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Gonda News: जर्जर एचटी लाइन हटवाने के लिए कई और परिवार लगा रहे चक्कर
Mon, 13 Apr 2026 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 13 Apr 2026 11:12 PM IST
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गोंडा। पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत के बाद भी जर्जर एचटी लाइन का खतरा टला नहीं है। आसपास के कई परिवार सहमे हैं। ये सभी इस जानलेवा लाइन को हटवाने के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
मालूम हो कि जेल रोड विद्युत उपकेंद्र के साउथ फीडर की 11 केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरने से रंजीत की मौत हो गई थी। ये लाइन 30 साल से अधिक पुरानी बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह लाइन कई बार पहले भी टूटकर गिर चुकी है, लेकिन न तो इसे बदला गया और न ही हटाने की कोई ठोस पहल की गई।
पथवलिया निवासी सरेंद्र गौतम ने मुख्य अभियंता से शिकायत की है। उन्हें बताया कि उनके मकान से सटी इस जर्जर लाइन से कभी भी हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से तार जर्जर हालत में लटका है। कई बार शिकायत और प्रार्थनापत्र देने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है।
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पीड़ित परिवारों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी लाइन हटाने के लिए डिपॉजिट फंड जमा करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आम लोग अपनी सुरक्षा के लिए आर्थिक बोझ भी उठाने को मजबूर हैं।
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ का कहना है कि लाइन हटवाने के लिए लोग शिकायतें कर रहे हैं। अधीक्षण अभियंता को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं, लेकिन विभागीय नियमों के तहत शुल्क जमा करने के बाद ही लाइन हटाई जा सकती है।
कार्रवाई पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के महामंत्री रामकृपाल यादव ने विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारी संगठन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
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मालूम हो कि जेल रोड विद्युत उपकेंद्र के साउथ फीडर की 11 केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरने से रंजीत की मौत हो गई थी। ये लाइन 30 साल से अधिक पुरानी बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह लाइन कई बार पहले भी टूटकर गिर चुकी है, लेकिन न तो इसे बदला गया और न ही हटाने की कोई ठोस पहल की गई।
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पथवलिया निवासी सरेंद्र गौतम ने मुख्य अभियंता से शिकायत की है। उन्हें बताया कि उनके मकान से सटी इस जर्जर लाइन से कभी भी हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से तार जर्जर हालत में लटका है। कई बार शिकायत और प्रार्थनापत्र देने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है।
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पीड़ित परिवारों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी लाइन हटाने के लिए डिपॉजिट फंड जमा करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आम लोग अपनी सुरक्षा के लिए आर्थिक बोझ भी उठाने को मजबूर हैं।
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ का कहना है कि लाइन हटवाने के लिए लोग शिकायतें कर रहे हैं। अधीक्षण अभियंता को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं, लेकिन विभागीय नियमों के तहत शुल्क जमा करने के बाद ही लाइन हटाई जा सकती है।
कार्रवाई पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के महामंत्री रामकृपाल यादव ने विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारी संगठन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।