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मनरेगा पर कोरोना संकट का असर, पंचायतों में काम ठप्प

Mon, 17 May 2021 09:13 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 09:13 PM IST
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Impact of corona crisis on MNREGA, work stopped in panchayats
गोंडा। कोरोना संकट का असर पंचायतों के विकास कार्यों में भी देखने का मिल रहा है। 16 ब्लाकों के 1214 पंचायतों में मनरेगा का कार्य पूरी तरह प्रभावित है। इसमें कोरोना के साथ ही पंचायतों में प्रधानों के शपथ न होने और कार्य शुरू न होने का भी प्रभाव देखने को मिल रहा है।
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जिले में मई माह में ही 10 लाख से अधिक का मानव दिवस पूरा होना था। विभाग के आंकड़ों पर भरोसा करें तो एक लाख के करीब ही मानव दिवस सृजित हो पाए हैं। यहां तक 16 मई को कटरा बाजार व तरबगंज छोड़कर 14 ब्लॉकों में कोई काम ही नही हुआ है।
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मनरेगा से हर दिन श्रमिकों को रोजगार देना होता है। लाकडाउन में मनरेगा का कार्य और भी जरूरी है, जिससे लोगों को गांव में ही काम मिल सके। लेकिन जिले में मनरेगा के कार्य पूरी तरह ठप्प हैं। बीते 8 व 9 मई के आंकड़ों को देखें तो किसी भी ब्लाक में एक भी काम नही हुआ।
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इसी तरह 10 मई को भी नौ ब्लाकों में काम ठप्प रहा। 11 मई को भी सिर्फ छह ब्लाकों में मनरेगा से आंशिक कार्य हुए हैं। ऐसे ही हर दिन की रिपोर्ट है, पूरे ब्लाकों में अभी तक न तो काम शुरू हो पाया है और न ही अभी शुरू होने के आसार दिख रहे हैं। बीते 15 मई को पांच ब्लाक में काम हुए थे तो 16 मई को सिर्फ दो ब्लाकों में ही आंशिक कार्य हुए हैं।
इस तरह माना जा रहा है कि पंचायतों में मनरेगा का कार्य पूरी तरह ठप्प है और इससे दो लाख श्रमिकों को रोजगार मिलना संभव नही हो पा रहा है। मई माह में ही दस लाख के करीब मानव दिवसों का सृजन होना था, 17 मई बीतने को है और माह पूरा होने में सिर्फ 13 दिन शेष है। इसके बाद भी एक लाख के करीब ही मानव दिवस सृजित हो पाए हैं। नौ लाख मानव दिवसों का सृजन होना बाकी है। जो इस माह पूरे होते नही दिख रहे हैं।
मनरेगा में श्रमिकों को एक दिन काम करने पर 201 रुपये का भुगतान होता है। एक दिन एक श्रमिक कार्य करता है तो एक मानव दिवस माना जाता है। इस तरह एक परियोजना पर कम से कम 10 से 40 श्रमिक कार्य करते हैं। एक परियोजना से एक दिन में 10 से 40 मानव दिवस सृजित होते हैं।

पूरे जिले में 1214 पंचायतें हैं और यदि एक ही परियोजना एक पंचायत में संचालित होती हैं तो 12 हजार से 50 हजार के करीब मानव दिवस रोज सृजित होंगे। इस तरह साल भर में 50 लाख से 60 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा जाता है और करीब दो लाख श्रमिकों में एक से डेढ़ लाख श्रमिकों को मनरेगा से उनके गांव में ही रोजगार मिलता है। हर श्रमिक को 100 दिन का रोजगार मिल सकता है।
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