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कस्तूरबा गांधी स्कूल के गोलमाल में कई अफसर फंसे

Thu, 01 Jul 2021 10:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jul 2021 10:09 PM IST
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Many officers trapped in irregularities in Kasturba Gandhi School
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग में 97 लाख का बजट बिना छात्राओं के स्कूल आए ही खर्च करने के मामले में कार्रवाई के आसार बढ़ गए हैं। पिछले शैक्षिक सत्र में जिलों के 17 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में भोजन, मेडिकल केयर/ कंटीजेंसी तथा स्टेशनरी व शिक्षण सामग्री के मदों में 96.98 लाख रुपये की धनराशि बिना छात्राओं की उपस्थिति के ही खर्च कर लिए गए थे।
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इसकी जांच सीडीओ ने करवा कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी। माना जा रहा है कि मामले में बीएसए, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी व जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की जिम्मेदारी तय की जा रही है। देर सबेर कार्रवाई होनी तय है।
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शासन ने जिले में नए बीएसए की तैनाती कर दी है। डायट बाराबंकी की वरिष्ठ प्रवक्ता दीपिका चतुर्वेदी को जिले में बीएसए बनाया गया है। वह पहले श्रावस्ती व कन्नौज में बीएसए रह चुकी हैं। इसी के साथ ही सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर भी नई तैनाती हो गई है।
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माना जा रहा है कि बृहस्पतिवार को नए सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी प्रभार ले सकते हैं। इसके बाद शासन से अनियमितता के मामले में कार्रवाई की तैयारी हो रही है। कस्तूरबा स्कूलों में अनियमित भुगतान के मामले में शासन स्तर से कार्रवाई की तैयारी होने से जिले में हलचल है।
कोरोना आपदा के कारण पिछले सत्र में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों को को बीते 10 जनवरी से खोलने के निर्देश दिए गए थे। केजीबीवी आवासीय विद्यालय हैं, हर स्कूल में जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर तबके की 100 छात्राएं रहकर कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई करती हैं।
केजीबीवी में छात्राओं के भोजन, मेडिकल केयर/ कंटीजेंसी तथा स्टेशनरी व शिक्षण सामग्री के मदों में खर्च के लिए दो महीने की धनराशि दी की गई थी। स्कूल तो खुले थे लेकिन छात्राओं की उपस्थिति कम ही हुई थी। इसके बाद भी केजीबीवी के लिए जारी की गई लगभग शत प्रतिशत धनराशि का इस्तेमाल कर लिया।
छात्राओं की उपस्थिति का कोई ब्यौरा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। यह स्थिति तब है, जब विभाग ने निर्देश दिया था कि प्रेरणा पोर्टल पर बालिकाओं की प्रतिदिन उपस्थिति के आधार पर ही जारी की गई धनराशि का भुगतान किया जाएगा।

सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बताया कि शासन के निर्देश के क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में भुगतान की जांच कराकर रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। ब्लॉक स्तर पर टीम बनाकर जांच कराई गई थी। जांच में खामियां सामने आईं थीं।
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