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मनरेेेगा के गुणवत्ता स्टेट मॉनीटर ने किया निरीक्षण
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मुजेहना (गोंडा)। स्टेट क्वालिटी मॉनिटर मनरेगा विकास चंद्र आर्य ने शुक्रवार को ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर कार्यालय के अभिलेखों का निरीक्षण किया। उपायुक्त मनरेगा, खंड विकास अधिकारी के साथ बैठक कर क्षेत्र के ग्राम प्रधानों, तकनीकी सहायक और ग्राम विकास अधिकारियों को निर्देश भी दिया।
स्टेट क्वालिटी मॉनिटर ने सरजू सभागार में उपायुक्त मनरेगा हरिश्चंद्र राम प्रजापति, खंड विकास अधिकारी शेर बहादुर सिंह के साथ ग्राम विकास अधिकारी, तकनीकी सहायकों के साथ बैठक कर निर्देश दिये। उन्होंने तालाबों के रखरखाव चालकों और भवनों के निर्माण के संबंध में भी निर्देश दिए।
बताया कि अधिकाधिक नेचुरल तालाबों का रखरखाव ठीक से किया जाए क्योंकि पुराने तालाब ऐसे स्थिति में है कि चारों ओर से बरसात का पानी बहकर अपने आप ही इन तालाबों में आ जाता है। खोदे गए तालाबों में ज्यादातर ऊपर का बरसात का पानी ही इकट्ठा हो पाता है। ध्यान रखा जाए कि तीन तरफ ही तटों को ऊंचा किया जाए। एक तरफ का तट प्लेन रखा जाए। जिससे बरसात का पर्याप्त पानी उसमें इकट्ठा हो सके।
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उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि भवन निर्माण करते समय छतों को प्लास्टर करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि छत डालने से पूर्व जब शटरिंग बनाई जाए। उसी समय काली प्लास्टिक डाल दिया जाए। इस प्रकार बनाए गए छतों में प्लास्टर की आवश्यकता नहीं होती है। जो टाइल्स लगाई जाती हैं उनकी मोटाई 80 एमएम से कम नहीं होनी चाहिए। कार्य कराते समय 30 फीसदी कार्य महिलाओं से कराया जाए। इस अवसर पर प्रभारी एडीओ पंचायत दिलीप कुमार उपाध्याय, ग्राम विकास अधिकारी अनिल चौधरी, ग्राम प्रधान राजेंद्र तिवारी, अशोक श्रीवास्तव, उमाकांत शुक्ला, बंशीधर पाठक आदि तकनीकी सहायक भी उपस्थित रहे।
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स्टेट क्वालिटी मॉनिटर ने सरजू सभागार में उपायुक्त मनरेगा हरिश्चंद्र राम प्रजापति, खंड विकास अधिकारी शेर बहादुर सिंह के साथ ग्राम विकास अधिकारी, तकनीकी सहायकों के साथ बैठक कर निर्देश दिये। उन्होंने तालाबों के रखरखाव चालकों और भवनों के निर्माण के संबंध में भी निर्देश दिए।
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बताया कि अधिकाधिक नेचुरल तालाबों का रखरखाव ठीक से किया जाए क्योंकि पुराने तालाब ऐसे स्थिति में है कि चारों ओर से बरसात का पानी बहकर अपने आप ही इन तालाबों में आ जाता है। खोदे गए तालाबों में ज्यादातर ऊपर का बरसात का पानी ही इकट्ठा हो पाता है। ध्यान रखा जाए कि तीन तरफ ही तटों को ऊंचा किया जाए। एक तरफ का तट प्लेन रखा जाए। जिससे बरसात का पर्याप्त पानी उसमें इकट्ठा हो सके।
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उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि भवन निर्माण करते समय छतों को प्लास्टर करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि छत डालने से पूर्व जब शटरिंग बनाई जाए। उसी समय काली प्लास्टिक डाल दिया जाए। इस प्रकार बनाए गए छतों में प्लास्टर की आवश्यकता नहीं होती है। जो टाइल्स लगाई जाती हैं उनकी मोटाई 80 एमएम से कम नहीं होनी चाहिए। कार्य कराते समय 30 फीसदी कार्य महिलाओं से कराया जाए। इस अवसर पर प्रभारी एडीओ पंचायत दिलीप कुमार उपाध्याय, ग्राम विकास अधिकारी अनिल चौधरी, ग्राम प्रधान राजेंद्र तिवारी, अशोक श्रीवास्तव, उमाकांत शुक्ला, बंशीधर पाठक आदि तकनीकी सहायक भी उपस्थित रहे।