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न मिल रही खाद न बिक रहा धान, किसान परेशान
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गोंडा। जिले में अन्नदाताओं की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले सूखा फिर बारिश की मार झेल चुके किसान अब एक-एक बोरी खाद के लिए भटक रहे हैं। सहकारी समितियों पर ताला लटक रहा है, वहीं दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं। धान बेचकर सरसों, मटर व गन्ना बोने वाले किसानों के मंसूबों पर पानी फिर रहा है।
2040 रुपये प्रति क्विंटल में बिकने वाला धान किसानों को 1500 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल में बेचना पड़ रहा है। वहीं, 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी 1500 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करने का सरकार का सपना साकार होता नहीं दिख रहा है।
किसान धान बेचकर उससे मिले पैसे से खाद-बीज खरीदता है, जिससे सरसों, मटर, लाही व शरदकालीन गन्ने की बुआई करता है, मगर इस बार किसानों का न तो समर्थन मूल्य पर धान बिक रहा है और न ही अगली फसल की बुआई के लिए खाद मिल रही है।
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वजीरगंज की साधन सहकारी समिति करदा पर दो महीनों से ताला लटका है। सचिव राधेश्याम ने फोन पर बताया कि दो महीनों से कोई खाद नहीं आई। गोदाम का स्टॉक भी शून्य है, कई बार डिमांड भेजी गई मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसी वजह से समिति पर ताला लगा है।
स्थानीय किसान सुखई ने बताया कि सरसों की बुआई के लिए खेत तैयार है, खाद मिल जाती तो समय से बुआई हो जाती। एक दो दिन में नहीं मिली तो बाजार में महंगे दाम में खरीदनी पड़ेगी।
सम्मयदीन ने बताया कि दुकानदार डीएपी 1500 रुपये प्रति बैग तथा यूरिया 500 रुपये प्रति बैग तक बेच रहे हैं। मजबूूरी में महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है। साधन सहकारी समिति मुजेहना में भी ताला लटका है। खाद लेने पहुंचे दत्तनगर निवासी श्यामसुंदर ने बताया कि आलू व सरसों की बुआई के लिए डीएपी की जरूरत है, मगर नहीं मिल पाई तो लौटना पड़ा। बेलसर की साधन सहकारी समिति सिंहपुर में भी दो महीनों से खाद नहीं है, जिससे किसानों को भटकना पड़ रहा है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने गए किसानों की मुश्किल कम नहीं हो रही है। राज्यमंत्री के आदेश के बावजूद किसानों से हाईब्रीड धान के बीज का बिल मांगा जा रहा है। वहीं, नमी व अन्य कारण बताकर किसानों का धान खरीदने से मना किया जा रहा है। हालांकि अधिकारी क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर खरीद की रफ्तार बढ़ाने की कवायद में जुटे हैं।
सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार, सीडीओ गौरव कुमार व डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा ने नवीन गल्ला मंडी के क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर खरीद तेज करने का निर्देश दिया।
डीएम ने क्रय केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिया है कि वे गेहूं बेचने वाले किसानों को फोन कर सरकारी केंद्रों पर ही धान बेचने के लिए प्रेरित करें। किसानों से घोषणा-पत्र भरवाकर हाईब्रीड धान की खरीद करें। किसी भी हालत में किसानों को केंद्र से लौटाया न जाए।
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2040 रुपये प्रति क्विंटल में बिकने वाला धान किसानों को 1500 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल में बेचना पड़ रहा है। वहीं, 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी 1500 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करने का सरकार का सपना साकार होता नहीं दिख रहा है।
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किसान धान बेचकर उससे मिले पैसे से खाद-बीज खरीदता है, जिससे सरसों, मटर, लाही व शरदकालीन गन्ने की बुआई करता है, मगर इस बार किसानों का न तो समर्थन मूल्य पर धान बिक रहा है और न ही अगली फसल की बुआई के लिए खाद मिल रही है।
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वजीरगंज की साधन सहकारी समिति करदा पर दो महीनों से ताला लटका है। सचिव राधेश्याम ने फोन पर बताया कि दो महीनों से कोई खाद नहीं आई। गोदाम का स्टॉक भी शून्य है, कई बार डिमांड भेजी गई मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसी वजह से समिति पर ताला लगा है।
स्थानीय किसान सुखई ने बताया कि सरसों की बुआई के लिए खेत तैयार है, खाद मिल जाती तो समय से बुआई हो जाती। एक दो दिन में नहीं मिली तो बाजार में महंगे दाम में खरीदनी पड़ेगी।
सम्मयदीन ने बताया कि दुकानदार डीएपी 1500 रुपये प्रति बैग तथा यूरिया 500 रुपये प्रति बैग तक बेच रहे हैं। मजबूूरी में महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है। साधन सहकारी समिति मुजेहना में भी ताला लटका है। खाद लेने पहुंचे दत्तनगर निवासी श्यामसुंदर ने बताया कि आलू व सरसों की बुआई के लिए डीएपी की जरूरत है, मगर नहीं मिल पाई तो लौटना पड़ा। बेलसर की साधन सहकारी समिति सिंहपुर में भी दो महीनों से खाद नहीं है, जिससे किसानों को भटकना पड़ रहा है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने गए किसानों की मुश्किल कम नहीं हो रही है। राज्यमंत्री के आदेश के बावजूद किसानों से हाईब्रीड धान के बीज का बिल मांगा जा रहा है। वहीं, नमी व अन्य कारण बताकर किसानों का धान खरीदने से मना किया जा रहा है। हालांकि अधिकारी क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर खरीद की रफ्तार बढ़ाने की कवायद में जुटे हैं।
सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार, सीडीओ गौरव कुमार व डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा ने नवीन गल्ला मंडी के क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर खरीद तेज करने का निर्देश दिया।
डीएम ने क्रय केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिया है कि वे गेहूं बेचने वाले किसानों को फोन कर सरकारी केंद्रों पर ही धान बेचने के लिए प्रेरित करें। किसानों से घोषणा-पत्र भरवाकर हाईब्रीड धान की खरीद करें। किसी भी हालत में किसानों को केंद्र से लौटाया न जाए।