{"_id":"6337319ff15d405db55a09c1","slug":"hospital-investigation-gonda-dead-gonda-news-lko6508775150","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रसूता की मौत मामले में जिम्मेदारी तय, कार्रवाई की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रसूता की मौत मामले में जिम्मेदारी तय, कार्रवाई की तैयारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। जिला महिला अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। यह कार्रवाई परिजनों की शिकायत पर दोबारा हुई जांच के बाद हो रही है। 14 सितंबर को महिला अस्पताल में भर्ती गायत्रीपुरम निवासी प्रियंका श्रीवास्तव की सिजेरियन प्रसव के बाद मौत हो गई थी। प्रसूता के भाई रितेश श्रीवास्तव ने डॉक्टर व स्टाफ नर्स पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था।
परिजनों के आरोप पर जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार के निर्देश पर सीएमओ ने चार सदस्यीय टीम गठित कर जांच करवायी। जांच टीम में रहे एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार, गाइनकोलॉजिस्ट डॉ. पीडी गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार, तथा एनेस्थेटिस्ट डॉ. कुमार ज्ञानम ने जांच कर रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी। परिजनों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अपनी पीड़ा बताई।
प्रसूता के भाई रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि डीएम से मिलने के बाद फिर उनके परिवार को सीएमओ कार्यालय बुलाया गया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा व महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने परिवार के सदस्यों का बयान दर्ज किया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि मामले की जांच में आरोपी डॉ. ललिता केरकेट्टा की लापरवाही सामने आई। संबंधित डॉक्टर का महिला अस्पताल में पुर्नियोजन हुआ है। जिसको बर्खास्त करने के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा जाएगा।
विज्ञापन
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ.सुषमा सिंह ने बताया कि प्रसूता के मामले में जिम्मेदार डॉक्टर की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया वही है, जो संविदा कर्मियों की सेवा समाप्ति का है। जिला स्तर से ही सेवा समाप्त किया जा सकता है।
इसी माह खत्म हो रही थी डॉक्टर की सेवा
प्रसूता मौत मामले में आरोपी डॉ. ललिता केरकेट्टा जिला महिला अस्पताल में कार्यरत थी, जो 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो गई थी, डॉक्टरों की कमी को देखते हुए उनका पुर्नियोजन कर दिया गया। 31 अक्तूबर को उनका फिर से सेवाकाल खत्म हो रहा है, लेकिन यदि कार्रवाई हुई तो पहले ही बर्खास्त कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
परिजनों के आरोप पर जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार के निर्देश पर सीएमओ ने चार सदस्यीय टीम गठित कर जांच करवायी। जांच टीम में रहे एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार, गाइनकोलॉजिस्ट डॉ. पीडी गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार, तथा एनेस्थेटिस्ट डॉ. कुमार ज्ञानम ने जांच कर रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी। परिजनों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अपनी पीड़ा बताई।
विज्ञापन
प्रसूता के भाई रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि डीएम से मिलने के बाद फिर उनके परिवार को सीएमओ कार्यालय बुलाया गया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा व महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने परिवार के सदस्यों का बयान दर्ज किया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि मामले की जांच में आरोपी डॉ. ललिता केरकेट्टा की लापरवाही सामने आई। संबंधित डॉक्टर का महिला अस्पताल में पुर्नियोजन हुआ है। जिसको बर्खास्त करने के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा जाएगा।
विज्ञापन
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ.सुषमा सिंह ने बताया कि प्रसूता के मामले में जिम्मेदार डॉक्टर की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया वही है, जो संविदा कर्मियों की सेवा समाप्ति का है। जिला स्तर से ही सेवा समाप्त किया जा सकता है।
इसी माह खत्म हो रही थी डॉक्टर की सेवा
प्रसूता मौत मामले में आरोपी डॉ. ललिता केरकेट्टा जिला महिला अस्पताल में कार्यरत थी, जो 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो गई थी, डॉक्टरों की कमी को देखते हुए उनका पुर्नियोजन कर दिया गया। 31 अक्तूबर को उनका फिर से सेवाकाल खत्म हो रहा है, लेकिन यदि कार्रवाई हुई तो पहले ही बर्खास्त कर दिया जाएगा।