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Gonda News: फर्जी बैनामा के मामले में जांच का दायरा बढ़ा
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गोंडा। फर्जी बैनामा व वसीयत के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। रजिस्ट्री दफ्तर के बाद तहसील के अधिकारी व कर्मचारी जांच से घिर गए हैं। डीआईजी ने मामले के आरोपियों पर कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
जालसाजों ने कूटरचित अभिलेखों से सिर्फ जमीनों का बैनामा ही नहीं कराया, बल्कि मृत हो चुके लोगों के नाम से फर्जी वसीयत भी करवाई। जांच में 14 मामले मिले, जिसमें हेराफेरी की गई। इनकी जिल्द संख्या बदल दी गई। निलंबित सब रजिस्ट्रार सुधा यादव की ओर से डीआईजी को भेजी गई रिपोर्ट में इस हेराफेरी का खुलासा हुआ है।
जिले के तीन रजिस्ट्री दफ्तरों गोंडा सदर, करनैलगंज व तरबगंज में वसीयत बनाने में बड़े स्तर पर खेल हुआ। जिले के अलावा बस्ती, आजमगढ़, बलिया और गोरखपुर तक के लोगों की फर्जी वसीयत यहां बनाई गई। आजमगढ़ के थाना सिधारी अंतर्गत ग्राम बैठोली निवासी रिंकी सिंह के पति की मृत्यु के बाद उसके पति के नाम से फर्जी वसीयत तैयार कर दी गयी। रिंकी की शिकायत पर जांच हुई तो पता चला कि इस फर्जी वसीयतनामे को गोंडा के तत्कालीन उपनिबंधक ने नौ जनवरी 2019 को पंजीकृत कर दिया था।
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गन्ना विकास निरीक्षक के पद पर कार्यरत वीरेंद्र कुमार मिश्रा का निधन साल 2010 में हुआ था। अंबेडकरनगर में उनकी पत्नी व दो बच्चों के नाम प्रशासन ने वरासत की कार्यवाही कर दी। जब 21 अप्रैल 2012 को परिजनों ने खतौनी निकालने का प्रयास किया तो पता चला कि वसीयत पहले ही हो चुकी है। वसीयत 16 अगस्त 2011 को गोंडा के करनैलगंज रजिस्ट्री दफ्तर में हुई। इसके खुलासे के बाद परिजन अब हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
तहसील में दाखिल खारिज करने की मांगी रिपोर्ट
फर्जी बनाने को लेकर जिले में अब तक 47 मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। अधिकतर मामलों की जांच एसआईटी कर रही है। डीआईजी के स्तर से भी जांच कराई जा रही है। कूट रचित दस्तावेज तैयार कर दूसरों की जमीन हड़पने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब इन बैनामों की दाखिल खारिज करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने दाखिल खारिज करने वाले अफसरों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने के लिए जिला अधिकारी को पत्र भेजा है।
बैनामा घोटाला और वसीयत में हेराफेरी की जांच हो रही है। हर बिंदु की जांच हो रही है, दोषियों पर कार्रवाई होगी। उपेंद्र अग्रवाल, डीआईजी देवीपाटन
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जालसाजों ने कूटरचित अभिलेखों से सिर्फ जमीनों का बैनामा ही नहीं कराया, बल्कि मृत हो चुके लोगों के नाम से फर्जी वसीयत भी करवाई। जांच में 14 मामले मिले, जिसमें हेराफेरी की गई। इनकी जिल्द संख्या बदल दी गई। निलंबित सब रजिस्ट्रार सुधा यादव की ओर से डीआईजी को भेजी गई रिपोर्ट में इस हेराफेरी का खुलासा हुआ है।
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जिले के तीन रजिस्ट्री दफ्तरों गोंडा सदर, करनैलगंज व तरबगंज में वसीयत बनाने में बड़े स्तर पर खेल हुआ। जिले के अलावा बस्ती, आजमगढ़, बलिया और गोरखपुर तक के लोगों की फर्जी वसीयत यहां बनाई गई। आजमगढ़ के थाना सिधारी अंतर्गत ग्राम बैठोली निवासी रिंकी सिंह के पति की मृत्यु के बाद उसके पति के नाम से फर्जी वसीयत तैयार कर दी गयी। रिंकी की शिकायत पर जांच हुई तो पता चला कि इस फर्जी वसीयतनामे को गोंडा के तत्कालीन उपनिबंधक ने नौ जनवरी 2019 को पंजीकृत कर दिया था।
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गन्ना विकास निरीक्षक के पद पर कार्यरत वीरेंद्र कुमार मिश्रा का निधन साल 2010 में हुआ था। अंबेडकरनगर में उनकी पत्नी व दो बच्चों के नाम प्रशासन ने वरासत की कार्यवाही कर दी। जब 21 अप्रैल 2012 को परिजनों ने खतौनी निकालने का प्रयास किया तो पता चला कि वसीयत पहले ही हो चुकी है। वसीयत 16 अगस्त 2011 को गोंडा के करनैलगंज रजिस्ट्री दफ्तर में हुई। इसके खुलासे के बाद परिजन अब हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
तहसील में दाखिल खारिज करने की मांगी रिपोर्ट
फर्जी बनाने को लेकर जिले में अब तक 47 मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। अधिकतर मामलों की जांच एसआईटी कर रही है। डीआईजी के स्तर से भी जांच कराई जा रही है। कूट रचित दस्तावेज तैयार कर दूसरों की जमीन हड़पने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब इन बैनामों की दाखिल खारिज करने वाले अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने दाखिल खारिज करने वाले अफसरों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने के लिए जिला अधिकारी को पत्र भेजा है।
बैनामा घोटाला और वसीयत में हेराफेरी की जांच हो रही है। हर बिंदु की जांच हो रही है, दोषियों पर कार्रवाई होगी। उपेंद्र अग्रवाल, डीआईजी देवीपाटन