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मरीजों को पहुंचा रही एंबुलेंस के फेरों में खेल
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फोटो-4 गोंडा के जिला अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। मरीजों को अस्पताल तक लाने और ले जाने वाली एंबुलेंस सेवा 102 व 108 के फेरे बढ़ाने का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। एंबुलेंस सेवा के फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। अप्रैल महीने में जिला महिला अस्पताल में 963 महिलाओं को भर्ती कराया गया। सीएचसी व अन्य प्रसव केंद्रों को मिलाकर करीब 1500 महिलाओं को भर्ती कराया गया। अप्रैल मेें कुल 2,463 महिलाएं भर्ती हुई। लेकिन कागजों पर अप्रैल माह में 102 एंबुलेंस को 9,277 फेरे लगाना दिखाया गया है। इस धांधली का खुलासा होने से अब हड़कंप मचा है। वहीं एंबुलेंस के लिए जो नंबर और आधार दर्ज करवाए गए हैं वह भी फर्जी निकल रहे हैं।
गर्भवती, प्रसूता व अन्य स्त्री रोग से पीड़ित महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने तथा ले जाने के नाम पर 102 एंबुलेंस संचालकों की ओर से फेरे बढ़ाने की शिकायत मिली है। जिले में 102 एंबुलेंस की ओर से गर्भवती, प्रसूता व स्त्री रोग पीड़िता को लाने व घर छोड़ने की सुविधा दी जाती है। विभागीय आंकड़ों की माने तो अप्रैल माह में जिला महिला अस्पताल में कुछ 963 महिलाओं को भर्ती कराया गया है। इसमें 726 का प्रसव हुआ। सीएचसी व अन्य प्रसव केंद्रों पर करीब 1500 महिलाओं को भर्ती कराया गया।
सभी भर्ती मरीजों को एंबुलेंस की सेवा प्रदान की गई तो 2,463 केस ही बनते हैं। जबकि एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी का दावा है कि अप्रैल माह में उनकी गाड़ियों ने 9,227 फेरे लगाए। यदि कुछ अन्य महिलाओं को भी एंबुलेंस की सेवा प्रदान की गई, जिनको भर्ती नहीं कराया गया तो भी आंकड़ों में काफी अंतर आ रहा है। जिले समेत पूरे प्रदेश में इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक परिवार कल्याण ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर निदेशक की देखरेख में गठित टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है।
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जांच टीम को ढूंढे नहीं मिल रहे लाभार्थी
एंबुलेंस सेवा में फर्जीवाड़े का खुलासा करने के लिए नामित टीम को सत्यापन करने में पसीने छूट रहे हैं। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी तथा सीएचसी स्तर पर अधीक्षकों की ओर से मामले की जांच की जा रही है। सत्यापन के लिए जांच अधिकारियों की ओर से लाभार्थियों को कॉल किए जा रहे हैं। अधिकांश नंबरों से उचित जवाब न मिलकर फोन काट दिए जा रहे हैं। एक हजार से अधिक नंबर नॉट रिचेवल मिले हैं। कई लाभार्थियों को फोन करने पर गांव की आशा फोन उठाती हैं। लाभार्थियों के सत्यापन में मुश्किलें आ रही हैं।
चालक व ईएमटी पर दबाव बना बढ़ाए गये फेरे
- एक एंबुलेंस चालक ने बताया कि सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से फेरे बढ़ाने का दबाव बनाया जाता था। बात न मानने पर नौकरी से निकलने की धमकी दी जाती थी। चालकों की ओर से फर्जी आधार व मोबाइल नंबर डालकर फेरों की संख्या बढ़ा दी जाती थी। फर्जी दबाव बनाए जाने तथा ड्यूटी लगाने के लिए वसूली की शिकायत को लेकर बुधवार को कुछ कर्मियों ने एडी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से मुलाकात किया। एडी ने मामले की जांच कराने का निर्देश दिया।
जिले में एंबुलेंस की स्थित
- 108 की 40 एंबुलेंस
- 102 की 39 एंबुलेंस
- कर्मचारी- 300
अप्रैल माह में एंबुलेंस 108 के लिए 5926 तथा 102 के लिए 9277 कॉल आए हैं। कई बार एक ही मरीजों के लिए एक से अधिक कॉल आ जाते हैं। एक ही मरीज के लिए एक से अधिक एंबुलेंस चली जाती हैं। जिससे आंकड़ों में भिन्नता आती है। जो भी कॉल आए हैं, उन्हें सेवा दी गई है। विभाग सत्यापन करवा सकता है। आशीष कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर एंबुलेंस सेवा
