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Gonda News: जांच में पाया गया दोषी, फिर भी नहीं हुई आरोपी लिपिक पर कार्रवाई
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गोंडा में अमर उजाला में प्रकाशित खबर। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। स्टाफ नर्सों को ज्वाइनिंग लेटर देने में 50 हजार रुपये तक वसूली के बहुचर्चित मामले में एनएचएम का पटल संभाल रहा लिपिक दोषी पाया गया। । अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट में सीएमओ कार्यालय पर तैनात लिपिक शशिकांत सिंह को दोषी माना है। 24 सितंबर को दी जांच रिपोर्ट के बावजूद जिम्मेदारों ने अभी तक लिपिक पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा।
अमर उजाला में ‘50 हजार लाओ तब मिलेगा ज्वाइनिंग लेटर’’ शीर्षक से प्रकाशित खबर में स्टाफ नर्सों को ज्वाइनिंग लेटर देने के बदले वसूली का खुलासा हुआ था। अगस्त माह में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर स्टाफ नर्सों की भर्ती की गई थी। गैर जनपद से आईं कई स्टाफ नर्सों ने ज्वाइनिंग लेटर देने व प्रमाण पत्र सत्यापन के नाम पर 50 हजार तक वसूली का आरोप लगाया था।
नोएडा से आई स्टाफ नर्स वंदना, सुल्तानपुर की कंचन तथा रायबरेली की अंबिका ने वीडियो वायरल कर ज्वाइनिंग लेटर देने में वसूूली का आरोप लगाया था। मंडलायुक्त ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की अगुवाई में टीम बनाकर मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट में बताया कि सीएमओ कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग नहीं दी गई।
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सीएमओ की ओर से सिर्फ 15 दिन तक ही रिकार्डिंग सुरक्षित रखने की बात कही गई। वीडियो वायरल करने वाली नर्सों को अलग-अलग बुलाकर कई बार पूछताछ करने पर वसूली की बात कही गई। नर्सों ने लिखित बयान भी दिया। जबकि आरोपी लिपिक शशिकांत सिंह ने वीडियो वायरल किए जाने वाले दिन 27 व 28 अगस्त को हस्ताक्षर बनाकर लखनऊ जाने का बयान दिया।
स्टाफ नर्सों ने भी लिखित बयान दिया कि जिस दिन वीडियो वायरल हुआ उसके पहले ही अभिलेख सत्यापन के समय पैसों की डिमांड की गई। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने अपनी आख्या में स्पष्ट किया कि लिपिक शशिकांत सिंह स्टाफ नर्सों के ज्वाइनिंग में वसूली मामले में दोषी है। उस पर आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए।
न पटल बदला, न हुई कार्रवाई
वसूली मामले में जांच कर रिपोर्ट दिए जाने के दो महीने बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने आरोपी पर कोई कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। एसडीएम सदर कुलदीप सिंह ने 24 सितंबर को अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंप दी थी, पर दो माह बाद भी न तो आरोपी का पटल बदला गया, न ही कोई अन्य विभागीय कार्रवाई हो सकी।
प्रशिक्षण कराने के नाम पर भी हुई थी वसूली
सीएमओ कार्यालय में वसूली का मामला कोई नया नहीं है। सीएचओ की ज्वाइनिंग हो या नर्सिंग छात्रों का प्रशिक्षण बिना पैसे लिए नहीं कराया जाता। सितंबर में नर्सिंग कोर्स करने वाले छात्रों को सीएचसी पर प्रशिक्षण कराने के नाम पर वसूली का मामला सामने आया था। छात्रों ने आरोप लगाया था कि तीन महीने प्रशिक्षण के लिए 15,000 हजार रुपये तक वसूला जा रहा है। सीएमओ से शिकायत हुई, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
संबधित मामले में जांच रिपोर्ट तलब किया जाएगा। वसूली मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया गया, उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई होगी। दोषी को संरक्षण देने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों से भी जवाब-तलब किया जाएगा। डॉ. अनिल मिश्र, अपर निदेशक स्वास्थ्य
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अमर उजाला में ‘50 हजार लाओ तब मिलेगा ज्वाइनिंग लेटर’’ शीर्षक से प्रकाशित खबर में स्टाफ नर्सों को ज्वाइनिंग लेटर देने के बदले वसूली का खुलासा हुआ था। अगस्त माह में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर स्टाफ नर्सों की भर्ती की गई थी। गैर जनपद से आईं कई स्टाफ नर्सों ने ज्वाइनिंग लेटर देने व प्रमाण पत्र सत्यापन के नाम पर 50 हजार तक वसूली का आरोप लगाया था।
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नोएडा से आई स्टाफ नर्स वंदना, सुल्तानपुर की कंचन तथा रायबरेली की अंबिका ने वीडियो वायरल कर ज्वाइनिंग लेटर देने में वसूूली का आरोप लगाया था। मंडलायुक्त ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की अगुवाई में टीम बनाकर मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट में बताया कि सीएमओ कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग नहीं दी गई।
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सीएमओ की ओर से सिर्फ 15 दिन तक ही रिकार्डिंग सुरक्षित रखने की बात कही गई। वीडियो वायरल करने वाली नर्सों को अलग-अलग बुलाकर कई बार पूछताछ करने पर वसूली की बात कही गई। नर्सों ने लिखित बयान भी दिया। जबकि आरोपी लिपिक शशिकांत सिंह ने वीडियो वायरल किए जाने वाले दिन 27 व 28 अगस्त को हस्ताक्षर बनाकर लखनऊ जाने का बयान दिया।
स्टाफ नर्सों ने भी लिखित बयान दिया कि जिस दिन वीडियो वायरल हुआ उसके पहले ही अभिलेख सत्यापन के समय पैसों की डिमांड की गई। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने अपनी आख्या में स्पष्ट किया कि लिपिक शशिकांत सिंह स्टाफ नर्सों के ज्वाइनिंग में वसूली मामले में दोषी है। उस पर आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए।
न पटल बदला, न हुई कार्रवाई
वसूली मामले में जांच कर रिपोर्ट दिए जाने के दो महीने बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने आरोपी पर कोई कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। एसडीएम सदर कुलदीप सिंह ने 24 सितंबर को अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंप दी थी, पर दो माह बाद भी न तो आरोपी का पटल बदला गया, न ही कोई अन्य विभागीय कार्रवाई हो सकी।
प्रशिक्षण कराने के नाम पर भी हुई थी वसूली
सीएमओ कार्यालय में वसूली का मामला कोई नया नहीं है। सीएचओ की ज्वाइनिंग हो या नर्सिंग छात्रों का प्रशिक्षण बिना पैसे लिए नहीं कराया जाता। सितंबर में नर्सिंग कोर्स करने वाले छात्रों को सीएचसी पर प्रशिक्षण कराने के नाम पर वसूली का मामला सामने आया था। छात्रों ने आरोप लगाया था कि तीन महीने प्रशिक्षण के लिए 15,000 हजार रुपये तक वसूला जा रहा है। सीएमओ से शिकायत हुई, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
संबधित मामले में जांच रिपोर्ट तलब किया जाएगा। वसूली मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया गया, उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई होगी। दोषी को संरक्षण देने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों से भी जवाब-तलब किया जाएगा। डॉ. अनिल मिश्र, अपर निदेशक स्वास्थ्य