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बेहटा व नएपुरवा गांव का वजूद मिटने की ओर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Aug 2017 10:26 PM IST
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बाढ़
- फोटो : amar ujala
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बीते 15 दिनों से जारी घाघरा की विनाशलीला से गोंडा जिले में प्रस्तावित बाराबंकी जिले के दो गांवों का अस्तित्व समाप्ति की ओर है। इसमें बेहटा व नएपुरवा गांव के लोग अब दूसरी जगह जाकर बसने लगे हैं। 15 दिनों में घाघरा की विनाशलीला में करीब तीन हजार बीघे जमीन नदी में कटकर समा गई।
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वहीं शुक्रवार को करनैलगंज क्षेत्र में बढ़ रहे जलस्तर से नौ ग्राम पंचायतों के करीब 87 मजरे बाढ़ के पानी से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। बाढ़ से प्रभावित मजरों की संख्या बढ़कर 180 के पार हो गई है। शुुक्रवार को एक तरफ घाघरा नदी का जलस्तर दोपहर तक स्थिर रहा उसके बाद अचानक तेजी से पानी बढ़ने लगा। नदी के पानी का डिस्चार्ज बढ़ने से गांवों में पानी तेजी से फैल रहा है।
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करनैलगंज तहसील की बाढ़ से प्रभावित 18 ग्राम पंचायतों की ग्राम पंचायत नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुंइया, पूरे अंगद, भटपुरवा, दिवली, गौरा सिंगपुर, बहुवन मदार मांझा, शिवगढ़, अतरसुइया, मोहम्मदपुर गडवार, मांझा रायपुर, रेक्सड़िया नन्दौर, चरसडी, रेक्सडिया, पूरे अजब एवं चन्दापुर किटौली के अब तक 136 मजरे प्रभावित हो चुके हैं।
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जिले की सीमा पर बसी बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों परसावल, रायपुर, बेहटा, कमियार, नैपूरा व पारा के 44 मजरे पहले से ही बाढ़ प्रभावित हैं जहां से पानी लगातार करनैलगंज क्षेत्र को सीधे प्रभावित कर रहा है। बाढ़ से प्रभावित मजरों की संख्या बढ़कर 180 पहुंच गई है।
जिसमें से करीब 87 मजरे ऐसे हैं। जहां मजरे पूरी तरह से बाढ़ के पानी से जलमग्न हैं। दूसरी ओर बाराबंकी जिले के ग्राम बेहटा के मजरा नयेपुरवा में घाघरा की कटान से मजरे का अस्तित्व लगभग समाप्ति की ओर है। ग्रामीणों का पूरी तरह से पलायन हो चुका है और गांव कटान की जद में है।
उधर पारा गांव के भीतर नदी की कटान शुरू हो गई है जिससे बांध पर भी खतरा तेज होता जा रहा है। प्रशासन ने जलमग्न हो चुके मजरों से ग्रामीणों को निकाल कर राहत केंद्रो पर पहुंचाना शुुरू कर दिया है। चचरी के बड़े मैदान को बाढ़ प्रभावित लोगों का शरण गाह बनाया गया है।