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कृृषि कानूनों के वापसी से किसानों में खुशी, बोले संघर्ष की जीत हुई
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गोंडा। प्रधानमंत्री के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान से शुक्रवार को जिले के किसानों में खुशी है। लोग सोशल मीडिया पर खुशी का इजहार करते दिखाई पड़े। कई स्थानों पर किसान नेताओं ने मिठाई बांटकर अपनी जीत की खुशी जताई। जिले के किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की मांगे मानने में देरी जरूर की, लेकिन बिल वापसी के फैसले से उन्होंने किसानों का दिल जीत लिया है।
गांवों से लेकर मुख्यालय तक चाय की दुकानों, पान की गुमटियों पर किसान बिल वापसी की चर्चा गर्म रही। कोई विधान सभा चुनावों के कारण कृषि कानून वापस लेने की बात कहता है, तो कोई प्रधानमंत्री की दरियादिली बता रहा है। एलबीएस चौराहे पर स्थित सियाराम की चाय की दुुकान पर लोग कृषि कानून के वापसी को लेकर चर्चा करते दिखाई पड़े। लोगों का कहना था कि यहां के किसानों को कृषि कानून से कोई विशेष दिक्कत नहीं थी, लेकिन ऐसे ही किसान एकजुट रहेंगे तो सरकार का किसानों की आय दूना करने का संकल्प भी पूरा हो सकेगा।
बिल वापसी बोले किसान
जयप्रभा ग्राम के किसान आंदोलन में प्रतिभाग कर चुके भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी दिनेशधर द्विवेदी ने कहा कि आखिरकार किसानों का लोकतांत्रिक विरोध रंग लाया और सरकार को नए कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा। अब सरकार एमएसपी पर कानून लाकर किसानों का दिल जीत सकती है।
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पेडराही गांव के किसान राघवेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि सरकार ने कृषि बिल वापस लेकर सराहनीय कार्य किया है। सरकार की किसान विरोधी छवि से मुक्त होने का अवसर मिलेगा और देश के लोकतंत्र में लोगों की आस्था बढ़ेगी। हर कानून का अच्छा और बुरा दोनों पहलू होता है। सरकार को किसानों के सभी गुटों व वर्गों से बातकर सामान्य हित व लाभों के लिए नया कानून बनाना चाहिए। सभी किसान संतुष्ट हो सकें।
प्रधानमंत्री ने किसानों के हितों को देखकर दिया फैसला
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता के हितों के लिए कार्य करते हैं। किसानों की समस्या को देखते हुए तीन कृषि कानून वापस करने की घोषणा करके बड़ा कदम उठाया गया है। भाजपा सरकार में किसानों को काफी लाभ हुआ है। सरकार ने किसानों के फसल का उचित मूल्य देकर उनकी आय दुगनी की है। अमर किशोर कश्यप, भाजपा जिलाध्यक्ष
पहले घोषणा करते तो बच जाती कई किसानों की जान
प्रधानमंत्री मोदी को यह घोषणा पहले ही कर देते तो आंदोलन में भाग लेने वाले सैकड़ों किसानों की जानें बच जाती। प्रधानमंत्री जी को विधानसभा चुनावों में हार का डर सताने लगा तो किसानों की याद आई है। फिरहाल किसान सब जानता है। योगेश प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री समाजवादी पार्टी
चुनावी हथकंडा है कृषि कानून वापसी
प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनावों के कारण कृषि कानून वापसी का दांव खेला है। जबकि इसी सरकार के अड़ियल रवैया से सैकड़ो किसानों की जानें चली गई। अभी भी किसानों की फसल को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
सुरेश शुक्ल, जिलाध्यक्ष प्रगतिशील समाजवादी पार्टी
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गांवों से लेकर मुख्यालय तक चाय की दुकानों, पान की गुमटियों पर किसान बिल वापसी की चर्चा गर्म रही। कोई विधान सभा चुनावों के कारण कृषि कानून वापस लेने की बात कहता है, तो कोई प्रधानमंत्री की दरियादिली बता रहा है। एलबीएस चौराहे पर स्थित सियाराम की चाय की दुुकान पर लोग कृषि कानून के वापसी को लेकर चर्चा करते दिखाई पड़े। लोगों का कहना था कि यहां के किसानों को कृषि कानून से कोई विशेष दिक्कत नहीं थी, लेकिन ऐसे ही किसान एकजुट रहेंगे तो सरकार का किसानों की आय दूना करने का संकल्प भी पूरा हो सकेगा।
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बिल वापसी बोले किसान
जयप्रभा ग्राम के किसान आंदोलन में प्रतिभाग कर चुके भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी दिनेशधर द्विवेदी ने कहा कि आखिरकार किसानों का लोकतांत्रिक विरोध रंग लाया और सरकार को नए कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा। अब सरकार एमएसपी पर कानून लाकर किसानों का दिल जीत सकती है।
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पेडराही गांव के किसान राघवेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि सरकार ने कृषि बिल वापस लेकर सराहनीय कार्य किया है। सरकार की किसान विरोधी छवि से मुक्त होने का अवसर मिलेगा और देश के लोकतंत्र में लोगों की आस्था बढ़ेगी। हर कानून का अच्छा और बुरा दोनों पहलू होता है। सरकार को किसानों के सभी गुटों व वर्गों से बातकर सामान्य हित व लाभों के लिए नया कानून बनाना चाहिए। सभी किसान संतुष्ट हो सकें।
प्रधानमंत्री ने किसानों के हितों को देखकर दिया फैसला
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता के हितों के लिए कार्य करते हैं। किसानों की समस्या को देखते हुए तीन कृषि कानून वापस करने की घोषणा करके बड़ा कदम उठाया गया है। भाजपा सरकार में किसानों को काफी लाभ हुआ है। सरकार ने किसानों के फसल का उचित मूल्य देकर उनकी आय दुगनी की है। अमर किशोर कश्यप, भाजपा जिलाध्यक्ष
पहले घोषणा करते तो बच जाती कई किसानों की जान
प्रधानमंत्री मोदी को यह घोषणा पहले ही कर देते तो आंदोलन में भाग लेने वाले सैकड़ों किसानों की जानें बच जाती। प्रधानमंत्री जी को विधानसभा चुनावों में हार का डर सताने लगा तो किसानों की याद आई है। फिरहाल किसान सब जानता है। योगेश प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री समाजवादी पार्टी
चुनावी हथकंडा है कृषि कानून वापसी
प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनावों के कारण कृषि कानून वापसी का दांव खेला है। जबकि इसी सरकार के अड़ियल रवैया से सैकड़ो किसानों की जानें चली गई। अभी भी किसानों की फसल को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
सुरेश शुक्ल, जिलाध्यक्ष प्रगतिशील समाजवादी पार्टी