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अभद्रता: फर्श पर पड़ी दर्द से कराहती महिला से डॉक्टर बोले- बर्दाश्त करो या फिर बाहर से इलाज करवाओ

Sat, 06 Aug 2022 05:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज़ एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज़ एजेंसी, गोंडा Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 06 Aug 2022 05:01 PM IST
सार

डॉक्टरों की संवेदनहीनता मरीजों के लिए मुश्किल खड़ी कर रही है। एक तो अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा है ऊपर से डॉक्टर भी अभद्रता करने में पीछे नहीं हैं।

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Doctors did not help woman who was suffering from labour pain in woman hospital in Gonda.
महिला अस्पताल में फर्श पर लेटे हुए दर्द से कराहती रही। - फोटो : GONDA

विस्तार

तमाम नसीहत के बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ हो रहा अभद्र व्यवहार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसका एक नजारा शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में देखने को मिला। इस दौरान दर्द से कराहती एक गर्भवती को भर्ती करने की जगह डॉक्टर ने देखने के बाद फर्श पर ही तड़पता छोड़ दिया। काफी चिरौरी करने पर डॉक्टर ने पीड़िता को दर्द बर्दाश्त करने अथवा बाहर से इलाज करवाने की नसीहत देकर किनारा कस लिया।
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जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के पास तरबगंज के परसदा निवासी पिंकी फर्श पर लेटी प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। गर्भवती का दर्द देखकर साथ मौजूद परिजन रोने लगे। इससे आस पास दूसरे अन्य तीमारदारों की भीड़ लग गई। इस दौरान वहां मौजूद कई स्वास्थ्य कर्मी सिर्फ तमाशबीन बने दिखे। पिंकी के साथ आई आशा कर्मी सुषमा ने बताया कि उसका दर्द सुबह से बढ़ जाने पर अस्पताल लाकर डॉ. सौम्या चौबे को दिखाया गया था। डॉक्टर ने उसका परीक्षण कर बताया कि अभी आठवां महीना ही चल रहा है। इस लिए दर्द को बर्दाश्त करना पड़ेगा। अगर दर्द बर्दाश्त न करना हो तो वह किसी नर्सिंगहोम में जाकर ऑपरेशन करवा सकती है। इसके बाद डॉक्टर ने मरीज को भर्ती न करके घर जाने की सलाह देकर किनारा कस लिया।
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इसके बाद दर्द बढ़ने से वह घर नहीं जा सकी और अस्पताल परिसर में ही फर्श पर लेट कर रोने लगी। परिजनों के कहने पर गर्भवती के साथ मौजूद आशा फिर से डॉक्टर से मिलने गई। आरोप है कि डॉक्टर ने फरियाद अनसुनी कर दी। पिंकी की मां ने रोते हुए बताया कि निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं है। इस संबंध में चिकित्सक डॉ. चौबे का कहना था कि गर्भवती के परीक्षण के बाद जरूरी दवाएं लिख कर दी गयी थी। दवा खाने पर मरीज को दर्द से आराम मिलने के बाद ही भर्ती कराने को कहा गया था।
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महीने भर से नहीं हो रही अल्ट्रासाउंड जांच
महिला अस्पताल में गर्भवती व अन्य महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच महीने भर से बंद पड़ी है। उन्हें डाक्टरी परामर्श के बाद अल्ट्रासाउंड से जुड़ी जांच कराने के लिए सड़क पार कर निजी केंद्रों तक जाना पड़ता है। अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में महीने भर से ताला लटका है। अस्पताल कर्मियों के अनुसार तबादले के बाद से रेडियालॉजिस्ट की तैनाती न हो पाने के कारण ही अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा रहता है। इस कारण मरीजों को बाहर जाकर महंगी दर पर जांच कराने को मजबूर होना पड़ता है। इतना ही नहीं बेहोशी के डॉक्टर व सर्जिकल सामानों की कमी भी भर्ती महिलाओं की परेशानी कई गुना बढ़ा देती है। सर्जरी से पहले तीमारदारों को सर्जिकल सामान बाहर से खरीदकर लाने को विवश होना पड़ता है।


सीएमएस महिला अस्पताल डॉ. सुषमा सिंह का कहना है कि अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का बेहतर इलाज किया जाता है। ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किए जाने का निर्देश है। यदि किसी डॉक्टर ने गंभीर मरीज को भर्ती न करके घर ले जाने की सलाह दी है तो इसकी जांच करवाकर कार्रवाई तय होगी।
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