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गंदगी के बीच पसका सूकरखेत में कल्पवास आज से

Wed, 30 Dec 2020 10:29 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2020 10:29 PM IST
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Kalpavas in Sukkhet from today
गोंडा में परसपुर के पसका सूूखरखेत में सरयू तट पर फैली गंदगी। - फोटो : GONDA
परसपुर (गोंडा)। पौराणिक मान्यताओं को सहेजे भगवान वाराह की अवतार स्थली पसका सूकरखेत में एक मास का कल्पवास पौष प्रतिपदा यानि 31 दिसंबर से प्रारंभ हो जाएगा। पौष प्रतिपदा से पौष पूर्णिमा तक दूर दराज से आने वाले साधु, संत व गृहस्थ सरयू तट पर कुटिया डाल कर एक माह का कल्पवास करते हैं। इसके बाद पौष पूर्णिमा पर स्नान ध्यान के बाद कल्पवास समाप्त होता है। यहीं से कल्पवासी प्रयाग के लिए प्रस्थान कर जाते हैं जहां एक माह का कल्पवास करते हैं। पसका संगम के त्रिमुहानी घाट पर गंदगी व्याप्त है। साफ-सफाई न होने के कारण कल्पवासियों को समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है।
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पसका सूकरखेत का पौष पूर्णिमा मेला इस वर्ष 28 जनवरी को है। इस अवसर पर एक मास का कल्पवास पौष कृष्ण पक्ष प्रतिपदा 31 दिसंबर से प्रारंभ होने जा रहा है। इसमें स्थानीय सहित गैर प्रांत व गैर जनपदों के तमाम साधु-संत नागा-सन्यासी व गृहस्थ सांसारिक मोह माया से विरत रह कर भीषण ठंडक में सरयू की रेती में त्रिमुहानी घाट पर घास फूस की कुटिया डाल कर एक माह तक अपना नाता परब्रह्म परमेश्वर से जोड़ कर तपस्या (कल्पवास) कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। स्थली पर चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य व्याप्त है। त्रिमुहानी घाट के बाएं तरफ शव दाह गृह बनने के बावजूद लोग वहां दाह संस्कार न कर नदी घाट पर ही शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। घाट व नदी में अधजली लकड़ियां, बांस, कपड़ा व अन्य सामान चारों तरफ बिखरा पड़ा हुआ है। जिससे इस इलाके में गंदगी का साम्राज्य व्याप्त है। कल्पवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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भगवान ने लिया था वाराह का अवतार
परसपुर (गोंडा)। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने पृथ्वी को मुक्त कराने के लिये भगवान वाराह का रूप धारण किया था। इसलिये इस तपोस्थली को सूकरखेत या वाराह क्षेत्र भी कहा जाता है। इस धार्मिक स्थली को लोग स्वर्ग की भी संज्ञा देते हैं। इस स्थली पर बड़ी संख्या में नागा, साधु-सन्यासी व गृहस्थ कल्पवास, तपस्या कल्पवास में लीन रहेंगे।
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गोस्वामी तुलसी दास जी ने गुरु से ली थी दीक्षा
परसपुर (गोंडा)। मान्यता है कि पसका सूकरखेत राजापुर में रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म हुआ था। यहां तुलसीदास जी के गुरु नरहरिदास जी का आश्रम भी है। रामचरित मानस के बालकांड में इस स्थान का उल्लेख तुलसीदास जी ने किया है। कहते हैं गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस पुण्य भूमि पर अपने गुरु से दीक्षा ली थी। उनके गुरु के आश्रम में आज भी हस्तलिखित रामायण के पन्ने इस स्थली के ऐतिहासिकता की गवाही दे रहे हैं।

साफ सफाई का दिया निर्देश
खंड विकास अधिकारी को निर्देशित किया जाएगा। कि वें सफाई कर्मियों की ड्यूटी पसका में लगा कर कल्पवास स्थल व घाटों की साफ-सफाई कराना सुनिश्चित करें। साथ ही प्रभारी निरीक्षक थाना परसपुर को भी निर्देशित किया जाएगा। कि शवों का दाह संस्कार स्नान घाट व कल्पवास स्थल पर न हों। निर्धारित स्थान पर ही दाह संस्कार हो। -ज्ञान चंद गुप्ता, उपजिलाधिकारी, करनैलगंज
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