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बाहरी लोगों के हाथों में सरकारी दस्तावेज
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2015 11:29 PM IST
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किसी सरकारी दफ्तर में बाहरी लोग कर्मचारी बन कर कार्य कर रहे हों तो ऐसी व्यवस्था पर आप कैसा महसूस करेंगे। जिले की सदर तहसील कार्यालय में सरकारी अभिलेख प्राइवेट लोगों के हाथ में है। गैर जिम्मेदारों की लापरवाही से तहसील सदर में कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।
यहीं नही भू अभिलेखों में बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नामांतरण व फेरबदल करने का मामला सामने आ सकता है। तहसील से खतौनी, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र निकालने व राजस्व वादों के निपटारे के लिए बाहरी लोगों से वसूली कराई जा रही है।
जिले की सदर तहसील में उप जिलाधिकारी, तहसीलदार व नायब तहसीलदार का दफ्तर है। ये तीनों प्रशासनिक अफसर यहां बैठते हैं। इन अफसरों की नाक के नीचे बाहरी लोगों के कथित कर्मचारी बनकर अभिलेखों का काम, रखरखाव व अवैध तरीके से किसानों व वादकारियों से वसूली करने की अंधेरगर्दी काफी समय से चल रही है।
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देखने वाली गंभीर बात यह है कि ये कर्मचारी ऐसे कार्य कर रहे हैं, जिससे लगता ही नहीं है कि ये लोग बाहरी हैं। इतना ही नहीं इन कथित कर्मचारियों में कई तो बाकायदा एसडीएम व नायब तहसीलदार के न्यायालय पटल पर कथित पेशकार की भूमिका में कार्य करते हैं।
बाहरी लोग तहसील के संवेदनशील दस्तावेजों का कार्य कर रहे हैं। बाहरी गैर जिम्मेदारों के कार्य से कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। बताया जाता है कि अधिकारियों की सह पर विभाग के चालाक कर्मचारियों की ओर से बाहरी लोगों को लगाया गया है।
इससे विभाग के चालाक कर्मचारी अभिलेखों में फेरबदल व हेराफेरी कर लोगों को परेशान कर उनसे धन की उगाही करते हैं। वहीं कंप्यूटर कक्ष में बाहरी लोगों को लगा कर खतौनी में 15 रुपये की जगह 20 से 30 रुपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
इसके अलावा राजस्व खातों के नामांतरण, भूमि का बंधक आदि का काम भी बाहरी लोगों से कराया जा रहा है। इस बाबत हाल ही में विभाग के एक लिपिक की ओर डीएम से शिकायत भी की गई है। बाहरी लोगों के कार्य करने की वजह से ही कुछ साल पहले तरबगंज तहसील अभिलेखागार में आग लगने से तमाम अभिलेख जल गए थे।
इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या होगा कि एसडीएम व नायब तहसीलदार के न्यायालय पटल पर भी बाबू के रूप में बाहरी लोग कार्य कर रहे हैं। बताया जाता है कि एसडीएम न्यायालय पर राजस्व वाद का कार्य अर्जन नाम का व्यक्ति देख रहा है, जबकि अपराध के मामलों के वाद की फाइल राकेश देख रहा है।
ये दोनों व्यक्ति बाहरी हैं। जो रोजाना आकर एसडीएम कोर्ट पर बैठ कर मामलों की सुनवाई का कार्य करवाते हैं। इसी तरह नायब तहसीलदार धानेपुर का पटल बाबू घनश्याम है, जबकि नायब तहसीलदार गोंडा का पटल बाबू का कार्य रामफेर कर रहा है। ये दोनों कथित बाबू भी बाहरी हैं।
