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Gonda News: शासन को भेजी गई मदरसा फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट

Wed, 15 Jan 2025 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Wed, 15 Jan 2025 11:42 PM IST
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Madrasa fraud investigation report sent to the government
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग। 
गोंडा। मदरसा आधुनिकीकरण योजना के फर्जीवाड़े में भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने बुधवार को शासन को रिपोर्ट भेज दी है। इसमें अब तक की जांच के साथ ही दर्ज कराई गई प्राथमिकी के तथ्य को शामिल किया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से अभिलेख न मिलने के कारण जांच में आई समस्या का भी जिक्र है।
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पुलिस ने शुरू की जांच
चार मार्च 2024 को चार्ज न देने के आरोप में अल्पसंख्यक कार्यालय के कनिष्ठ सहायक हेमंत पांडेय की ओर से कोतवाली नगर में तत्कालीन लिपिक शमीम अहमद के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। रोडवेज चौकी प्रभारी डीपी गौतम ने बताया कि संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई है कि मामले की पहले विभागीय स्तर पर कोई जांच कराई गई है या नहीं, अगर कराई गई है तो उसका पूरा विवरण उपलब्ध कराएं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2018 में लिपिक का तबादला हाेने के बाद चार्ज को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई गई, किस तरह की लिखा पढ़ी की गई, कितने पत्राचार किए गए, उसके क्या जवाब मिले।
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गोंडा में वर्ष 2013 से 2015 के मध्य मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत 357 मदरसों की फाइल तैयार करके निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को भेजी गई थी। जांच में 299 मदरसों का मूल डिस्पैच रजिस्टर से मिलान नहीं हो सका। स्थलीय सत्यापन में 126 मदरसे मौके पर मिले ही नहीं। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने चार मार्च 2018 को इसकी शिकायत की। 12 जनवरी को भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व वर्तमान में समाज कल्याण विभाग लखनऊ में उपनिदेशक के पद पर तैनात अमरजीत सिंह व तत्कालीन लिपिक शमीम अहमद के खिलाफ कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया।
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दफ्तर में पसरा रहा सन्नाटा

विकास भवन के द्वितीय तल पर स्थित अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के दफ्तर में बुधवार को सन्नाटा रहा। कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन वह कुछ बोलने को तैयार नहीं थे। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की कुर्सी खाली थी। बताया गया कि वह एनआईसी मीटिंग में गए हैं। हालांकि बाहर अन्य विभागों के कर्मचारी आपस में विभाग की कारगुजारी को लेकर चर्चा करते सुने गए।

चार वर्ष से चल रही बलरामपुर मदरसा फर्जीवाड़े की जांच
बलरामपुर। नियमों की अनदेखी कर 83 मदरसों को मान्यता देने और 65 लाख के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच 04 वर्षों से चल रही है। वर्ष 2020 में कोतवाली देहात में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कर रही है।


वर्ष 2020 में आयुक्त एसवीएस रंगाराव ने कार्रवाई तेज की थी। उन्होंने तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के निलंबन की संस्तुति करते हुए आवंटित बजट एवं व्यय की विशेष ऑडिट कराने की संस्तुति की थी, जिसमें जांच के बाद 65 लाख रुपये की छात्रवृत्ति घोटाला प्रकाश में आया। कोतवाली देहात में दर्ज मुकदमे में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व लिपिक आरोपी बनाए गए थे। विभागीय सूत्रों के अनुसार घोटाला सपा कार्यकाल में हुआ था।
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