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11 हजार मतदाता नही लड़ सकेंगे अब पंचायत चुनाव
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गोंडा। जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में से 1044 पंचायतों में ही इस बार मतदान होगा। दिसंबर 29 तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण की कार्रवाई पूरी होने से जनवरी-फरवरी में पंचायत चुनाव होने के अनुमान से चुनावी बिगुल गांवों में बज चुका है। अभी आरक्षण तय होने से लोग असमंजस में तो हैं लेकिन अपनी पकड़ मजबूत बनाने में जुटे हैं। इसी बीच निर्वाचन विभाग ने नगर क्षेत्र में तीन पंचायतों के मतदाताओं के शामिल होने से उनको पंचायत की मतदाता सूची से हटा दिया है। ऐसे में 11 हजार लोग अब न तो पंचायत का चुनाव लड़ सकेंगे और न ही मतदान कर सकेंगे। यह सभी लोग परसपुर नगर पंचायत से जुड़े तीन पंचायतों के हैं। विभाग ने मतदाता सूची से शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुके मतदाताओं को हटाकर सूची की प्रति तैयार कर ली है।
परसपुर नगर पंचायत के गठन से तीन पंचायतों का अंश शामिल हुआ है और उनके मतदाताओं को अब पंचायत की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। तीनों पंचायत के करीब 11 हजार मतदाता शहरी क्षेत्रों में होने के कारण बाहर हुए हैं। पंचायत में अब अवशेष बचे करीब सात हजार मतदाताओं की सूची तैयार कर बीएलओ को देने के लिए तय किया है। इस तरह इन तीनों पंचायतों के मतदाता सूची का भी पुनरीक्षण होगा और नए मतदाता तैयार कर आगे के चुनाव में गांव शामिल होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 सितंबर से निकाय में शामिल गांवों के मतदाताओं का परिसीमन करने का आदेश दिया था।
इसके बारे में निर्वाचन के अधिकारी पहले से ही तैयार थे। परसपुर नगर पंचायत में शामिल परसपुर गांव पंचायत से नौ हजार मतदाताओं के नाम शहरी में शामिल हुए हैं, उन्हें बाहर किया गया है। अभी यहां पर पांच हजार मतदाता अवशेष हैं। ऐसे में परसपुर ग्रामीण पंचायत का अस्तित्व है। इसी तरह आटा गांव से एक से हजार और चरहुंआ में एक हजार के करीब मतदाता ही निकाय में शामिल हुए हैं। आटा में अभी भी तीन हजार और चरहुआं में चार हजार के करीब मतदाता होंगे। आगे इन गांवों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी होगा, जिसमें नए वोटर बढ़ंगे। तीनों गांव पंचायतों में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा। इन तीनों में पंचायत चुनाव होने तय हैं। निर्वाचन विभाग के अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि पहले से ही तीनों पंचायतों की सूची ठीक कर ली गई थी।
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परिसीमन न होने से 149 गांवों के लोगों की उम्मीदें टूटीं
बीते वर्ष 2015 में परिसीमन होकर नवीन पंचायतों के गठन की कार्रवाई होनी थी। हुई भी थी 149 पंचायतों का प्रस्ताव तैयार हुआ था। लेकिन समय से प्रस्तावों को न भेजे जाने से गठन की स्वीकृति नहीं हो पाई थी और पंचायतों के गठन के लिए परिसीमन हर दस साल पर होना है। ऐसे में इस बार परिसीमन नहीं हो पाएगा, अभी पांच साल तक लोगों को नई पंचायतों में मतदान या चुनाव लड़ने के लिए इंतजार करना होगा। प्रदेश में गोंडा के साथ सिर्फ तीन जिलों का ही मामला फंसा है और तीन जिलों के कारण अब चुनाव में देर नहीं हो सकता है। वहीं आयोग के निर्देशों में पुनरीक्षण शुरू कर दिया गया है, ऐसे में नए पंचायतों के गठन पर कोई निर्णय होने की उम्मीद नहीं है।
नए मतदाताओं का नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था
नए मतदाता इस बार ऑनलाइन भी वोटर बन सकेंगे। बीएलओ एक अक्तूबर से 12 नवंबर तक बूथवार मतदाता बनाने का अभियान चलाएंगे। इसके अलावा किसी भी पंचायत का व्यक्ति मतदान के लिए एक अक्तूबर से 5 नवंबर तक आवेदन कर सकेंगे। आनलाइन आवेदन के बाद ही 6 से 12 नवंबर तक बीएलओ घर-घर सत्यापन करेंगे। 5 दिसंबर को ड्राफ्ट तैयार होगा और इसका प्रकाशन 6 दिसंबर को होगा। 12 दिसंबर तक मतदाता सूची का निरीक्षण करके अपनी आपत्तियां दे सकेंगे। आपत्तियों का निस्तारण 13 से 19 दिसंबर तक होगा और 20 से 28 दिसंबर तक कार्रवाई पूरी करके मतदाता सूची तैयार करेंगे। 29 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा।
