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Gonda News: 74 दिन बाद समीक्षा होने पर दर्ज की एफआईआर
Sun, 06 Sep 2026 11:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:30 PM IST
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गोंडा। ऑनलाइन निवेश में अधिक मुनाफे का झांसा देकर करीब 5.25 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। रविवार को नगर कोतवाली में विवेचक नितिन उपाध्याय ने वादी वीरेंद्र प्रकाश पांडेय का बयान दर्ज किया। अब पुलिस निवेश के नाम पर हुए लेनदेन, बैंक खातों और आरोपियों के नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है।
वीरेंद्र प्रकाश पांडेय ने 17 जून 2026 को तत्कालीन एसपी विनीत जायसवाल के समक्ष जनसुनवाई में शिकायत की थी। इसमें ऑनलाइन निवेश में अधिक मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगाया था। वादी ने गाजियाबाद के पसोंडा गांव के मूल निवासी लविश चौधरी उर्फ नवाब समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी।
तत्कालीन एसपी ने नगर कोतवाली पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। बाद में जनसुनवाई से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा शुरू होने पर पुलिस ने करीब 74 दिन बाद एफआईआर दर्ज की। अब वादी का बयान दर्ज होने के बाद विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है।
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अब बैंक खातों से खुलेगा रकम का राज
मामले में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि गोंडा में निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम आखिर किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ। शिकायत में बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और फॉरेंसिक ऑडिट के जरिये जांच कराने की मांग की गई है। पुलिस निवेशकों से लिए गए रुपये के लेनदेन की जांच के साथ आरोपियों के आपसी संपर्क और कथित नेटवर्क को भी खंगाल रही है। जांच में यदि विदेश से किसी तरह के लेनदेन या दुबई में बैठे किसी व्यक्ति के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर नेटवर्क संचालित होने के साक्ष्य मिलते हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है। विवेचक का कहना है कि प्रकरण की जांच की जा रही है और अभी इस संबंध में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
यह भी हुए शिकार
शिकायत में वादी वीरेंद्र प्रकाश पांडेय और सच्चिदानंद पाठक के करीबी उदय नारायण सिंह, धर्मेंद्र सिंह, प्रेम प्रकाश सिंह, अनिल सिंह, दिनेश चौरसिया, रामानंद पांडेय, शिवकुमार गोस्वामी, प्रशांत मिश्र, शिव बालक जायसवाल, अभय पांडेय, हरीश पांडेय, वीरसेन पांडेय, जयप्रकाश तिवारी, जाफर इकबाल, राजकुमार वैश्य, पवन चौहान, मनीष द्विवेदी, अमित दीक्षित, वीरसेन अवस्थी, संतोष जायसवाल, गुलशेर अंसारी, हरेराम गुप्ता, आलोक कुमार जायसवाल, कमरुद्दीन, भानु देवी और रविंद्र कुमार समेत कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह निवेश के नाम पर ठगी की बात कही गई है। पुलिस अब शिकायत में बताए गए लोगों और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
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वीरेंद्र प्रकाश पांडेय ने 17 जून 2026 को तत्कालीन एसपी विनीत जायसवाल के समक्ष जनसुनवाई में शिकायत की थी। इसमें ऑनलाइन निवेश में अधिक मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगाया था। वादी ने गाजियाबाद के पसोंडा गांव के मूल निवासी लविश चौधरी उर्फ नवाब समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी।
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तत्कालीन एसपी ने नगर कोतवाली पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। बाद में जनसुनवाई से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा शुरू होने पर पुलिस ने करीब 74 दिन बाद एफआईआर दर्ज की। अब वादी का बयान दर्ज होने के बाद विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है।
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अब बैंक खातों से खुलेगा रकम का राज
मामले में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि गोंडा में निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम आखिर किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ। शिकायत में बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और फॉरेंसिक ऑडिट के जरिये जांच कराने की मांग की गई है। पुलिस निवेशकों से लिए गए रुपये के लेनदेन की जांच के साथ आरोपियों के आपसी संपर्क और कथित नेटवर्क को भी खंगाल रही है। जांच में यदि विदेश से किसी तरह के लेनदेन या दुबई में बैठे किसी व्यक्ति के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर नेटवर्क संचालित होने के साक्ष्य मिलते हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है। विवेचक का कहना है कि प्रकरण की जांच की जा रही है और अभी इस संबंध में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
यह भी हुए शिकार
शिकायत में वादी वीरेंद्र प्रकाश पांडेय और सच्चिदानंद पाठक के करीबी उदय नारायण सिंह, धर्मेंद्र सिंह, प्रेम प्रकाश सिंह, अनिल सिंह, दिनेश चौरसिया, रामानंद पांडेय, शिवकुमार गोस्वामी, प्रशांत मिश्र, शिव बालक जायसवाल, अभय पांडेय, हरीश पांडेय, वीरसेन पांडेय, जयप्रकाश तिवारी, जाफर इकबाल, राजकुमार वैश्य, पवन चौहान, मनीष द्विवेदी, अमित दीक्षित, वीरसेन अवस्थी, संतोष जायसवाल, गुलशेर अंसारी, हरेराम गुप्ता, आलोक कुमार जायसवाल, कमरुद्दीन, भानु देवी और रविंद्र कुमार समेत कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह निवेश के नाम पर ठगी की बात कही गई है। पुलिस अब शिकायत में बताए गए लोगों और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।