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अब साढ़े तीन लाख मासूमों के पेट पर चोट, बेंचा जा रहा पौष्टिक आहार
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गोंडा में बिक्री के लिए ले जाया जा रहा पुष्टाहार।
- फोटो : GONDA
गोंडा। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के एमडीएम अनाज की बंदरबाट से जुड़े अनाज माफियाओं की नजर अब तीन माह से छह साल के आयु वर्ग के मासूमों के निवाले पर लग गयी है।
दो दिन पहले परसपुर के एक गांव में रात दस बजे के करीब एक आंगनबाड़ी केंद्र से सरकार द्वारा मासूमों को मुफ्त में वितरित किए जाने वाला पौष्टिक आहार बेचने के बाजार ले जाते समय ग्रामीणों ने पकड़ा।
इसकी शिकायत 112 नंबर पर पुलिस को करने के बाद भी पुलिस धंधेबाजों के दबाव में दिखी। इसके चलते ही ग्रामीणों की तहरीर के बाद भी पुलिस कार्रवाई की जगह मामले को रफा दफा करने में जुटी रही।
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जिले में तीन माह से छह साल आयु वर्ग के बच्चों की संख्या करीब 3.60 लाख है। इन बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 3095 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन मासूमों में 24721 बच्चे कुपोषित हैं। 11732 बच्चे अति कुपोषित हैं।
3.13 लाख बच्चे ग्रीन लेवल यानि सामान्य हैं। इन बच्चों को कुपोषण की काली छाया न पड़े इसके लिए सरकार हर साल लाखों का खर्च पौष्टिक आहार के वितरण पर करती है।
इसके साथ ही धात्री व गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए भी पौष्टिक आहार खिलाने की व्यवस्था इन केंद्रों पर रहती है। लेकिन यह आहार जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले बाजार में मोटे दाम पर बेच कर जेब भरी जाती है।
कुछ कार्यकर्त्रियों व सहायिकाओं की मिलीभगत से अनाज माफिया मासूमों के निवाले को बेचकर फल फूल रहे हैं। परसपुर ब्लाक के करनपुर गांव में गोपाल स्वयं सहायता समूह संचालित है जिसे आहार वितरण की जिम्मेदारी मिली है।
जुलाई माह में यहां कागजों में वितरण दिखाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सुपरवाइजर ने समूह पर दबाव बनाकर सामान को कालाबाजारी में बेचने का प्रयास किया। बीती 16 जुलाई को रात दस बजे आंगनबाड़ी केंद्र से ठेले पर सामान लाद कर जब बेचने के लिए ले जाया जा रहा था तो समूह के सदस्यों व ग्रामीणों ने इसे पकड़ लिया।
मामले की शिकायत 112 नंबर पर सीधे पुलिस को दी। समूह के सदस्य व ग्राम प्रधान की ओर से इस मामले की तहरीर पुलिस थाने में भी दी गयी लेकिन कार्रवाई को छोड़ पुलिस पूरे मामले को ही रफा दफा करने में जुटी दिखी।
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दो दिन पहले परसपुर के एक गांव में रात दस बजे के करीब एक आंगनबाड़ी केंद्र से सरकार द्वारा मासूमों को मुफ्त में वितरित किए जाने वाला पौष्टिक आहार बेचने के बाजार ले जाते समय ग्रामीणों ने पकड़ा।
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इसकी शिकायत 112 नंबर पर पुलिस को करने के बाद भी पुलिस धंधेबाजों के दबाव में दिखी। इसके चलते ही ग्रामीणों की तहरीर के बाद भी पुलिस कार्रवाई की जगह मामले को रफा दफा करने में जुटी रही।
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जिले में तीन माह से छह साल आयु वर्ग के बच्चों की संख्या करीब 3.60 लाख है। इन बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 3095 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन मासूमों में 24721 बच्चे कुपोषित हैं। 11732 बच्चे अति कुपोषित हैं।
3.13 लाख बच्चे ग्रीन लेवल यानि सामान्य हैं। इन बच्चों को कुपोषण की काली छाया न पड़े इसके लिए सरकार हर साल लाखों का खर्च पौष्टिक आहार के वितरण पर करती है।
इसके साथ ही धात्री व गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए भी पौष्टिक आहार खिलाने की व्यवस्था इन केंद्रों पर रहती है। लेकिन यह आहार जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले बाजार में मोटे दाम पर बेच कर जेब भरी जाती है।
कुछ कार्यकर्त्रियों व सहायिकाओं की मिलीभगत से अनाज माफिया मासूमों के निवाले को बेचकर फल फूल रहे हैं। परसपुर ब्लाक के करनपुर गांव में गोपाल स्वयं सहायता समूह संचालित है जिसे आहार वितरण की जिम्मेदारी मिली है।
जुलाई माह में यहां कागजों में वितरण दिखाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सुपरवाइजर ने समूह पर दबाव बनाकर सामान को कालाबाजारी में बेचने का प्रयास किया। बीती 16 जुलाई को रात दस बजे आंगनबाड़ी केंद्र से ठेले पर सामान लाद कर जब बेचने के लिए ले जाया जा रहा था तो समूह के सदस्यों व ग्रामीणों ने इसे पकड़ लिया।
मामले की शिकायत 112 नंबर पर सीधे पुलिस को दी। समूह के सदस्य व ग्राम प्रधान की ओर से इस मामले की तहरीर पुलिस थाने में भी दी गयी लेकिन कार्रवाई को छोड़ पुलिस पूरे मामले को ही रफा दफा करने में जुटी दिखी।