एंबुलेंस संचालकों की ओर से फेरा बढ़ाए जाने की शिकायत पर जांच कराई जा रही है। लाभार्थियों को फोन कर उनके नंबर व आधार कार्ड से मिलान किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी। डॉ. अजय प्रताप सिंह, एसीएमओ
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गर्भवती, प्रसूता व अन्य स्त्री रोग से पीड़ित महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने तथा ले जाने के नाम पर 102 एंबुलेंस संचालकों की ओर से फेरे बढ़ाने की शिकायत मिली है। जिले में 102 एंबुलेंस की ओर से गर्भवती, प्रसूता व स्त्री रोग पीड़िता को लाने व घर छोड़ने की सुविधा दी जाती है। विभागीय आंकड़ों की माने तो अप्रैल माह में जिला महिला अस्पताल में कुछ 963 महिलाओं को भर्ती कराया गया है। इसमें 726 का प्रसव हुआ। सीएचसी व अन्य प्रसव केंद्रों पर करीब 1500 महिलाओं को भर्ती कराया गया।
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सभी भर्ती मरीजों को एंबुलेंस की सेवा प्रदान की गई तो 2,463 केस ही बनते हैं। जबकि एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी का दावा है कि अप्रैल माह में उनकी गाड़ियों ने 9,227 फेरे लगाए। यदि कुछ अन्य महिलाओं को भी एंबुलेंस की सेवा प्रदान की गई, जिनको भर्ती नहीं कराया गया तो भी आंकड़ों में काफी अंतर आ रहा है। जिले समेत पूरे प्रदेश में इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक परिवार कल्याण ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर निदेशक की देखरेख में गठित टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है।
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जांच टीम को ढूंढे नहीं मिल रहे लाभार्थी
एंबुलेंस सेवा में फर्जीवाड़े का खुलासा करने के लिए नामित टीम को सत्यापन करने में पसीने छूट रहे हैं। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी तथा सीएचसी स्तर पर अधीक्षकों की ओर से मामले की जांच की जा रही है। सत्यापन के लिए जांच अधिकारियों की ओर से लाभार्थियों को कॉल किए जा रहे हैं। अधिकांश नंबरों से उचित जवाब न मिलकर फोन काट दिए जा रहे हैं। एक हजार से अधिक नंबर नॉट रिचेवल मिले हैं। कई लाभार्थियों को फोन करने पर गांव की आशा फोन उठाती हैं। लाभार्थियों के सत्यापन में मुश्किलें आ रही हैं।
चालक व ईएमटी पर दबाव बना बढ़ाए गये फेरे
- एक एंबुलेंस चालक ने बताया कि सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से फेरे बढ़ाने का दबाव बनाया जाता था। बात न मानने पर नौकरी से निकलने की धमकी दी जाती थी। चालकों की ओर से फर्जी आधार व मोबाइल नंबर डालकर फेरों की संख्या बढ़ा दी जाती थी। फर्जी दबाव बनाए जाने तथा ड्यूटी लगाने के लिए वसूली की शिकायत को लेकर बुधवार को कुछ कर्मियों ने एडी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से मुलाकात किया। एडी ने मामले की जांच कराने का निर्देश दिया।
जिले में एंबुलेंस की स्थित
- 108 की 40 एंबुलेंस
- 102 की 39 एंबुलेंस
- कर्मचारी- 300
अप्रैल माह में एंबुलेंस 108 के लिए 5926 तथा 102 के लिए 9277 कॉल आए हैं। कई बार एक ही मरीजों के लिए एक से अधिक कॉल आ जाते हैं। एक ही मरीज के लिए एक से अधिक एंबुलेंस चली जाती हैं। जिससे आंकड़ों में भिन्नता आती है। जो भी कॉल आए हैं, उन्हें सेवा दी गई है। विभाग सत्यापन करवा सकता है। आशीष कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर एंबुलेंस सेवा
एंबुलेंस संचालकों की ओर से फेरा बढ़ाए जाने की शिकायत पर जांच कराई जा रही है। लाभार्थियों को फोन कर उनके नंबर व आधार कार्ड से मिलान किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी। डॉ. अजय प्रताप सिंह, एसीएमओ