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कार्तिक पूर्णिमा पर पांच हजार लोगों ने किया स्नान, नहीं लगे मेले
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गोंडा के करनैलगंज में कार्तिक पूर्णिमा पर सूना पड़ा सरयू तट।
- फोटो : GONDA
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करनैलगंज(गोंडा)। सैकड़ों वर्ष पुरानी परम्परा के अंतर्गत करनैलगंज के सरयू तट कटरा घाट, पौराणिक स्थल सकरौरा घाट सहित आधा दर्जन घाटों पर लगने वाला स्नान मेला व नहीं लगा।
कोरोना महामारी के चलते प्रशासन की सख्ती के कारण करनैलगंज के सरयू घाट पर पांच लाख की जगह पर मात्र पांच हजार श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान किया। घाट पर पुलिस प्रशासन की सख्ती के असर रहा कि लोग घाट पर नही पहुंचे। बल्कि कुछ स्थानीय लोगों ने स्नान किया। वहीं सकरौरा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा का मेला नहीं लग सका और सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा टूट गयी।
एक समय था जब सकरौरा घाट पर लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा के मेले की गिनती जिले के प्रमुख मेलों में होती थी। यहां एक दिन पूर्व ही लोग मेले में शामिल होने के लिए आ जाते थे। लगभग तीन दशक पूर्व सरयू नदी द्वारा सकरौरा घाट छोड़ दिये जाने के कारण यहां स्नान करने के लिए पानी ही नहीं रह गया जिससे कटरा घाट पर सरयू पुल पर मेला लगने लगा।
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वर्तमान वर्ष में कोरोना महामारी के चलते प्रशासन द्वारा की गयी सख्ती के कारण सकरौरा घाट पर न तो कोई दुकान लगने पायी और न ही प्रशासन द्वारा घाट पर स्थित पोखरे की सफाई ही करायी गयी जिससे यहां पर कोई मेला नहीं लग सका और सैकड़ों वर्षो से चली आ रही परंपरा इस वर्ष टूट गयी।
जहां सैकड़ों वर्षो से प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भारी मेला लगता था तथा मेले में तिल रखने की भी जगह शेष नहीं बचती थी वहीं इस वर्ष सकरौरा घाट पूरी तरह से सन्नाटे में डूबा रहा। दूसरी ओर कटरा घाट तथा ग्राम कटरा शहबाजपुर में भी प्रशासन द्वारा दुकानें नहीं लगाने दी गयीं। जिससे इन दोनों मेलों में भी भीड़ नाम मात्र की ही दिखाई पड़ी।
लोग आकर पवित्र सरयू में डुबकी लगाते और घाट पर मौजूद पंडों को दान दक्षिणा देकर पुण्य अर्जित करते रहे। प्रतिवर्ष इन मेलों में जहां महिलायें भारी संख्या में गृहोपयोगी वस्तुओं की भारी मात्रा में खरीदारी करती थीं वहीं इस वर्ष दुकाने ना लगी होने के कारण उनकी यह इच्छा भी नहीं पूरी हो सकी।
लोग स्नान करके अपने गंतव्य की ओर रवाना होते रहे। इस मौके पर सुरक्षा की दृष्टि से कटरा घाट और कटरा शहबाजपुर के मेलों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। स्वयं कोतवाल मनीष जाट भी मौके पर मौजूद रहकर इस स्थिति का जायजा लेते रहे।
नारायण सरोवर में किया स्नान
फोटो-10,11
मसकनवा (गोंडा)। भगवान घनश्याम महराज की जन्म स्थली स्वामी नारायण छपिया मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह हरिभक्तों ने मंदिर के सामने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया।
दूर दराज से हरिभक्तों ने भगवान घनश्याम महराज के निज व जन्मभूमि मंदिर का दर्शन कर भजन कीर्तन किया। पवित्र नारायण सरोवर तट पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में बच्चे, महिलाओं, युवकों, बुजुर्गों ने खरीददारी की। मेले में कोविड 19 के कारण प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भक्तों की भीड़ कम देखने को मिली।
