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जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं वैक्सीन, बाहर खर्च करने पड़ते 2 हजार रुपये
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गोंडा। करीब एक महीने से जिला अस्पताल सहित कई प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) उपलब्ध नहीं है। इससे प्रतिदिन कुत्ता, बंदर, बिल्ली व अन्य जानवरों द्वारा काटे जाने पर अस्पताल आने वाले 80 से 100 मरीजों को काफी दिक्कत होती है। बाजार से इंजेक्शन खरीदने के लिए दो हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
जनपद के कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो कई वर्षों से वैक्सीन आई ही नहीं। मंगलवार को जिला अस्पताल में सुदूर गांवों से आये करीब तीन दर्जन से अधिक मरीजों को वापस लौटना पड़ा। अस्पताल के इंजेक्शन कक्ष में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने का नोटिस चस्पा कर दिया गया है। वहीं पर्चा बनवाते समय ही वैक्सीन उपलब्ध न होने की बात बता दी जाती है। मजबूरी में मरीजों को बाजार से महंगे दामों में एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीदना पड़ता है।
खास बात ये है कि इंजेक्शनों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों के चिकित्सक व मरीज दोनों ही परेशान हैं। पंडरी कृपाल के चंद्रकेतु मिश्र ने बताया कि कुत्ते के काटने पर जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने आये थे लेकिन पर्चा काउंटर से वापस कर दिया गया। विकास सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण बाहर 2000 रुपये खर्च करने पड़े। दुर्गेश पांडेय ने बताया कि बंदर के काटने पर उन्हें बाजार से महंगे दामों में वैक्सीन खरीदना पड़ा।
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कुत्ता, बन्दर, बिल्ली आदि जानवरों के काटने पर लगने वाली एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए बाजार में 2000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नियमानुसार पांच इंजेक्शन का कोर्स होता है जिसमें प्रत्येक इंजेक्शन की कीमत 350 रुपये बताई जा रही है। वहीं 50 रुपया इंजेक्शन लगाने का शुल्क लिया जाता है। पहला इंजेक्शन 72 घंटो के अंदर तथा दूसरा, तीसरा, चौथा व पांचवां इंजेक्शन क्रमश: तीसरे, पांचवें, सातवें व 15वें दिन लगवाया जाता है।
जनपद के कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं जहां कई वर्षों से एंटी रैबीज वैक्सीन आई ही नहीं। बालपुर व मसकनवा में पिछले कई वर्षों वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिससे मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलसर, काजीदेवर, मनिकापुर, छपिया आदि जगहों पर महीने भर से वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
जिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस डॉ इंदुबाला ने बताया कि अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिससे मरीजों व डॉक्टरों को असुविधा हो रही है। लखनऊ से सप्लाई ही नहीं आ रही है। कई बार मांग की गई।
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जनपद के कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो कई वर्षों से वैक्सीन आई ही नहीं। मंगलवार को जिला अस्पताल में सुदूर गांवों से आये करीब तीन दर्जन से अधिक मरीजों को वापस लौटना पड़ा। अस्पताल के इंजेक्शन कक्ष में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने का नोटिस चस्पा कर दिया गया है। वहीं पर्चा बनवाते समय ही वैक्सीन उपलब्ध न होने की बात बता दी जाती है। मजबूरी में मरीजों को बाजार से महंगे दामों में एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीदना पड़ता है।
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खास बात ये है कि इंजेक्शनों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों के चिकित्सक व मरीज दोनों ही परेशान हैं। पंडरी कृपाल के चंद्रकेतु मिश्र ने बताया कि कुत्ते के काटने पर जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने आये थे लेकिन पर्चा काउंटर से वापस कर दिया गया। विकास सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण बाहर 2000 रुपये खर्च करने पड़े। दुर्गेश पांडेय ने बताया कि बंदर के काटने पर उन्हें बाजार से महंगे दामों में वैक्सीन खरीदना पड़ा।
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कुत्ता, बन्दर, बिल्ली आदि जानवरों के काटने पर लगने वाली एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए बाजार में 2000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नियमानुसार पांच इंजेक्शन का कोर्स होता है जिसमें प्रत्येक इंजेक्शन की कीमत 350 रुपये बताई जा रही है। वहीं 50 रुपया इंजेक्शन लगाने का शुल्क लिया जाता है। पहला इंजेक्शन 72 घंटो के अंदर तथा दूसरा, तीसरा, चौथा व पांचवां इंजेक्शन क्रमश: तीसरे, पांचवें, सातवें व 15वें दिन लगवाया जाता है।
जनपद के कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं जहां कई वर्षों से एंटी रैबीज वैक्सीन आई ही नहीं। बालपुर व मसकनवा में पिछले कई वर्षों वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिससे मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलसर, काजीदेवर, मनिकापुर, छपिया आदि जगहों पर महीने भर से वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
जिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस डॉ इंदुबाला ने बताया कि अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिससे मरीजों व डॉक्टरों को असुविधा हो रही है। लखनऊ से सप्लाई ही नहीं आ रही है। कई बार मांग की गई।