{"_id":"634ef5071fb39c04ae443ead","slug":"gonda-house-flud-gonda-news-lko653500229","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ के बाद अशियानों पर बढ़ा खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ के बाद अशियानों पर बढ़ा खतरा
विज्ञापन
गोंडा। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी प्रभावित इलाकों में दुश्वारियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही। करीब 20 हजार घर बाढ़ के पानी से घिरे हैं, इसमें कच्चे आशियानों पर कटान का संकट भी कई गुना बढ़ गया है। बाढ़ पीड़ित लोग अब अपने आशियाना पर मंडराते खतरे से डरे सहमे हैं। इलाकों में व्याप्त जलभराव से घरों में दरार पड़ने लगी हैं। कई कच्चे घर ढह भी चुके हैं। डीएम डॉ. उज्जवल कुमार का कहना है कि बाढ़ का पानी घटने के बाद ही पीड़ितों के मकानों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन सर्वे करा कर होगा। इसके आधार पर ही पीड़ितों को सीएम अथवा पीएम आवासीय योजना के माध्यम से मदद पहुंचाई जा सकेगी।
बाढ़ का सबसे अधिक कहर इस बार तरबगंज क्षेत्र में रहा, जहां के तीन सौ के करीब गांवों में बाढ़ से जलभराव की स्थिति है। यहां के ऐली परसौली ग्राम के गांवों में ही 50 से अधिक लोगों के घर बह गए हैं। प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार की है। वहीं करनैलगंज के नकहरा गांव में कई घर कटान की जद में हैं। बाढ़ का पानी ज्यादातर कच्चे घरों पर आफत बन कर टूटा है। हालांकि करीब सप्ताह भर तक क्षेत्र में तबाही मचाने के बाद सरयू अब शांत नजर आने लगी है। लेकिन तटवर्ती इलाकों में समस्याएं कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार को तीन बजे सरयू नदी का जलस्तर 92.590 मीटर रहा जोकि खतरे के निशान 14 सेंटीमीटर नीचे है। लेकिन तटवर्ती इलाकों में जगह-जगह जलभराव होने तथा व्याप्त गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। कई इलाकों में जल स्तर कम होने से कटान का खतरा भी बढ़ गया है। नवाबगंज से ढेमवाघाट जाने वाले मार्ग पर सड़क तीन जगह से कट कर नदी में समाहित हो चुकी है।
पीड़ितों ने की मुआवजे की मांग
करनैलगंज(गोंडा)। ग्राम कचनापुर व कुतुबपुर ग्राम पंचायत में पूरी तरह जलभराव होने की स्थिति में खराब हुई फसलों से पीड़ित किसानों ने अब बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग शुरू कर दी है। इसे लेकर ग्रामीणों ने मंगलवार को सीएम योगी को संबोधित एक ज्ञापन भी भेजा। पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ के पानी में कमी तो आई है, लेकिन संकट जस का तस बना है। दूसरी तरफ प्रशासन ने भी स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ ही अन्य सक्षम लोगों से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाढ़ का सबसे अधिक कहर इस बार तरबगंज क्षेत्र में रहा, जहां के तीन सौ के करीब गांवों में बाढ़ से जलभराव की स्थिति है। यहां के ऐली परसौली ग्राम के गांवों में ही 50 से अधिक लोगों के घर बह गए हैं। प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार की है। वहीं करनैलगंज के नकहरा गांव में कई घर कटान की जद में हैं। बाढ़ का पानी ज्यादातर कच्चे घरों पर आफत बन कर टूटा है। हालांकि करीब सप्ताह भर तक क्षेत्र में तबाही मचाने के बाद सरयू अब शांत नजर आने लगी है। लेकिन तटवर्ती इलाकों में समस्याएं कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार को तीन बजे सरयू नदी का जलस्तर 92.590 मीटर रहा जोकि खतरे के निशान 14 सेंटीमीटर नीचे है। लेकिन तटवर्ती इलाकों में जगह-जगह जलभराव होने तथा व्याप्त गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। कई इलाकों में जल स्तर कम होने से कटान का खतरा भी बढ़ गया है। नवाबगंज से ढेमवाघाट जाने वाले मार्ग पर सड़क तीन जगह से कट कर नदी में समाहित हो चुकी है।
विज्ञापन
पीड़ितों ने की मुआवजे की मांग
करनैलगंज(गोंडा)। ग्राम कचनापुर व कुतुबपुर ग्राम पंचायत में पूरी तरह जलभराव होने की स्थिति में खराब हुई फसलों से पीड़ित किसानों ने अब बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग शुरू कर दी है। इसे लेकर ग्रामीणों ने मंगलवार को सीएम योगी को संबोधित एक ज्ञापन भी भेजा। पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ के पानी में कमी तो आई है, लेकिन संकट जस का तस बना है। दूसरी तरफ प्रशासन ने भी स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ ही अन्य सक्षम लोगों से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है।
विज्ञापन