मंदिर के देव स्वामी जी, गुरु जगत प्रकाश स्वामी, कोठारी विष्णु स्वामी ने भगवान घनश्याम का विधिवत पूजन अर्चन कराया। इस अवसर को मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। मेले में कोविड 19 पालन के नियम लागू कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा था।
सुरक्षा के दृष्टि से छपिया, मनकापुर, मोतीगंज, खोडारे, थाने की पुलिस के साथ पुलिस लाइन गोंडा से साठ जवानों की आमद रही।मौके पर उप जिलाधिकारी मनकापुर हीरालाल, तहसीलदार मिश्रीलाल चौहान, एसओ छपिया संजय तोमर, उप निरीक्षक राजकुमार सिंह, सुरेशमणि मिश्रा आदि रहे।
व्यापारियों को हुआ दस लाख का नुकसान
मोतीगंज (गोंडा)। मोतीगंज थाना क्षेत्र के मनवर नदी के तट पर बसा राजगढ़ पेड़ारन में सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला न लगने पर व्यापारियों का करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ हैं।
राजगढ़ पेड़ारन मे ऐतिहासिक मेला इस बार कोविड 19 को लेकर सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के चलते नही लगा कई दशकों से राजगढ़ पेड़ारन मे मनवर नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला लगता रहा है, लेकिन इस वार मेले पर कोरोना का ग्रहण लग गया है।
मेले में दूर-दूर से लोग आकर अपनी दुकानें लगाते थे और मेले में लोग जमकर गट्टे वा सिगाड़े की खरीदारी करते थे राजगढ़ निवासी अर्जुन वर्मा , अनमोल वर्मा, गोरखनाथा गुप्ता, संगमलाल, जानकी प्रसाद, नानबाबू, गुप्ता, जिलेदार, लक्ष्मी पांडेय, जसवंत सोनी आदि लोगों का कहना है कि मुनि उद्दालक की तपोभूमि पर बसा राजगढ़ पौराणिक स्थल में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लोग पोखरा मे स्नान करने के बाद श्रीराम जानकी मंदिर, हनुमान मंदिर, का दर्शन करते हैं।
मनवर नदी के उद्गम स्थल पर भी नहीं लगा मेला
फोटो-5
इटियाथोक (गोंडा)। मनवर नदी के उद्गम स्थल पर वर्षों पुरानी परंपरा इस साल कोरोना के कारण टूट गई। इस बार यहां लगने वाला विशाल मेला नहीं लगा। हालांकि हालांकि मनवर सरोवर में डुबकी लगाने पर रोक नहीं लगाई गई। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। लेकिन जो रौनक हर साल यहां देखने को मिलती थी। वह इस बार नहीं रही।
गृह मंत्रालय ने किसी भी तरह के मेले के आयोजन पर रोक लगाई गई है। इस वजह से प्रशासन ने भी मेला आयोजन को लेकर कोई तैयारी नहीं की। महर्षि उद्दालक मुनि की तपोस्थली पर लगने वाला विशाल मेला इस बार कोरोना के चलते फीका साबित हो गया। यहां नाम मात्र की ही दुकानें लग सकी।
बाहर से आने वाले दुकानदारों ने वैश्विक महामारी के चलते मेले से दूरी बना ली। वहीं प्रशासन ने भी मेले का आयोजन न होने की घोषणा की थी। सोमवार की सुबह काफी कम संख्या में लोग पवित्र मनवर नदी के उद्गम स्थल के विशाल सरोवर में स्नान करने के लिए पहुंचे। दोपहर तक भी काफी कम संख्या में ही लोग स्नान दान करते देखे गए।
यहां दुकानों, सर्कस व झूले न होने से मेला घूमने वाले लोग थोड़ी देर में वापस हो गए। हालांकि मेले में स्थानीय स्तर के लोगों ने अपनी-अपनी दुकानें लगाई थी। तिर्रेमनोरमा मेले में का प्रसिद्ध गट्टा नजर तो आया मगर इस बार पहले की तरह उसकी खरीदारी नहीं हुई।