राजस्व लिपिक कार्यालय में दो बाहरी लोग बाबू की तरह कार्य रहे हैं। एक तो भुलावन और दूसरा मास्टर है। दोनों व्यक्ति मालबाबू के कार्य का निस्पादन करवाते हैं। इस कार्यालय में आय व जाति प्रमाण पत्र बनवाया जाता है। सोमवार को दोनों व्यक्ति कर्मचारी के साथ समानांतर कार्य कर रहे थे।
तहसील सदर के राजस्व अभिलेखागार में ललित व ननकऊ नाम के दो बाहरी व्यक्ति कार्य कर रहे हैं। गोपनीय अभिलेख का रखरखाव का भी कार्य कर रहे हैं। इस कार्यालय में अभिलेखों का मुआयना, नये दस्तावेज का इंद्राज व नामांतरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं।
कंप्यूटर कक्ष में तो एक-दो विभाग के कर्मचारियों के अलावा आधा दर्जन बाहरी लोगों ने काम संभाल रखी है। यहां पर महेश शुक्ला नाम का व्यक्ति कंप्यूटर चला रहा है। पंकज, संदीप कंप्यूटर से खतौनी निकालने के अलावा पैसा वसूल करते हैं।
इतने सारे बाहरी लोग विभाग में काम क्यों कर रहे हैं और इन्हें पैसा कहां से दिया जा रहा है। बताया जाता है कि यहां आने वाले किसानों व वादकारियों से अवैध तरीके से धन की वसूली की जा रही है। 15 रुपये की खतौनी 20 व 30 रुपये में दी जा रही है। ऐसे अन्य कार्यों में भी वसूली की जा रही है। इसी में अभी हाल ही में एसडीएम के अपने कर्मचारी से 20 हजार रुपये हर माह देने व अन्य सुविधाओं की डिमांड करने पर कर्मचारी ने डीएम से शिकायत की है।
इस बाबत सदर तहसील के तहसीलदार राम सजीवन मौर्य ने सवाल का जवाब देने के बजाए उल्टे सवाल किया कि ये बात किसने बतायी है। कहीं विभाग के शिकायत करने वाले बाबू ने तो नहीं बताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसडीएम साहब ही बता सकेंगे। उधर, इस बाबत एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह से जब उनका पक्ष पूछा गया तो वह जवाब देने के बजाए भड़क गए। उन्होंने कहा कि यहां कौन बाहरी है कौन नही, इससे पहले क्यों नहीं लिखा।
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यहीं नही भू अभिलेखों में बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नामांतरण व फेरबदल करने का मामला सामने आ सकता है। तहसील से खतौनी, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र निकालने व राजस्व वादों के निपटारे के लिए बाहरी लोगों से वसूली कराई जा रही है।
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जिले की सदर तहसील में उप जिलाधिकारी, तहसीलदार व नायब तहसीलदार का दफ्तर है। ये तीनों प्रशासनिक अफसर यहां बैठते हैं। इन अफसरों की नाक के नीचे बाहरी लोगों के कथित कर्मचारी बनकर अभिलेखों का काम, रखरखाव व अवैध तरीके से किसानों व वादकारियों से वसूली करने की अंधेरगर्दी काफी समय से चल रही है।
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देखने वाली गंभीर बात यह है कि ये कर्मचारी ऐसे कार्य कर रहे हैं, जिससे लगता ही नहीं है कि ये लोग बाहरी हैं। इतना ही नहीं इन कथित कर्मचारियों में कई तो बाकायदा एसडीएम व नायब तहसीलदार के न्यायालय पटल पर कथित पेशकार की भूमिका में कार्य करते हैं।
बाहरी लोग तहसील के संवेदनशील दस्तावेजों का कार्य कर रहे हैं। बाहरी गैर जिम्मेदारों के कार्य से कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। बताया जाता है कि अधिकारियों की सह पर विभाग के चालाक कर्मचारियों की ओर से बाहरी लोगों को लगाया गया है।
