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अब नारी शिक्षा चौपाल के बजट में घोटाला
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गोंडा। बेसिक शिक्षा के शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की मुहिम के बजट में गोलमाल की आशंका बढ़ गई है। कई प्रशिक्षणों को एकसाथ निपटाने के खेल में कई बीईओ की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 17 केंद्रों पर होने वाली नारी शिक्षा चौपाल में भी खेल हुआ है।
खानापूर्ति करके बजट हड़पे जाने के संकेत मिले हैं। नारी शिक्षा चौपाल के लिए पांच लाख दस हजार रुपये का बजट विभाग ने दिया था। बजट खर्च कर लिया गया, लेकिन अभी तक विभाग को हिसाब ही नहीं दिया गया है। इस पर 17 खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। खर्च का ब्यौरा न देने पर अब जांच कराने की तैयारी है।
बीते वित्तीय वर्ष में बेसिक शिक्षा में प्रशिक्षणों का दौर लंबे समय तक चला। 10 मार्च तक चुनाव होने के कारण प्रशिक्षण देर से शुरू हुए और एकसाथ कई कार्यक्रमों का बजट खर्च किया जा चुका था। ऐसे में 31 मार्च के पहले-पहले एकसाथ ही कई प्रशिक्षण व आयोजन करके बजट का खर्च दिखाए जाने के संकेत मिले हैं।
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विभाग की ओर से भेजे गये बजट में नारी शिक्षा चौपाल के लिए प्रत्येक बीआरसी व यूआरसी को 30-30 हजार रुपये का बजट दिया गया था। इसके तहत 17 केंद्रों पर कार्यक्रम के लिए पांच लाख दस हजार रुपये का बजट मिला। आनन-फानन नारी शिक्षा चौपाल भी करा दी गईं। जिस हिसाब से आयोजन होने चाहिए थे, उस तरह नहीं होने की बात सामने आई है। यही कारण है कि अब खंड शिक्षा अधिकारी हिसाब नहीं दे पा रहे हैं। बीएसए की ओर से कई बार उपभोग मांगे गये, लेकिन पांच लाख 10 हजार रुपये के हिसाब पर अधिकारी कुंडली मारे बैठे हैं। ऐसे में अब कार्रवाई शुरू हुई है।
जिले में शिक्षक प्रशिक्षण के लिए भी बजट दिए गये थे। जेंडर एक्टिविटी के तहत सभी जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों और हर ब्लॉक के 13-13 प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना था। इसमें 902 जूनियर हाईस्कूल और 210 प्राइमरी स्कूलों को मिलाकर 1,112 स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। इसमें प्रत्येक शिक्षक पर खर्च के लिए 200-200 रुपये दिए गये। जिसमें दो लाख 22 हजार 400 रुपये का बजट दिया गया। अब इस प्रशिक्षण पर हुए खर्च का हिसाब देने में भी खंड शिक्षा अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण के मद में भेजे गये कई अन्य मदों में भी गोलमाल हुआ है। जिसे लेकर ब्लॉक के शिक्षा अफसर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
बेसिक शिक्षकों के प्रशिक्षण में ब्लॉक के अफसरों ने 31 मार्च के पहले बड़े स्तर पर हाथ की सफाई दिखाई। बस चूक ये कर दी कि प्रशिक्षण पर हुए खर्च का हिसाब देने में तेजी नहीं दिखा पाए। इससे विभाग की फजीहत हो रही है। बेवजह विभाग की जवाबदेही तय होने की संभावना बनती है और वित्तीय मामला होने के कारण गड़बड़ी की संभावना भी बनी रहती है। बीते साल ही कस्तूरबा गांधी स्कूलों में च्वयनप्राश और बोर्नबीटा सप्लाई के खेल से विभाग की जवाबदेही शासन स्तर पर बनी थी। कई कार्रवाईयां भी हुईं, इसके बाद भी समय से हिसाब नहीं देना चौंकाने वाला है।
बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों से बजट का हिसाब मांगा गया है। 17 बीईओ को चेतावनी दी गई है। समय से बजट का हिसाब नहीं दिया तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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खानापूर्ति करके बजट हड़पे जाने के संकेत मिले हैं। नारी शिक्षा चौपाल के लिए पांच लाख दस हजार रुपये का बजट विभाग ने दिया था। बजट खर्च कर लिया गया, लेकिन अभी तक विभाग को हिसाब ही नहीं दिया गया है। इस पर 17 खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। खर्च का ब्यौरा न देने पर अब जांच कराने की तैयारी है।
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बीते वित्तीय वर्ष में बेसिक शिक्षा में प्रशिक्षणों का दौर लंबे समय तक चला। 10 मार्च तक चुनाव होने के कारण प्रशिक्षण देर से शुरू हुए और एकसाथ कई कार्यक्रमों का बजट खर्च किया जा चुका था। ऐसे में 31 मार्च के पहले-पहले एकसाथ ही कई प्रशिक्षण व आयोजन करके बजट का खर्च दिखाए जाने के संकेत मिले हैं।
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विभाग की ओर से भेजे गये बजट में नारी शिक्षा चौपाल के लिए प्रत्येक बीआरसी व यूआरसी को 30-30 हजार रुपये का बजट दिया गया था। इसके तहत 17 केंद्रों पर कार्यक्रम के लिए पांच लाख दस हजार रुपये का बजट मिला। आनन-फानन नारी शिक्षा चौपाल भी करा दी गईं। जिस हिसाब से आयोजन होने चाहिए थे, उस तरह नहीं होने की बात सामने आई है। यही कारण है कि अब खंड शिक्षा अधिकारी हिसाब नहीं दे पा रहे हैं। बीएसए की ओर से कई बार उपभोग मांगे गये, लेकिन पांच लाख 10 हजार रुपये के हिसाब पर अधिकारी कुंडली मारे बैठे हैं। ऐसे में अब कार्रवाई शुरू हुई है।
जिले में शिक्षक प्रशिक्षण के लिए भी बजट दिए गये थे। जेंडर एक्टिविटी के तहत सभी जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों और हर ब्लॉक के 13-13 प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना था। इसमें 902 जूनियर हाईस्कूल और 210 प्राइमरी स्कूलों को मिलाकर 1,112 स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। इसमें प्रत्येक शिक्षक पर खर्च के लिए 200-200 रुपये दिए गये। जिसमें दो लाख 22 हजार 400 रुपये का बजट दिया गया। अब इस प्रशिक्षण पर हुए खर्च का हिसाब देने में भी खंड शिक्षा अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण के मद में भेजे गये कई अन्य मदों में भी गोलमाल हुआ है। जिसे लेकर ब्लॉक के शिक्षा अफसर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
बेसिक शिक्षकों के प्रशिक्षण में ब्लॉक के अफसरों ने 31 मार्च के पहले बड़े स्तर पर हाथ की सफाई दिखाई। बस चूक ये कर दी कि प्रशिक्षण पर हुए खर्च का हिसाब देने में तेजी नहीं दिखा पाए। इससे विभाग की फजीहत हो रही है। बेवजह विभाग की जवाबदेही तय होने की संभावना बनती है और वित्तीय मामला होने के कारण गड़बड़ी की संभावना भी बनी रहती है। बीते साल ही कस्तूरबा गांधी स्कूलों में च्वयनप्राश और बोर्नबीटा सप्लाई के खेल से विभाग की जवाबदेही शासन स्तर पर बनी थी। कई कार्रवाईयां भी हुईं, इसके बाद भी समय से हिसाब नहीं देना चौंकाने वाला है।
बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों से बजट का हिसाब मांगा गया है। 17 बीईओ को चेतावनी दी गई है। समय से बजट का हिसाब नहीं दिया तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।