजित कथा में प्रवाचक आचार्य श्रीरामजी महाराज ने कहा कि प्रेम, द्वेष, लोभ या मोह किसी भी रूप में भगवान से संबंध जुड़ जाए, तो वह उसे अपनी शरण में ले लेते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म के बाद कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना की कथा सुनाई, जिसे प्रभु ने अंततः मुक्ति दी। प्रवाचक ने कहा कि भगवान बाल लीलाओं से लेकर माखन चोरी तक हर रूप में भक्तों का उद्धार करते हैं और यही उनकी दिव्य लीला की महानता है। (संवाद)
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परिश्रम के साथ धैर्य जरूरी
पसका। गोगिया में आयोजित सत्संग में प्रवाचक पं. दीनानाथ शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को परिश्रम के साथ धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि धैर्य जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो दुख और संकट की घड़ी में हमें संभाले रखता है। वर्तमान समय में नैतिक पतन और सभ्यता की अंधी दौड़ ने समाज में अशांति और भय का माहौल पैदा किया है। शास्त्री ने समाधान बताते हुए भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सनातन साहित्य की ओर लौटने पर बल दिया। (संवाद)
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कन्या दान से बड़ा कोई दान नहीं : प्रशांत जी महाराज
बालपुर। हड़ियागाड़ा स्थित धामसा माता मंदिर में शतचंडी यज्ञ में प्रवाचक प्रशांत जी महाराज ने कहा कि संसार में कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए बेटियों का स्थान सबसे ऊपर है। बेटियों को बचाने व उन्हें पढ़ा-लिखाकर योग्य बनाने की जिम्मेदारी हर माता-पिता की है। उन्होंने देवी सीता के विवाह की कथा सुनाई। यश करन सिंह, हर्षवर्धन सिंह, पवन ओझा, विजय शंकर सिंह, हरिनाथ सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)