कुछ ही दुकानों को छोड़कर बाकी जगह ग्राहक भी दिखाई नहीं दिए। यही हाल मेरा परिसर का भी रहा। वैश्विक महामारी का साफ असर देखा गया। यहां जुटने वाली हजारों लोगों की भीड़ इस बार काफी कम संख्या में सिमट गई।
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कोरोना महामारी के चलते प्रशासन की सख्ती के कारण करनैलगंज के सरयू घाट पर पांच लाख की जगह पर मात्र पांच हजार श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान किया। घाट पर पुलिस प्रशासन की सख्ती के असर रहा कि लोग घाट पर नही पहुंचे। बल्कि कुछ स्थानीय लोगों ने स्नान किया। वहीं सकरौरा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा का मेला नहीं लग सका और सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा टूट गयी।
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एक समय था जब सकरौरा घाट पर लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा के मेले की गिनती जिले के प्रमुख मेलों में होती थी। यहां एक दिन पूर्व ही लोग मेले में शामिल होने के लिए आ जाते थे। लगभग तीन दशक पूर्व सरयू नदी द्वारा सकरौरा घाट छोड़ दिये जाने के कारण यहां स्नान करने के लिए पानी ही नहीं रह गया जिससे कटरा घाट पर सरयू पुल पर मेला लगने लगा।
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वर्तमान वर्ष में कोरोना महामारी के चलते प्रशासन द्वारा की गयी सख्ती के कारण सकरौरा घाट पर न तो कोई दुकान लगने पायी और न ही प्रशासन द्वारा घाट पर स्थित पोखरे की सफाई ही करायी गयी जिससे यहां पर कोई मेला नहीं लग सका और सैकड़ों वर्षो से चली आ रही परंपरा इस वर्ष टूट गयी।
जहां सैकड़ों वर्षो से प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भारी मेला लगता था तथा मेले में तिल रखने की भी जगह शेष नहीं बचती थी वहीं इस वर्ष सकरौरा घाट पूरी तरह से सन्नाटे में डूबा रहा। दूसरी ओर कटरा घाट तथा ग्राम कटरा शहबाजपुर में भी प्रशासन द्वारा दुकानें नहीं लगाने दी गयीं। जिससे इन दोनों मेलों में भी भीड़ नाम मात्र की ही दिखाई पड़ी।
लोग आकर पवित्र सरयू में डुबकी लगाते और घाट पर मौजूद पंडों को दान दक्षिणा देकर पुण्य अर्जित करते रहे। प्रतिवर्ष इन मेलों में जहां महिलायें भारी संख्या में गृहोपयोगी वस्तुओं की भारी मात्रा में खरीदारी करती थीं वहीं इस वर्ष दुकाने ना लगी होने के कारण उनकी यह इच्छा भी नहीं पूरी हो सकी।
लोग स्नान करके अपने गंतव्य की ओर रवाना होते रहे। इस मौके पर सुरक्षा की दृष्टि से कटरा घाट और कटरा शहबाजपुर के मेलों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। स्वयं कोतवाल मनीष जाट भी मौके पर मौजूद रहकर इस स्थिति का जायजा लेते रहे।
नारायण सरोवर में किया स्नान
फोटो-10,11
मसकनवा (गोंडा)। भगवान घनश्याम महराज की जन्म स्थली स्वामी नारायण छपिया मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह हरिभक्तों ने मंदिर के सामने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया।
दूर दराज से हरिभक्तों ने भगवान घनश्याम महराज के निज व जन्मभूमि मंदिर का दर्शन कर भजन कीर्तन किया। पवित्र नारायण सरोवर तट पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में बच्चे, महिलाओं, युवकों, बुजुर्गों ने खरीददारी की। मेले में कोविड 19 के कारण प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भक्तों की भीड़ कम देखने को मिली।