इससे विभाग के चालाक कर्मचारी अभिलेखों में फेरबदल व हेराफेरी कर लोगों को परेशान कर उनसे धन की उगाही करते हैं। वहीं कंप्यूटर कक्ष में बाहरी लोगों को लगा कर खतौनी में 15 रुपये की जगह 20 से 30 रुपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
इसके अलावा राजस्व खातों के नामांतरण, भूमि का बंधक आदि का काम भी बाहरी लोगों से कराया जा रहा है। इस बाबत हाल ही में विभाग के एक लिपिक की ओर डीएम से शिकायत भी की गई है। बाहरी लोगों के कार्य करने की वजह से ही कुछ साल पहले तरबगंज तहसील अभिलेखागार में आग लगने से तमाम अभिलेख जल गए थे।
इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या होगा कि एसडीएम व नायब तहसीलदार के न्यायालय पटल पर भी बाबू के रूप में बाहरी लोग कार्य कर रहे हैं। बताया जाता है कि एसडीएम न्यायालय पर राजस्व वाद का कार्य अर्जन नाम का व्यक्ति देख रहा है, जबकि अपराध के मामलों के वाद की फाइल राकेश देख रहा है।
ये दोनों व्यक्ति बाहरी हैं। जो रोजाना आकर एसडीएम कोर्ट पर बैठ कर मामलों की सुनवाई का कार्य करवाते हैं। इसी तरह नायब तहसीलदार धानेपुर का पटल बाबू घनश्याम है, जबकि नायब तहसीलदार गोंडा का पटल बाबू का कार्य रामफेर कर रहा है। ये दोनों कथित बाबू भी बाहरी हैं।
राजस्व लिपिक कार्यालय में दो बाहरी लोग बाबू की तरह कार्य रहे हैं। एक तो भुलावन और दूसरा मास्टर है। दोनों व्यक्ति मालबाबू के कार्य का निस्पादन करवाते हैं। इस कार्यालय में आय व जाति प्रमाण पत्र बनवाया जाता है। सोमवार को दोनों व्यक्ति कर्मचारी के साथ समानांतर कार्य कर रहे थे।
तहसील सदर के राजस्व अभिलेखागार में ललित व ननकऊ नाम के दो बाहरी व्यक्ति कार्य कर रहे हैं। गोपनीय अभिलेख का रखरखाव का भी कार्य कर रहे हैं। इस कार्यालय में अभिलेखों का मुआयना, नये दस्तावेज का इंद्राज व नामांतरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं।
कंप्यूटर कक्ष में तो एक-दो विभाग के कर्मचारियों के अलावा आधा दर्जन बाहरी लोगों ने काम संभाल रखी है। यहां पर महेश शुक्ला नाम का व्यक्ति कंप्यूटर चला रहा है। पंकज, संदीप कंप्यूटर से खतौनी निकालने के अलावा पैसा वसूल करते हैं।
इतने सारे बाहरी लोग विभाग में काम क्यों कर रहे हैं और इन्हें पैसा कहां से दिया जा रहा है। बताया जाता है कि यहां आने वाले किसानों व वादकारियों से अवैध तरीके से धन की वसूली की जा रही है। 15 रुपये की खतौनी 20 व 30 रुपये में दी जा रही है। ऐसे अन्य कार्यों में भी वसूली की जा रही है। इसी में अभी हाल ही में एसडीएम के अपने कर्मचारी से 20 हजार रुपये हर माह देने व अन्य सुविधाओं की डिमांड करने पर कर्मचारी ने डीएम से शिकायत की है।
इस बाबत सदर तहसील के तहसीलदार राम सजीवन मौर्य ने सवाल का जवाब देने के बजाए उल्टे सवाल किया कि ये बात किसने बतायी है। कहीं विभाग के शिकायत करने वाले बाबू ने तो नहीं बताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसडीएम साहब ही बता सकेंगे। उधर, इस बाबत एसडीएम सदर नरेंद्र सिंह से जब उनका पक्ष पूछा गया तो वह जवाब देने के बजाए भड़क गए। उन्होंने कहा कि यहां कौन बाहरी है कौन नही, इससे पहले क्यों नहीं लिखा।