पूरी की जा रही पुनरीक्षण अभियान की कार्रवाई
पंचायत निर्वाचन के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान की कार्रवाई पूरी की जा रही है। नगर पंचायत में शामिल मतदाता अब पंचायत के मतदाता नहीं होंगे। पहली अक्तूबर से नए मतदाता अपना नाम शामिल करा सकेंगे। -उमेश कुमार, सहायक पंचायत निर्वाचन
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परसपुर नगर पंचायत के गठन से तीन पंचायतों का अंश शामिल हुआ है और उनके मतदाताओं को अब पंचायत की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। तीनों पंचायत के करीब 11 हजार मतदाता शहरी क्षेत्रों में होने के कारण बाहर हुए हैं। पंचायत में अब अवशेष बचे करीब सात हजार मतदाताओं की सूची तैयार कर बीएलओ को देने के लिए तय किया है। इस तरह इन तीनों पंचायतों के मतदाता सूची का भी पुनरीक्षण होगा और नए मतदाता तैयार कर आगे के चुनाव में गांव शामिल होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 सितंबर से निकाय में शामिल गांवों के मतदाताओं का परिसीमन करने का आदेश दिया था।
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इसके बारे में निर्वाचन के अधिकारी पहले से ही तैयार थे। परसपुर नगर पंचायत में शामिल परसपुर गांव पंचायत से नौ हजार मतदाताओं के नाम शहरी में शामिल हुए हैं, उन्हें बाहर किया गया है। अभी यहां पर पांच हजार मतदाता अवशेष हैं। ऐसे में परसपुर ग्रामीण पंचायत का अस्तित्व है। इसी तरह आटा गांव से एक से हजार और चरहुंआ में एक हजार के करीब मतदाता ही निकाय में शामिल हुए हैं। आटा में अभी भी तीन हजार और चरहुआं में चार हजार के करीब मतदाता होंगे। आगे इन गांवों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी होगा, जिसमें नए वोटर बढ़ंगे। तीनों गांव पंचायतों में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा। इन तीनों में पंचायत चुनाव होने तय हैं। निर्वाचन विभाग के अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि पहले से ही तीनों पंचायतों की सूची ठीक कर ली गई थी।
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परिसीमन न होने से 149 गांवों के लोगों की उम्मीदें टूटीं
बीते वर्ष 2015 में परिसीमन होकर नवीन पंचायतों के गठन की कार्रवाई होनी थी। हुई भी थी 149 पंचायतों का प्रस्ताव तैयार हुआ था। लेकिन समय से प्रस्तावों को न भेजे जाने से गठन की स्वीकृति नहीं हो पाई थी और पंचायतों के गठन के लिए परिसीमन हर दस साल पर होना है। ऐसे में इस बार परिसीमन नहीं हो पाएगा, अभी पांच साल तक लोगों को नई पंचायतों में मतदान या चुनाव लड़ने के लिए इंतजार करना होगा। प्रदेश में गोंडा के साथ सिर्फ तीन जिलों का ही मामला फंसा है और तीन जिलों के कारण अब चुनाव में देर नहीं हो सकता है। वहीं आयोग के निर्देशों में पुनरीक्षण शुरू कर दिया गया है, ऐसे में नए पंचायतों के गठन पर कोई निर्णय होने की उम्मीद नहीं है।
नए मतदाताओं का नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था
नए मतदाता इस बार ऑनलाइन भी वोटर बन सकेंगे। बीएलओ एक अक्तूबर से 12 नवंबर तक बूथवार मतदाता बनाने का अभियान चलाएंगे। इसके अलावा किसी भी पंचायत का व्यक्ति मतदान के लिए एक अक्तूबर से 5 नवंबर तक आवेदन कर सकेंगे। आनलाइन आवेदन के बाद ही 6 से 12 नवंबर तक बीएलओ घर-घर सत्यापन करेंगे। 5 दिसंबर को ड्राफ्ट तैयार होगा और इसका प्रकाशन 6 दिसंबर को होगा। 12 दिसंबर तक मतदाता सूची का निरीक्षण करके अपनी आपत्तियां दे सकेंगे। आपत्तियों का निस्तारण 13 से 19 दिसंबर तक होगा और 20 से 28 दिसंबर तक कार्रवाई पूरी करके मतदाता सूची तैयार करेंगे। 29 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा।
पूरी की जा रही पुनरीक्षण अभियान की कार्रवाई
पंचायत निर्वाचन के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान की कार्रवाई पूरी की जा रही है। नगर पंचायत में शामिल मतदाता अब पंचायत के मतदाता नहीं होंगे। पहली अक्तूबर से नए मतदाता अपना नाम शामिल करा सकेंगे। -उमेश कुमार, सहायक पंचायत निर्वाचन