मंदिर के देव स्वामी जी, गुरु जगत प्रकाश स्वामी, कोठारी विष्णु स्वामी ने भगवान घनश्याम का विधिवत पूजन अर्चन कराया। इस अवसर को मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। मेले में कोविड 19 पालन के नियम लागू कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा था।
सुरक्षा के दृष्टि से छपिया, मनकापुर, मोतीगंज, खोडारे, थाने की पुलिस के साथ पुलिस लाइन गोंडा से साठ जवानों की आमद रही।मौके पर उप जिलाधिकारी मनकापुर हीरालाल, तहसीलदार मिश्रीलाल चौहान, एसओ छपिया संजय तोमर, उप निरीक्षक राजकुमार सिंह, सुरेशमणि मिश्रा आदि रहे।
व्यापारियों को हुआ दस लाख का नुकसान
मोतीगंज (गोंडा)। मोतीगंज थाना क्षेत्र के मनवर नदी के तट पर बसा राजगढ़ पेड़ारन में सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला न लगने पर व्यापारियों का करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ हैं।
राजगढ़ पेड़ारन मे ऐतिहासिक मेला इस बार कोविड 19 को लेकर सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के चलते नही लगा कई दशकों से राजगढ़ पेड़ारन मे मनवर नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला लगता रहा है, लेकिन इस वार मेले पर कोरोना का ग्रहण लग गया है।
मेले में दूर-दूर से लोग आकर अपनी दुकानें लगाते थे और मेले में लोग जमकर गट्टे वा सिगाड़े की खरीदारी करते थे राजगढ़ निवासी अर्जुन वर्मा , अनमोल वर्मा, गोरखनाथा गुप्ता, संगमलाल, जानकी प्रसाद, नानबाबू, गुप्ता, जिलेदार, लक्ष्मी पांडेय, जसवंत सोनी आदि लोगों का कहना है कि मुनि उद्दालक की तपोभूमि पर बसा राजगढ़ पौराणिक स्थल में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लोग पोखरा मे स्नान करने के बाद श्रीराम जानकी मंदिर, हनुमान मंदिर, का दर्शन करते हैं।
मनवर नदी के उद्गम स्थल पर भी नहीं लगा मेला
फोटो-5
इटियाथोक (गोंडा)। मनवर नदी के उद्गम स्थल पर वर्षों पुरानी परंपरा इस साल कोरोना के कारण टूट गई। इस बार यहां लगने वाला विशाल मेला नहीं लगा। हालांकि हालांकि मनवर सरोवर में डुबकी लगाने पर रोक नहीं लगाई गई। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। लेकिन जो रौनक हर साल यहां देखने को मिलती थी। वह इस बार नहीं रही।
गृह मंत्रालय ने किसी भी तरह के मेले के आयोजन पर रोक लगाई गई है। इस वजह से प्रशासन ने भी मेला आयोजन को लेकर कोई तैयारी नहीं की। महर्षि उद्दालक मुनि की तपोस्थली पर लगने वाला विशाल मेला इस बार कोरोना के चलते फीका साबित हो गया। यहां नाम मात्र की ही दुकानें लग सकी।
बाहर से आने वाले दुकानदारों ने वैश्विक महामारी के चलते मेले से दूरी बना ली। वहीं प्रशासन ने भी मेले का आयोजन न होने की घोषणा की थी। सोमवार की सुबह काफी कम संख्या में लोग पवित्र मनवर नदी के उद्गम स्थल के विशाल सरोवर में स्नान करने के लिए पहुंचे। दोपहर तक भी काफी कम संख्या में ही लोग स्नान दान करते देखे गए।
यहां दुकानों, सर्कस व झूले न होने से मेला घूमने वाले लोग थोड़ी देर में वापस हो गए। हालांकि मेले में स्थानीय स्तर के लोगों ने अपनी-अपनी दुकानें लगाई थी। तिर्रेमनोरमा मेले में का प्रसिद्ध गट्टा नजर तो आया मगर इस बार पहले की तरह उसकी खरीदारी नहीं हुई।
कुछ ही दुकानों को छोड़कर बाकी जगह ग्राहक भी दिखाई नहीं दिए। यही हाल मेरा परिसर का भी रहा। वैश्विक महामारी का साफ असर देखा गया। यहां जुटने वाली हजारों लोगों की भीड़ इस बार काफी कम संख्या में सिमट गई।