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Gonda News: समूहों के नाम पर सरकारी धन का बंटरबांट, 2.47 करोड़ का नहीं मिल रहा हिसाब

Sun, 05 Oct 2025 11:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 05 Oct 2025 11:10 PM IST
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Government funds are being distributed in the name of groups, accounting for Rs 2.47 crore is not available
रुपईडीह ब्लॉक। स्रोत: सोशल मीडिया
रुपईडीह/गोंडा। रुपईडीह ब्लॉक में स्वयं सहायता समूहों के लगभग 49 लाख रुपये के घोटाले के मामले में पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इसके बाद भी अधिकारियों की जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं। समूहों ने नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट में 2.47 करोड़ रुपये के भुगतान का हिसाब ही नहीं मिल रहा है। विभाग के अधिकारी जानकारी जुटा रहे हैं।
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तीन दिसंबर 2024 को बीडीओ अभय कुमार की जांच में घोटाले की पुष्टि के बाद सीडीओ अंकिता जैन के आदेश पर खरगूपुर थाने में मिशन ब्लॉक प्रबंधक कुलदीप तिवारी समेत अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मगर आरोपियों के रसूख के चलते पुलिस घोटाले की रकम जमा करने की बात कहकर अंतिम रिपोर्ट लगाने के दावे करती रही। बीते 16 जुलाई को अमर उजाला के माई सिटी में स्वयं सहायता समूह के लाखों के घोटाले का रिकॉर्ड गायब शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। इसका संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने सीडीओ को पूरे ब्लॉक में समूहों के नाम पर हुए भुगतान की जांच के निर्देश दिए थे। सीडीओ अंकिता जैन ने डीडीओ सुशील कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में चार सदस्यीय कमेटी गठित की। डीडीओ सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि समूहों के नाम पर हुए भुगतान का बैंक स्टेटमेंट मंगवाया गया। एनआरएलएम में कैश भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद लाखों रुपये का भुगतान किया गया। ये भुगतान किसे किया गया, इसके लिए बैंक से वाउचर मांगे गए हैं।
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विभागीय सूत्रों का कहना है कि रुपईडीह ब्लॉक में कुल 993 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। इनमें से 797 समूह सक्रिय हैं। पिछले तीन साल में 581 समूहों को 4.94 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इनमें से 165 समूहों के 2.47 करोड़ के भुगतान का हिसाब नहीं मिल रहा है। वहीं, थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
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अब तक नहीं हुई ठोस कार्रवाई
विभागीय जानकारों का कहना है कि समूहों की रकम के बंदरबांट में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ब्लॉक मिशन प्रबंधक के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अधिकारियों ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दूसरे ब्लॉक में स्थानांतरण ही किया है। ठोस कार्रवाई न होने से आरोपी मिशन प्रबंधक की रुपईडीह ब्लॉक में ही सक्रियता देखी जा रही है।
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