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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Power Corporation's neck like an albatross electrification

पावर कॉर्पोरेशन के गले की फांस बना विद्युतीकरण

Wed, 13 Jan 2016 11:38 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 13 Jan 2016 11:38 PM IST
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जिस संस्था का चयन उसने पूर्व में किया था, उससे काम छीनकर अब यही काम पावर कॉर्पोरेशन जब खुद कराने जा रहा है तो उसके सामने टेंडर लेने वाले लोगों की एक लंबी-चौड़ी फौज खड़ी हो गई है। जिसके लोग इसका काम किसी भी सूरत में हथियाने के लिए अपने रसूख तक का इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे। यही वजह है कि पावर कॉर्पोरेशन के स्थानीय अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है।
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क्योंकि वह यह जानते हैं कि मामला सौ-दो सौ मजरों का नहीं बल्कि 2189 मजरों के विद्युतीकरण का है। जिसका काम हर हाल में अक्तूबर 2016 से पहले पूरा किया जाना है। जो तभी पूरा हो सकता है, जब इसका काम लेने वाली कार्यदाई संस्था पूरी तरह से वेल मेंटेन और मैनपावर वाली हो।
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बता दें कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीतकरण के नाम से संचालित योजना आरजीजीवाई के 11वें व 12वें फेज में 100 व उससे ज्यादा व 300 व उससे ऊपर के मजरों को बिजली से आच्छादित किए जाने का काम जिले में बीते दो वर्षों से चल रहा है।
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11वीं योजना में 300 आबादी से ऊपर के जिले के 1836 ऐसे मजरे हैं, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। जिसका काम पहले आईवीआरसीएल को मिला था, लेकिन बाद में उसका टेंडर कैंसिल हो जाने के बाद अब यही काम समाज कल्याण निर्माण निगम करा रही है।

वहीं 12वीं योजना में 100 व उससे ऊपर के 2189 मजरों में विद्युतीकरण का ठेका पहले हैदरबाद की फर्म वैरीगेट को मिला था, लेकिन काम में उसकी ओर से बरती गई लापरवाही के चलते उससे इसका टेंडर पावर कॉर्पोरेशन ने वापस अपने हाथ में ले लिया।

अब चूंकि 12वीं योजना के सभी 2189 मजरों का काम पावर  कॉर्पोरेशन को खुद कार्यदायी संस्था एलाट करके कराना है। इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। 11 जनवरी को इसके लिए पावर कॉर्पोरेशन के दफ्तर में टेंडर आमंत्रित किया गया था। लेकिन काम लेने की होड़ में यहां इकट्ठा हुए राजनेताओं, उनके गुर्गों और ठेकेदारों के आपसी द्वंद्व में बाद में इसका टेंडर खुद ही कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को निरस्त कर देना पड़ा।

लेकिन समस्या अभी भी यही है कि स्थानीय व्यवस्थाओं के मद्देनजर कारपोरेशन के अधिकारी इतनी बड़ी तादात में जिले के मजरों का विद्युतीकरण कराएंगे तो कैसे। क्योंकि अबसे अगर वह विद्युतीकरण का टारगेट लेकर नहीं बढ़ते हैं तो खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के देखे गए उनके सपने और वोटबैंक का क्या होगा।

 जिसमें बिजली के मुद्दे पर ही दोबारा विधानसभा फतह की गोटें बिछा रखी गई हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अक्तूबर 2016 से पहले ग्रामीण क्षेत्र के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने के निर्देश दे रखे हैं। जिसकी हर महीने कॉर्पोरेशन के बड़े अधिकारी रोजाना समीक्षा भी कर रहे हैं।


बावजूद इसके गोंडा में इसकी कोई प्रगति देखने को नहीं मिल रही। मामले में मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी का कहना है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। टेंडर से संबंधित प्रकरण उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है।
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