{"_id":"625ef676155a721ce710b3e8","slug":"police-chowki-gonda-news-lko626873387","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिपोर्टिंग चौकी और 17 साल से नहीं दर्ज हुआ एक भी केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिपोर्टिंग चौकी और 17 साल से नहीं दर्ज हुआ एक भी केस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बालपुर (गोंडा)। एक ऐसी भी पुलिस चौकी है जहां 17 सालों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं है। यहां रिपोर्ट दर्ज करने की अनुमति नहीं है, बल्कि यहां रिपोर्टिंग चौकी का दर्जा मिले 17 साल बीत गए, लेकिन आज तक मामला पंजीकृत नहीं किया गया है।
इस अनोखी पुलिस चौकी कोतवाली करनैलगंज के बालपुर में स्थापित है। एक लाख की आबादी को राहत देने और मुकदमा दर्ज कराने के लिए 15 किलोमीटर का सफर तय न करना पड़े, इसलिए पुलिस चौकी की स्थापना की गई। बालपुर पुलिस चौकी के हलका में 22 गांव पंचायतों के 150 मजरों की जिम्मेदारी है। पुलिस चौकी सिर्फ पंचायत का अड्डा बन गई है। बड़े से बड़े विवाद में पुलिस पंचायत करके निस्तारण करने का प्रयास करती है। कोई गंभीर मामला हो जाता है तो पीड़ितों को जेब ढीली करके 15 किलोमीटर दूर कोतवाली करनैलगंज जाना पड़ता है। कोतवाली में बालपुर के दरोगा की सहमति पर केस दर्ज किया जाता है।
17 साल पहले वर्ष 2005-06 में कोतवाली के तत्कालीन कोतवाल जेके सिंह व बालपुर के दरोगा में किसी केस को लेकर कुछ विवाद हो गया था। इस लिए साहब केस दर्ज करने वाली पंजिका ही कोतवाली उठा ले गए। उस समय से किसी भी कोतवाल ने बालपुर पुलिस चौकी पर केस दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटाई। पुलिस की मनमानी से एक लाख की आबादी के लोग परेशान हैं। बालपुर पुलिस चौकी पर एक उपनिरीक्षक, तीन दीवान व पांच सिपाही तैनात हैं। सात बैंक तथा एक दर्जन से अधिक मिनी बैंक की जिम्मेदारी है। इनकी सुरक्षा किसी तरह से राम भरोसे चल रही है। क्षेत्र के लोग काफी दिनों से थाना बनाने की मांग कर रहे थे। थाने का दर्जा तो नहीं मिला, लेकिन रिपोर्टिंग चौकी काम की नहीं रही।
विज्ञापन
ऑनलाइन दर्ज कराएं रिपोर्ट
सीओ करनैलगंज मुन्ना उपाध्याय से जब सवाल किया गया कि 17 साल से रिपोर्टिंग पुलिस चौकी पर रिपोर्ट नहीं दर्ज हो रही है और लोगों को बेवजह कोतवाली जाना पड़ता है। इस पर उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराने की सुविधा मिली हुई है। लोग घर बैठे ही मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। यदि कोई समस्या हो तो उन्हें तथा उच्चाधिकारियों को बता सकते हैं। समस्या का निराकरण कराया जाएगा।
विज्ञापन
इस अनोखी पुलिस चौकी कोतवाली करनैलगंज के बालपुर में स्थापित है। एक लाख की आबादी को राहत देने और मुकदमा दर्ज कराने के लिए 15 किलोमीटर का सफर तय न करना पड़े, इसलिए पुलिस चौकी की स्थापना की गई। बालपुर पुलिस चौकी के हलका में 22 गांव पंचायतों के 150 मजरों की जिम्मेदारी है। पुलिस चौकी सिर्फ पंचायत का अड्डा बन गई है। बड़े से बड़े विवाद में पुलिस पंचायत करके निस्तारण करने का प्रयास करती है। कोई गंभीर मामला हो जाता है तो पीड़ितों को जेब ढीली करके 15 किलोमीटर दूर कोतवाली करनैलगंज जाना पड़ता है। कोतवाली में बालपुर के दरोगा की सहमति पर केस दर्ज किया जाता है।
विज्ञापन
17 साल पहले वर्ष 2005-06 में कोतवाली के तत्कालीन कोतवाल जेके सिंह व बालपुर के दरोगा में किसी केस को लेकर कुछ विवाद हो गया था। इस लिए साहब केस दर्ज करने वाली पंजिका ही कोतवाली उठा ले गए। उस समय से किसी भी कोतवाल ने बालपुर पुलिस चौकी पर केस दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटाई। पुलिस की मनमानी से एक लाख की आबादी के लोग परेशान हैं। बालपुर पुलिस चौकी पर एक उपनिरीक्षक, तीन दीवान व पांच सिपाही तैनात हैं। सात बैंक तथा एक दर्जन से अधिक मिनी बैंक की जिम्मेदारी है। इनकी सुरक्षा किसी तरह से राम भरोसे चल रही है। क्षेत्र के लोग काफी दिनों से थाना बनाने की मांग कर रहे थे। थाने का दर्जा तो नहीं मिला, लेकिन रिपोर्टिंग चौकी काम की नहीं रही।
विज्ञापन
ऑनलाइन दर्ज कराएं रिपोर्ट
सीओ करनैलगंज मुन्ना उपाध्याय से जब सवाल किया गया कि 17 साल से रिपोर्टिंग पुलिस चौकी पर रिपोर्ट नहीं दर्ज हो रही है और लोगों को बेवजह कोतवाली जाना पड़ता है। इस पर उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराने की सुविधा मिली हुई है। लोग घर बैठे ही मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। यदि कोई समस्या हो तो उन्हें तथा उच्चाधिकारियों को बता सकते हैं। समस्या का निराकरण कराया जाएगा।